बांग्लादेश के अहम हिस्से पर कब्जा कर सकता है म्यांमार.. ये क्रूर तानाशाह करवाएगा भारत के पड़ोस में बड़ी जंग?
Myanmar may capture St Martin's Island: म्यांमार की तरफ से ऐसे साफ साफ संकेत मिल रहे हैं, कि वो बांग्लादेश के सेंट मार्टिन द्वीप पर हमला करने और उसपर कब्जा करने की अपनी महत्वाकांक्षी योजना को अमलीजामा पहनाने की कोशिश कर रहा है। पिछले कई दिनों से म्यांमार, टेकनाफ और सेंट मार्टिन के समुद्री मार्गों पर ट्रॉलर और अन्य जहाजों से बांग्लादेशी नावों पर गोलीबारी कर रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बांग्लादेश की समुद्री सीमा में अवैध रूप से प्रवेश करके म्यांमार के ट्रॉलरों और गनबोटों से गोलीबारी की जा रही है। जिसने दोनों देशों के बीच का तनाव काफी बढ़ गया है और ऐसे संकेत हैं, कि म्यांमार, बांग्लादेश के सेंट मार्टिन द्वीप पर कभी भी हमला कर सकता है।

म्यांमार कर रहा है बांग्लादेश के समुद्री इलाके में गोलीबारी
म्यांमार की तरफ से होने वाली गोलीबारी की घटनाओं के बाद, बांग्लादेशी विदेश मंत्रालय के म्यांमार विंग के महानिदेशक एमडी मैनुल कबीर ने मीडिया से कहा, कि "हमने इस घटना के पहले दिन ही विरोध जताया था। हम राजनयिक चैनलों के माध्यम से फिर से विरोध करेंगे। हालांकि, हम समझते हैं, कि म्यांमार के रखाइन राज्य में स्थिति सामान्य नहीं है। और यह साफ नहीं है, कि वर्तमान में इस क्षेत्र को कौन नियंत्रित करता है, लेकिन हमारे राजनयिक प्रयास जारी रहेंगे।"
बांग्लादेशी नाव चालक सैयद आलम ने ढाका ट्रिब्यून को बताया है, कि "आखिरी गोलीबारी के बाद हम पांच दिनों तक नदी से दूर रहे। प्रशासन से सलाह-मशविरा करने के बाद, हमारी एक स्पीडबोट ने मंगलवार को सुबह 11 बजे के आसपास चटगांव से इलाज के लिए लौट रहे एक बीमार मरीज को पहुंचाया। जैसे ही हम घोलचर इलाके में पहुंचे, म्यांमार सीमा के पास एक ट्रॉलर ने स्पीडबोट पर गोलीबारी शुरू कर दी। सौभाग्य से, हम सुरक्षित रूप से सेंट मार्टिन तक पहुंचने में कामयाब रहे और कोई भी घायल नहीं हुआ।"
जब ढाका ट्रिब्यून ने गोलीबारी के स्रोत के बारे में पूछा, तो सैयद आलम ने बताया, कि "शुरू में, हमें पता नहीं चल पाया, कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है। लेकिन आज (मंगलवार) जब हमारी स्पीडबोट पर छोटी नावों ने गोलीबारी की, तो हमने पास में म्यांमार सेना के जहाज देखे। इससे हमें लगता है, कि हमलों के पीछे जुंटा सैनिक हैं।"
रिपोर्ट के मुताबिक, टेकनाफ से सेंट मार्टिन की ओर जाने वाली नावों पर म्यांमार की तरफ से गोलीबारी की जा रही है, क्योंकि वे नाफ नदी के मुहाने पर नाइकोंगडिया क्षेत्र को पार कर रही हैं।
सैयद आलम ने कहा, कि "हम सेंट मार्टिन में अत्यधिक डर में जी रहे हैं। क्षेत्र में किसी भी बांग्लादेशी कोस्ट गार्ड की गश्ती के बिना, हमें चिंता है, कि जुंटा सैनिक किसी भी समय हमारे द्वीप पर आक्रमण कर सकते हैं। हम बहुत असुरक्षित महसूस करते हैं"।

