म्यांमार में विस्थापितों के लिए बने कैंप पर सेना का एयरस्ट्राइक, 29 की मौत, कई बच्चे भी शामिल
म्यांमार में विस्थापित होकर कैंप में रहने को मजूबर लोगों पर सेना का हमला जारी है। इस बार म्यांमार के उत्तर-पूर्व इलाके में विस्थापितों के बने शिविर पर सेना ने हमला किया है।
काचिन इंडिपेंडेंस ऑर्गनाइजेशन (केआईओ) द्वारा नियंत्रित क्षेत्र में हुए इस हमले में कम से कम 29 लोगों की मौत हो गई है और कई लोग घायल हो गए हैं। मारे गए लोगों में महिलाएं और 13 बच्चे भी शामिल हैं।

ह्यूमन राइट्स वॉच के एक प्रवक्ता ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि लाईज़ा के उत्तरी भाग में मुंग लाई हकियेत विस्थापन शिविर पर हुए हमले में, जहां विद्रोही काचिन इंडिपेंडेंस आर्मी का मुख्यालय स्थित है, लगभग 60 लोग घायल हो गए। लाइज़ा म्यांमार के दूसरे सबसे बड़े शहर मांडले से लगभग 324 किलोमीटर (200 मील) उत्तर पूर्व में है।
इस हमले को यह काचिन राज्य में 63 साल लंबे संघर्ष में सबसे घातक हमलों में से एक माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सैन्य सरकार से लड़ने वाले अन्य विद्रोही समूहों के लिए काचिन के बढ़ते समर्थन के कारण सशस्त्र बलों ने पिछले साल केआईओ द्वारा संचालित क्षेत्रों पर हमले बढ़ा दिए हैं।
काचिन अधिकारियों का मानना है कि मारे गए लोगों में कम से कम 11 बच्चे शामिल हैं। ताजा हमले में 56 और लोग घायल भी हुए हैं, जिनमें से 44 को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया है।
शैडो नेशनल यूनिटी गवर्नमेंट (एनयूजी) ने गोलीबारी के लिए सेना को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि जुंटा के प्रवक्ता मेजर जनरल ज़ॉ मिन तुन ने इस बात से इनकार किया कि हमले के पीछे सेना का हाथ था। प्रवक्ता ने कहा कि सेना ने क्षेत्र में कोई कार्रवाई नहीं की है उन्होंने कहा कि ये विनाश "संभवतः" भंडारित विस्फोटकों के कारण हुआ है।
स्थानीय मीडिया द्वारा साझा की गई तस्वीरों में मलबे से शव निकाले जाते दिख रहे हैं और दर्जनों बॉडी बैग अगल-बगल पड़े हुए हैं। दावा किया गया है कि सेना ने आधी रात को एयर स्ट्राइक किया है।
इस दौरान हवा से कई बेहद शक्तिशाली बम गिराए गए। म्यांमार में सेना पर इस तरह के हमले के आरोप कई बार लग चुके हैं कि आम लोगों, विस्थापितों और सैन्य सरकार का विरोध करने वालों को निशाना बनाया जा रहा है।












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