'इंसानों को खतरे में डाल रहा अमेरिका', अगर मंगल से आए सैंपल से फैला संक्रमण तो क्या करेंगे इंसान?

नई दिल्ली: सौरमंडल के दो ग्रह पृथ्वी और मंगल में काफी समानता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि करोड़ों साल पहले मंगल पर पानी था, ऐसे में हो सकता है कि उस वक्त वहां पर जीवन भी रहा हो। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा इस पर काफी लंबे वक्त से रिसर्च कर रही है। पिछले साल नासा ने अपने पर्सिवरेंस रोवर को मंगल पर उतारा था, जो वहां पर खुदाई करके लगातार सैंपल इकट्ठा कर रहा है। इन सैंपल्स को पृथ्वी पर लाने की भी प्रक्रिया चल रही, लेकिन अब बहुत से वैज्ञानिकों ने इस पर चिंता जताई है।

मंगल पर इंसानों का जाना अभी संभव नहीं

मंगल पर इंसानों का जाना अभी संभव नहीं

दरअसल नासा का मानना है कि अगर मंगल पर जीवन के सबूत पाने हैं, तो वहां के सैंपल्स की जांच करनी जरूरी है। अभी इंसान इतने विकसित नहीं कि वो मंगल पर जाकर वापस आ पाएं, ऐसे में पर्सिवरेंस ने जो सैंपल इकट्ठा किया है, उसे पृथ्वी पर लाने की तैयारी हो रही है। इसमें वहां की मिट्टी, पत्थर आदि शामिल होंगे। नासा ने इसके लिए अगल यान पर काम शुरू कर दिया है, लेकिन उसके इस प्रोजेक्ट पर कई वैज्ञानिकों ने सवाल उठाए हैं।

आलोचकों ने कही ये बात

आलोचकों ने कही ये बात

कुछ वैज्ञानिकों और आलोचकों ने कहा कि नासा का ये कदम बहुत ही मूर्खतापूर्ण है। अगर हम मंगल ग्रह से सैंपल लेकर आ रहे और उससे पृथ्वी पर कोई संक्रमण फैला तो इंसानी सभ्यता मुश्किल में पड़ सकती है। इसके अलावा हमारे वायुमंडल पर भी इसका बुरा असर पड़ सकता है। अभी तक किसी को नहीं पता कि मंगल के सैंपल में क्या विनाशक चीजें छिपी हैं। ऐसे में नासा की वजह से सभी खतरे में पड़ जाएंगे।

नासा ने दी ये सफाई

नासा ने दी ये सफाई

इस पर नासा ने कहा कि ये मानना गलत है कि मंगल के सैंपल से धरती पर खतरा पैदा होगा। उन्होंने इसके लिए खास तैयारी की है। वहां से आने वाले सैंपल खास तरह के चैंबर में पैक होकर आएंगे। इसके बाद हाई सिक्योरिटी लैब में इनकी जांच की जाएगी। इस दौरान ऐसे सभी उपकरणों की तैनाती होगी, जिससे संक्रमण ना फैले। इस पर आलोचकों ने कहा कि अगर किसी वैज्ञानिक से गलती हो गई और कोई नया वायरस या बैक्टीरिया धरती पर फैल गया तो क्या होगा? आखिर वैज्ञानिक भी तो इंसान हैं, उनसे भी गलती हो सकती है।

कितने साल लगेंगे?

कितने साल लगेंगे?

वैसे मंगल से सैंपल पृथ्वी पर लाने में अभी 10 साल से ज्यादा का वक्त लगेगा। इसके अलावा इसमें 4 अरब डॉलर खर्च होगा। मंगल पृथ्वी से इतना ज्यादा दूर है कि वहां पर रॉकेट भेजने पर वापस आने का ईंधन नहीं बचेगा, ऐसे में ऐसी तकनीकी तैयारी की जा रही, जिससे रॉकेट मंगल पर ही अपना ईंधन तैयार करेगा। इसके बाद वो रिफ्यूलिंग करके वापस आएगा।

मैगी जैसा मलबा मिला

मैगी जैसा मलबा मिला

वहीं दूसरी ओर नासा के रोवर ने स्पेगेटी के आकार का आकर्षक मलबा ढूंढ़ निकाला है, जो देखने में हूबहू मैगी जैसा लगता है। इसकी तस्वीर भी अंतरिक्ष एजेंसी ने जारी की है। इसके बाद से ये चर्चा तेज हो गई है कि क्या वाकई में मंगल पर एलियंस हैं?

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