94000 KM प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी की ओर आ रहा खतरनाक श्रेणी का एस्टेरॉयड, NASA ने कही ये बात
नई दिल्ली, 20 अगस्त: अंतरिक्ष में बहुत से एस्टेरॉयड घूमते रहते हैं, जिनकी पृथ्वी से भी टकराने की आशंका बनी रहती है। इस वजह से ये हमेशा खलोगविदों के लिए चिंता का विषय रहे हैं। अब करीब 4500 फीट व्यास का एक एस्टेरॉयड पृथ्वी की ओर आ रहा है, जो 21 अगस्त की रात को पृथ्वी के पास से गुजरेगा। नासा ने इसको 2016 AJ193 नाम दिया है, साथ ही इसे संभावित खतरनाक वाली श्रेणी में रखा है।
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इस बार कोई खतरा नहीं
नासा के मुताबिक इस एस्टेरॉयड की रफ्तार 94,208 किलोमीटर प्रति घंटे है। खगोलविद टेलीस्कोप के जरिए उसके ऊपर नजर बनाए हुए हैं। जब वो पृथ्वी के पास से गुजरेगा, तो वो उस अद्भुत नजारे को देखेंगे। अभी के अनुमान के मुताबिक उसकी हमारे ग्रह से दूरी चंद्रमा के बीच की दूरी की नौ गुना होगी। वैज्ञानिकों ने साफ किया कि इस बार तो इससे कोई खतरा नहीं है, लेकिन ये एस्टेरॉयड 2063 में पृथ्वी के बहुत ही करीब होगा। ऐसे में इसे खतरनाक श्रेणी में डाला गया है।

2016 में हुई थी खोज
वैज्ञानिकों ने बताया कि इसे पहली बार जनवरी 2016 में हवाई के हलाकाला वेधशाला में स्थित पैनोरमिक सर्वे टेलीस्कोप और रैपिड रिस्पांस सिस्टम (पैन-स्टारआरएस) के जरिए देखा गया था। इसके बाद नासा ने इसका निरीक्षण करने के लिए NEOWISE अंतरिक्ष यान का उपयोग किया। EarthSky की रिपोर्ट के मुताबिक जांच में खगोलविदों ने पाया कि ये एस्टेरॉयड बहुत ही गहरा है। इसके घूमने की अवधि, ध्रुव दिशा और वर्णक्रमीय वर्ग का अभी पता नहीं चल पाया है।

दूरी 65 सालों में न्यूनतम
हालांकि जांच में ये बात पता चली कि ये एस्टेरॉयड हर 5.9 साल में सूर्य की परिक्रमा पूरी करता है। बाद में ये पृथ्वी के करीब पहुंचा जाता है, लेकिन फिर बृहस्पति की कक्षा से आगे निकल जाता है। एक अनुमान के मुताबिक जब 21 अगस्त को ये गुजरेगा, तो पृथ्वी से इसकी दूरी पिछले 65 सालों में न्यूनतम होगी।

पिछले महीने गुजरा था एस्टेरॉयड
आपको बता दें कि 31 जुलाई को भी एक एस्टेरॉयड पृथ्वी के करीब से गुजरा था, जिसका नाम 2019 YM6 है। इस एस्टेरॉयड का व्यास 100-230 मीटर के करीब है। ऐसे में इसे आप क्रिकेट स्टेडियम जितना मान लीजिए। इसके अलावा जब ये हमारे ग्रह के पास से गुजरा तो उसकी रफ्तार 48491 किलोमीटर प्रति घंटे थी।

बचने का ये प्लान
वैज्ञानिक एस्टेरॉयड को बड़ी चिंता का विषय मानते हैं। उनके मुताबिक आज नहीं तो कल कोई बड़ा एस्टेरॉयड पृथ्वी से जरूर टकराएगा। हालांकि अब इससे निपटने के कई रास्ते खोज लिए गए हैं। जिसमें सबसे अहम है कम्यूनिकेशन सैटेलाइट। पृथ्वी की कक्षा में हजारों सैलेटाइट हैं। जिनका वजन काफी ज्यादा होता है, अगर एक साथ कई सैटेलाइट्स को एस्टेरॉयड की ओर फेंका जाए, तो वो बल से इसका रास्ता बदल देंगे। इसके अलावा चीन एस्टेरॉयड का रास्ता भटकाने के लिए कई रॉकेट को लॉन्च करने की योजना बना रहा है।












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