सूरज में लगातार विशालकाय हो रहा है रहस्यमय स्पॉट, दो दिनों में 10 गुना बढ़ा आकार, पृथ्वी पर सीधा असर!
सूरज के "सक्रिय क्षेत्र" को वैज्ञानिकों ने AR3085 नाम दिया है, जिसमें यह दिखाई दिया है, वो चंद दिनों पहले तक सिर्फ एक ब्लिप था, लेकिन अब उसका आकार काफी तेजी से बढ़ रहा है।
नई दिल्ली, अगस्त 25: वैज्ञानिकों ने एक तेजी से बढ़ते हुए सनस्पॉट का पता लगाया है, जिससे सीधे पृथ्वी को लेकर खतरे की आशंका बढ़ने लगी है और और आने वाले दिनों में पृथ्वी के रास्ते में सौर ऊर्जा का हमला शुरू हो सकता है। सूरज में बना ये सनस्पॉट लगातार विशालकाय हो रहा है और वैज्ञानिकों ने पता लगाया है, कि पिछले दो दिनों में ये सनस्पॉट 10 गुना बढ़ गया है।

सूरज पर कहां बन रहा सनस्पॉट?
वैज्ञनिकों के मुताबिक, सूरज के "सक्रिय क्षेत्र" को वैज्ञानिकों ने AR3085 नाम दिया है, जिसमें यह दिखाई दिया है, वो चंद दिनों पहले तक सिर्फ एक ब्लिप था, लेकिन अब उसका आकार काफी तेजी से बढ़ रहा है और पिछले दो दिनों में तो इसमें आकार में आश्चर्यजनक इजाफा हुआ है और ये 10 गुना बढ़ गया है। SpaceWeather.com के एक रिपोर्ट के मुताबिक, ये सनस्पॉट अब 10 गुना बड़ा हो गया है, जो सूर्य के धब्बों की एक जोड़ी में बदल जाता है, और इस विशालकाय सनस्पॉट में एक साथ कई पृथ्वी समा सकती है।

पृथ्वी के लिए है सीधा खतरा
स्पेसवेदर की रिपोर्ट के अनुसार, इस सनस्पॉट के आसपास के क्षेत्र से काफी विशालकाय मात्रा में सौर फ्लेयर्स का जन्म होता है, जिसमें लगातार विद्युत चुम्बकीय विकिरण के बड़े विस्फोट होते रहते हैं, जो सूर्य की सतह से निकल कर अंतरिक्ष की तरफ फैलते रहते हैं और अगर इनकी रफ्तार ज्यादा हुई, तो ये पृथ्वी के अंतरिक्ष में आ सकते हैंऔर इस बार भी इस सनस्पॉट के चारों ओर "क्रैकिंग" का पता चला है। हालांकि, अच्छी बात ये है, कि वे सभी वर्तमान में सी-क्लास फ्लेयर्स हैं, जो सरकारी उपग्रहों द्वारा ट्रैक किए जाने वाले सोलर फ्लेयर्स के तीन स्तरों में सबसे कमजोर स्तर में आते हैं। ए-, बी- और सी-क्लास फ्लेयर्स आमतौर पर पृथ्वी पर असर डालने के लिए लिहाज से काफी कमजोर होते हैं, लेकिन डरने की बात ये है, कि इन सनफ्लेयर्स की रफ्तार में अचानक परिवर्तन हो जाता है।

नासा के बयान में क्या है?
नासा के अनुसार, एम-क्लास फ्लेयर्स मजबूत होते हैं, जो उच्च अक्षांशों पर रेडियो ब्लैकआउट पैदा करने में सक्षम हैं, जबकि एक्स-क्लास फ्लेयर्स सबसे मजबूत होते हैं और व्यापक रेडियो ब्लैकआउट, उपग्रहों को नुकसान पहुंचाने वाले और पृथ्वी पर मौजूद पावर ग्रिड के लिए काफी ज्यादा खतरा पैदा कर सकते हैं। ऐसा पहले भी हो चुका है, लिहाजा वैज्ञानिक लगातार इस सनस्पॉट और इसके आसपास के क्षेत्र से निकलने वाले सोलर फ्लेयर्स पर नजर बनाए हुए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है, कि यदि आने वाले दिनों में ये धब्बे बढ़ते रहे, तो वे मजबूत फ्लेयर्स पैदा कर सकते हैं और फिर इसके आसपास से जो सोलर फ्लेयर्स पैदा होगा, वो सीधे पृथ्वी की तरफ बढ़ सकता है, लिहाजा पृथ्वी की कक्षा में घूमने वाले सैटेलाइट्स पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ेगा और संचार प्रणाली पर इसका गंभीर असर हो सकता है। हालांकि, वैज्ञानिकों ने कहा कि, फिलहाल कोई खतरा नहीं दिख रहा है।

क्या होते हैं सनस्पॉट?
सनस्पॉट मजबूत चुंबकीय क्षेत्रों के बड़े और अंधेरे क्षेत्र होते हैं जो सूर्य की सतह पर बनते हैं। ProfoundSpace.org के मुताबिक, ये क्षेत्र आम तौर पर ग्रहों के रूप में व्यापक रूप से मापे जाते हैं और ये काफी गहरे दिखाई देते हैं और और ये अपने परिवेश की तुलना में ठंडे होते हैं। वे वहां बनते हैं जहां सूर्य के चुंबकीय क्षेत्र के बैंड आपस में उलझ जाते हैं और फिर इनका आकार बढ़ने लगता है, जिससे सूर्य के आंतरिक भाग से गर्म गैस का प्रवाह रूकने लगता है और फिर सूर्य की सतह पर ठंडे, गहरे क्षेत्रों का निर्माण होने लगता है। चुंबकीय ऊर्जा के ये ढेर अक्सर सौर ज्वालाओं का कारण बनते हैं। एक निश्चित समय में सूर्य पर जितने अधिक सनस्पॉट दिखाई देते हैं, उतनी ही अधिक संभावना है कि सौर ज्वालाएं फूटेंगी।

सूर्य के 11 सालों का चक्र
सनस्पॉट और सोलर फ्लेयर्स, ये दोनों सूरज के 11 सालों के एक चक्र से जुड़ी हिई हैं, जो हर दशक में उच्च और निम्न सनस्पॉट घनत्व की अवधि के बीच संक्रमण करती है। अगला सौर अधिकतम - या उच्चतम सनस्पॉट गतिविधि की अवधि 2025 में हिट होने की भविष्यवाणी की गई है, जिसमें अधिकतम गतिविधि के दिनों में सूर्य की सतह पर 115 सनस्पॉट दिखाई देने की संभावना है। सौर गतिविधि पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ रही है, कई एक्स-क्लास फ्लेयर्स हमारे ग्रह की तरफ इस साल ही बढ़े हैं। अगले सौर चक्र में सनस्पॉट के साथ साथ सोलर फ्लेयर्स की संख्या में वृद्धि होने की संभावना है।












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