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सूर्य पर उठीं रहस्यमयी तरंगें, भौतिक का नियम टूटा, वैज्ञानिकों की सोच से भी तीन गुना तेज

अबू धाबी, 29 मार्च: पृथ्वी पर जीवन का स्रोत सूर्य में है। यह भी सच है कि सूरज अभी भी वैज्ञानिकों के लिए काफी हद तक रहस्य ही बना हुआ है और इसको लेकर मानव की जिज्ञासा भी कभी खत्म नहीं हुई है। इस दौरान वैज्ञानिकों को सूरज की सतह पर एक अप्रत्याशित घटना देखने को मिली है। सूरज की सतह पर बहुत ही हाई-फ्रिक्वेंसी वाली रहस्यमयी ध्वनिक तरंगें देखी गई हैं। रहस्यमयी इसलिए कि लगातार 25 साल तक नजर रखने के बाद, वैज्ञानिकों ने सूर्य पर कुछ इस तरह की गतिविधियां देखी हैं, जो भौतिक विज्ञान के नियमों से भी परे लग रही हैं। मतलब ये रहस्यमयी सौर तरंगें विज्ञान के सिद्धांत से भी तीन गुना तेजी से आ-जा रही हैं।

सूरज पर वैज्ञानिकों की सोच से भी तीन गुना तेज ध्वनि तरंगें

सूरज पर वैज्ञानिकों की सोच से भी तीन गुना तेज ध्वनि तरंगें

वैज्ञानिकों ने सूरज की सतह पर एक अनोखी नई तरह की हाई-फ्रिक्वेंसी तरंग का पता लगाया है। ये सौर लहरें वैज्ञानिकों की सोच के मुताबिक मुमकिन होने वाली स्पीड से भी तीन गुना तेजी से बढ़ रही हैं। ये ध्वनि तरंगें (एकॉस्टिक वेव्स) हैं, जिन्हें हाई-फ्रिक्वेंसी रेट्रग्रेड (एचएफआर) भंवर तरंगे भी कहते हैं। यह नई और अजीब सौर लहरें सूरज के प्लाज्मा से बहाव के उलट चल रही हैं। पहले से अनजाने इन तरंगों के बारे में 24 मार्च को नेचर एस्ट्रोनॉमी जर्नल में प्रकाशित शोध में बताया गया है।

खगोल विज्ञान की अभूतपूर्व घटना

खगोल विज्ञान की अभूतपूर्व घटना

मूल रूप से लाइव साइंस में छपी इस रिपोर्ट के मुताबिक वैज्ञानिकों के लिए सूरज की गहराइयों में झांक पाना अभी तक नामुमकिन है, इसलिए वे उन एकॉस्टिक वेव्स को ही मापते हैं जो सूरज की सतह पर घूमती रहती हैं और फिर से इसके अंदर उसके मूल की ओर वापस लौट जाती हैं। अंतरिक्ष और जमीन पर मौजूद टेलीस्कोप से जुटाए गए 25 साल के डेटा के विश्लेषण से इस रहस्यमयी घटना का पता चला है। इस अध्ययन में जिस तरह की एचएफआर तरंगों को देखा गया है, वह खगोल विज्ञान की अभूतपूर्व घटना है और वैज्ञानिकों के मुताबिक शायद वे लोग कुछ बहुत बड़ी चीज नजरअंदाज कर रहे हैं।

सूर्य के आंतरिक भाग के अध्ययन में मिल सकती है मदद

सूर्य के आंतरिक भाग के अध्ययन में मिल सकती है मदद

न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के अबू धाबी सेंटर फॉर स्पेस साइंस के खगोलविद् और इस शोध के को-ऑथर श्रवण हनासोगे ने एक बयान में कहा है, 'एचएफआर मोड का अस्तित्व और उनकी उत्पत्ति सही में रहस्य है और मौजूदा भौतिकी के लिए रोमांचक कार्य का संकेत दे सकता है।' 'इसमें सूरज के अबतक के अदृश्‍य आंतरिक भाग के बारे में जानकारी देने की संभावना है।' पहले वैज्ञानिक ये समझते थे कि ध्वनिक सौर लहरें कोरियोलिस इफेक्ट की वजह से सूरज की सतह के नजदीक बनती हैं। लेकिन, इस शोध से पता चलता है कि वह बाउंस बैक करके सूर्य के मूल की ओर चली जाती हैं।

वैज्ञानिकों के सामने आए रोमांचक सवाल

वैज्ञानिकों के सामने आए रोमांचक सवाल

रिसर्च पेपर के मुताबिक, 'हमने तीन संभावनाओं की तलाश की: या तो सूरज का चुंबकीय क्षेत्र या उसका गुरुत्वाकर्षण कोरियोलिस तरंगों को एचएफआर सुपरहॉट लहरों को इसकी सतह के नीचे बढ़ा सकती हैं और उसके पार जाने वाली अभूतपूर्व रूप से उच्च गति तक खींच सकती हैं। लेकिन, इनमें से कोई भी संभव प्रक्रिया डेटा से फिट नहीं बैठता।' पहले ऑथर क्रिस हानसोन ने बयान में कहा है, 'यदि एचएफआर तरंगों को इन तीन प्रक्रियाओं में से किसी के लिए जिम्मेदार माना जा सकता है, तो इस खोज ने कुछ स्वाभाविक सवालों का उत्तर दिया होगा, जो सूर्य के बारे में अभी भी हमारे पास हैं।' 'हालांकि, ये नई तरंगें इन प्रक्रियाओं का परिणाम नहीं लगतीं, और यही रोमांचक है, क्योंकि यह सवालों के एक नए सेट की ओर ले जाता है।(तस्वीरें-प्रतीकात्मक)

पृथ्वी और सौर मंडल का भी खुल सकता है और रहस्य!

बहरहाल, इस शोध के बिंदुओं को मिलाने पर शोधकर्ताओं को सूर्य के भीतरी हिस्से के बारे में समझ बढ़ाने में काफी मदद मिलेगी। साथ ही साथ यह भी ज्यादा बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा कि यह पृथ्वी और सौर मंडल के दूसरे ग्रहों को किस तरह से प्रभावित करता है। यही नहीं, इससे इसी तरह के एक और हाई-फ्रिक्वेंसी वेव को समझने में मदद मिल सकती है, जिसे रॉसबी वेव कहते हैं, जिन्हें मौजूदा मॉडलों की तुलना में चार गुना ज्यादा तेजी से पृथ्वी के महासागरों को पार करते देखा गया है।

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