बृहस्पति की मशहूर धारियों का रहस्य सुलझा, इसके रंगों की पहेली में उलझे थे वैज्ञानिक
बृहस्पति ग्रह की धारियां क्यों बदलती रहती हैं? यह वैज्ञानिकों के लिए एक बड़ा रहस्य रहा है। लेकिन, अब खगोलविदों ने इसपर से पर्दा उठाने का दावा किया है और इससे खगोल विज्ञान को बड़ी सफलता मिली है।

बृहस्पति अपने रहस्यमय रंगों, अपने तूफान के प्रकोप और हमारे सौर मंडल के ग्रहों में अपने विशाल आकार के कारण जाना जाता है। दशकों से वैज्ञानिक को इसकी एक और बात खटकती रही है। इसकी धारियों में होने वाला बदलाव। खगोलविदों को इसके रंगों की धारियां यह सोचने के लिए मजबूर करते रहे हैं कि यह अक्सर गतिशील और बदले हुए क्यों नजर आने लगते हैं।

गुरु की सतह पर होने वाली उथल-पुथल है कारण
खगोल वैज्ञानिक अभी तक नहीं समझ पाए थे कि आखिर बृहस्पति की धारियों में होने वाले बदलाव की वजह क्या है। अब शोधकर्ताओं की एक टीम ने पाया है कि यह ग्रह पर हो रहे मंथन या उथल-पुथल (churning ) की वजह से हो सकता है, जिसके चलते इसका चुंबकीय क्षेत्र उत्तेजित हो जाता है।

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रंगों में बदलाव मौसम में परिवर्तन का संकेत है
बृहस्पति की भूमध्य रेखा के चारों ओर अक्षांश रेखाओं के साथ-साथ इसकी धारियां दिखाई पड़ती हैं और इन क्षेत्रों के रंग बेतरतीब तरीके से बदलते नजर आते हैं। रंगों में बदलाव से ग्रह पर मौसम में परिवर्तन का पता चलता है। यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स के स्कूल ऑफ मैथ्स के प्रोफेसर क्रिस जोन्स ने एक बयान में इसके बारे में बताया है।

जूनो स्पेसक्राफ्ट ने जुटाया है डेटा
उनके मुताबिक, 'बेल्ट का रंग बदल सकता है और कई बार मौसम का पूरा पैटर्न थोड़ा मस्त हो जाता है और यह एक रहस्य रहा है कि ऐसा क्यों होता है....' यह शोध जर्नल नेचर एस्ट्रोनॉमी में प्रकाशित हआ है, जिसके लिए नासा के जूनो स्पेसक्राफ्ट के द्वारा बृहस्पति का डेटा जुटाया गया है।

चुंबकीय क्षेत्र में बदलावों की गणना कर ली है
लीड्स यूनिवर्सिटी के खगोलविदों ने यह बताया है कि इसके रंगों में अंतर ग्रह के चुंबकीय क्षेत्र से पैदा हुए तरंगों के कारण हो सकती है, जो इसके आंतरिक भाग की गहराइयों में है। यह गैसीय ग्रह की सतह से करीब 50 किलोमीटर नीचे होता है। शोधकर्ताओं ने अब इसके चुंबकीय क्षेत्र के बदलावो की गणना कर ली है।
'मौसमी पैटर्न में मस्ती छा जाती है'
प्रोफेसर जोन्स के मुताबिक 'प्रत्येक चार या पांच साल में चीजें बदल जाती हैं। बेल्ट भाग के रंग बदल सकते हैं और कई बार आप इसके पूरे हिस्से में उथल-पुथल देखते हैं, जब पूरे मौसमी पैटर्न पर थोड़ी-बहुत मस्ती छा जाती है और यह रहस्य रहा है कि ऐसा होता क्यों है।'

ग्रेट ब्लू स्पॉट की निगरानी की गई
वैज्ञानिकों की टीम ने बृहस्पति के चुंबकीय क्षेत्र का कई वर्षों तक अध्ययन किया। इसकी तरंगों और दोलन पर नजर रखा। इस दौरान उन्हें इसके चुंबकीय क्षेत्र में एक खास जगह की निगरानी का मौका मिला, जिसे ग्रेट ब्लू स्पॉट कहते हैं।
यह स्थान पूरब की ओर ओर बढ़ रहा है, लेकिन ताजा डेटा बताते हैं कि इसकी गति कम हुई है। इसकी वजह से वैज्ञानिकों को यह विश्वास हुआ है कि इसपर उथल-पुथल मचने की शुरुआत होने वाला है। प्रोफेसर जोन्स का कहना है, 'मुझे उम्मीद है कि हमारा शोधपत्र बृहस्पति की आंतरकि गहराइयों के रहस्य पर से पर्दा उठाएगा, ठीक उसी तरह से जैसे भूकंप विज्ञान पृथ्वी के लिए करता है और हेलियोसिस्मोलॉजी सूर्य के लिए करता है।'












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