म्यांमार सेना ने अपने ही देश में स्कूल को उड़ाया, 7 बच्चों समेत 13 लोगों की मौत, हेलीकॉप्टर से किया हमला
सागाइंग में लड़ाई विशेष रूप से भयंकर होते जा रही है, जहां सेना ने कई आक्रामक अभियान शुरू किए हैं। कई गांवों को सरकार अभी तक जला चुकी है, जिसमें कम से कम 5 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं।
नेपिडॉ, सितंबर 20: देश की सत्ता का तख्तापलट कर देने वाली म्यांमार की सेना दिनों दिन बर्बरता की सारी हदें पार करती जा रही है और अब सेना ने अपने ही देश में एक स्कूल पर हेलीकॉप्टर से हमला किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी हेलीकॉप्टरों ने उत्तर-मध्य म्यांमार में एक गांव में स्कूल पर हमला किया है, जिसमें सात बच्चों सहित कम से कम 13 लोग मारे गए हैं। स्कूल के एक एडमिनिस्ट्रेटर और एक सहायक ने सेना के हमले और 13 लोगों की मौत की पुष्टि की है।

स्कूल पर सेना ने किया हमला
म्यांमार में लोकतंत्र समर्थक विद्रोहियों और उनके सहयोगियों पर सैन्य सरकार के हमलों में अक्सर आम नागरिक हताहत हो रहे हैं। हालांकि, पिछले शुक्रवार को सागाइंग क्षेत्र के ताबायिन टाउनशिप में हवाई हमले में मारे गए बच्चों की संख्या पिछले साल फरवरी में सेना द्वारा सत्ता पर कब्जा करने के बाद से सबसे ज्यादा थी, जिसमें आंग सान सू की की निर्वाचित सरकार को सेना ने सत्ता से बाहर कर दिया था और नोबेल पुरस्कार विजेता आंग सान सू की को गिरफ्तार कर लिया गया था। अब तक म्यांमार की सैन्य अदालत अलग अलग आरोपों में आंग सान सु की को 17 साल से ज्यादा की सजा सुना चुकी है। म्यांमार में पिछले साल एक फरवरी को सेना ने सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया था, जिसके बाद जनता सड़कों पर आ गई और देश में भारी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया, जिसे सेना ने बेरहमी से कुचलने की कोशिश की है, लिहाजा देश के कई क्षेत्रों में लोगों ने सशस्त्र विद्रोह शुरू कर दिया है, लिहाजा स्थिति गृहयुद्ध की तरफ बढ़ती जा रही है।

गृहयुद्ध की तरफ बढ़ रहा म्यांमार
इस महीने यूनिसेफ की एक रिपोर्ट के अनुसार, सागाइंग में लड़ाई विशेष रूप से भयंकर होते जा रही है, जहां सेना ने कई आक्रामक अभियान शुरू किए हैं। कई गांवों को सरकार अभी तक जला चुकी है, जिसमें कम से कम 5 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं। वहीं, शुक्रवार का हमला देश के दूसरे सबसे बड़े शहर, मांडले से लगभग 110 किलोमीटर (70 मील) उत्तर-पश्चिम में तबायिन के लेट यॉट कोन गांव में हुआ, जिसे डेपायिन के नाम से भी जाना जाता है। स्कूल प्रशासक मार मार ने कहा कि, वह छात्रों को स्कूल के बेसमेंट में सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कोशिश कर रही थी, जब गांव के उत्तर में मंडरा रहे चार में से दो एमआई -35 हेलीकॉप्टर ने स्कूल पर मशीनगनों और भारी हथियारों से हमला करना शुरू कर दिया। गांव के बौद्ध मठ का परिसर में ये स्कूल स्थिति था। वहीं, मार्च मार्च, जो स्कूल में 20 स्वयंसेवकों के साथ काम करता है, उसने कहा कि, किंडरगार्टन से आठवीं कक्षा तक 240 छात्र स्कूल में पढ़ाई करते हैं।

बर्बर हो चुकी है म्यांमार की सेना
म्यांमार में पिछले साल सन्य तख्तापलट के बाद मार मार सेना से बचने के लिए इस गांव में अपने तीन बच्चों के साथ भागकर आ गई थी। उन्होंने सेना के खिलाफ सविनय अवज्ञा आंदोलन में भाग लिया था। वह खुद को और रिश्तेदारों को सेना से बचाने के लिए छद्म नाम 'मार मार' का इस्तेमाल करती है। उसने कहा कि, उसने परेशानी की उम्मीद नहीं की थी, क्योंकि विमान बिना किसी घटना के गांव के ऊपर से गुजर चुका था। मार मार ने सोमवार को एसोसिएटेड प्रेस को फोन पर बताया कि,"चूंकि छात्रों ने कुछ भी गलत नहीं किया था, इसलिए मैंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें मशीनगनों से बेरहमी से गोली मारी जाएगी।" उन्होंने कहा कि, जब तक छात्र और शिक्षक अपने आप को बचाने के लिए सुरक्षित स्थान पर पहुंचते, तब तक सात छात्रों की मौत हो चुकी थी और 6 अन्य लोग भी मारे जा चुके थे। उन्होंने कहा कि, इन छात्रों के गर्दन पर और सिर में गोली मारी गई थी।

स्कूल को घेरकर किया हमला
चश्मदीद मार मार ने बताया कि, "वे एक घंटे तक स्कूल परिसर में हवा से शूटिंग करते रहे और उन्होंने लगातार फायरिंग की। उस समय हम केवल बौद्ध मंत्रों का जाप कर सकते थे।" उन्होंने कहा कि, जब हवाई हमला बंद हुआ, तो लगभग 80 सैनिक इमारतों पर अपनी बंदूकें दागते हुए मठ परिसर में घुस गए। सिपाहियों ने तब परिसर के सभी लोगों को इमारतों से बाहर आने का आदेश दिया। मार मार ने कहा कि, उसने लगभग 30 छात्रों को उनकी पीठ, जांघों, चेहरे और शरीर के अन्य हिस्सों पर बुरी तरह से घाव देखे। उन्हें गोली लगी हुई थी। कुछ छात्र बुरी तरह से घायल थे। तो कई बच्चे बेहोश होकर जमीन पर पड़े थे। कुछ छात्र दर्द से कराह रहे थे और कह रहे थे, कि उनसे दर्द बर्दाश्त नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि, मछली पकड़ने वाले एक लड़के को भी उन्होंने गोली मार दी।

म्यांमार में सेना का शासन
आपको बता दें कि, म्यांमार में साल 2020 में आम चुनाव करवाए गये थे, जिसमें आंग सान सू ची की पार्टी को एकतरफा जीत मिली थी और उसके साथ ही देश में सैन्य शासन का अंत हो गया था। लेकिन, सेना के खिलाफ ये संघर्ष लंबा नहीं चल सका और पिछले साल एक फरवरी को सेना ने लोकतांत्रिक सत्ता का तख्तापलट कर दिया। वहीं, आंग सान सू ची समेत उनकी 'नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी पार्टी' के तमाम बड़े नेताओं को सेना ने गिरफ्तार कर लिया था। उसके बाद से ही म्यांमार मेंसेना के खिलाफ भारी प्रदर्शन किए जा रहे हैं और अभी तक 2100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।












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