क्या सेंट मार्टिन द्वीप पर हमला करेगा म्यांमार?
म्यांमार की सेना ने 1 फरवरी 2021 को देश की सत्ता पर कब्जा कर लिया था और सरकार को बर्खास्त कर दिया था और उसके बाद से ही देश गृहयुद्ध में फंसा हुआ है।
वहीं, बांग्लादेश के एक बड़े अधिकारी ने कहा है, कि "अगस्त 2017 करीब 1 करोड़ 20 लाख से ज्यादा मुस्लिम रोहिंग्याओं को बांग्लादेश में शरण दी गई थी, क्योंकि वे म्यांमार सेना और अराकान रोहिंग्या साल्वेशन आर्मी (ARSA) के सदस्यों के बीच सशस्त्र संघर्ष के कारण देश से भाग गए थे, जो एक कुख्यात उग्रवादी संगठन है, जो अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स, हथियार और मानव तस्करी में भी शामिल है।"
बांग्लादेशी अधिकारियों का कहना है, कि म्यांमार की सेना रोहिंग्या मुस्लिमों को जोड़कर एक सेना का निर्माण कर रही है, जिसे सेंट मार्टिन द्वीप पर कब्जा करने की जिम्मेदारी दी जाएगी।
बांग्लादेश के मुताबिक, म्यांमार की गुप्तचर सेवाओं ने रोहिंग्याओं के एक वर्ग की भर्ती शुरू कर दी है और उन्हें कमांडो और आत्मघाती हमले के प्रशिक्षण सहित सैन्य प्रशिक्षण दे रही है, जिसका खतरनाक मकसद यह है, कि अगर बांग्लादेश और म्यांमार के बीच युद्ध होता है, तो उन्हें बांग्लादेश के खिलाफ युद्ध में भेजा जाएगा।
आपके लिए यहां ये जानना जरूरी है, कि 2017 में बांग्लादेश में भागकर आए रोहिंग्या मुसलमान, जिन्हें बांग्लादेश में शरण दी गई है, वो बांग्लादेश की क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहे हैं। शेख हसीना खुद कह चुकी हैं, कि ये रोहिंग्या मुसलमान आतंकवादी कृत्यों में भी शामिल हो रहे हैं।
अलकायदा, इस्लामिक स्टेट (ISIS), हिजबुल्लाह, हमास, लश्कर-ए-तैयबा, मुस्लिम ब्रदरहुड, हिज्ब-उत-तहरीर, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और अन्य सहित अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी संगठन पहले से ही रोहिंग्या शिविरों में घुसपैठ कर चुके हैं, और उन्हें आतंकवादी और जिहादी साजिशों के लिए भर्ती कर रहे हैं।
बांग्लादेश का कहना है, कि म्यांमार से भागकर आए ज्यादातर रोहिंग्या मुसलमान मानसिक तौर पर कट्टरपंथी हैं और गैर-मुसलमानों को लेकर उनमें गहरी नफरत है और वो आतंकवादी समूहों में काफी एक्टिव हो रहे हैं। इसके अलावा, मादक पदार्थों की तस्करी में भी रोहिंग्या मुस्लिम भारी संख्या में शामिल हैं।
बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कम से कम 45,000 से ज्यादा रोहिंग्या, वर्तमान में बांग्लादेश की सीमा से लगे नाफ नदी पर बांग्लादेश में घुसने की फिराक में हैं। इनमें से एक महत्वपूर्ण हिस्सा भारत में प्रवेश करने में कामयाब रहा है।
इनमें से सबसे ज्यादा चिंताजनक बात ये है, कि अराकान रोहिंग्या साल्वेशन आर्मी (ARSA) से सीधे जुड़े कुछ हजार रोहिंग्या जिहादी बांग्लादेश और भारतीय क्षेत्र में घुसने में कामयाब हो रहे हैं, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा हो रहा है।
ब्रिटिश अखबार द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, म्यांमार के ज्यादातर लोग रोहिंग्याओं को अपने देश में वापस जाने के लिए तैयार नहीं हैं, क्योंकि वे ज्यादातर आतंकवादी गतिविधियों में शामिल हैं।
म्यांमार में रोहिंग्याओं के खिलाफ कैसे शुरू हुई हिंसा?
म्यांमार के रहने वाले 52 साल के राखिने बौद्ध खिन थान यी ने ब्रिटिश अखबार द गार्जियन में खुलासा किया है, कि आखिर 2017 में म्यांमार में रोहिंग्या के खिलाफ गुस्सा क्यों भड़का था।
उन्होंने कहा, कि "मुस्लिम समुदाय लंबे समय से गांव पर हमला करने की योजना बना रहा था। दो मुसलमानों ने एक बौद्ध युवक टुन ऐ के पिता की हत्या कर दी और फिर वो मस्जिद की छत से मजहबी नारे लगाने लगे। और उसके बाद म्यांमार में हिंसा भड़की थी।"
जनवरी 2020 में, टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में कहा गया था, कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने देश के सशस्त्र बलों और सीमा प्रहरियों को एक नई चेतावनी जारी की है, कि पाकिस्तानी जासूसी एजेंसी इंटर-सर्विस इंटेलिजेंस (ISI) रोहिंग्याओं को ट्रेनिंग देने में शामिल है। वे यह ट्रेनिंग अलकायदा से संबद्ध बांग्लादेशी आतंकवादी संगठन जमात-उल मुजाहिदीन ऑफ बांग्लादेश (JMB) के माध्यम से दे रहे हैं।
रिपोर्ट में आगे कहा गया था, कि भारत की खुफिया एजेंसियों को डर है, कि इन रोहिंग्याओं को आतंकवादी बनाकर पाकिस्तान आतंक फैलाने के इरादे से उनकी सप्लाई भारत में कर सकता है।

सेंट मार्टिन द्वीप पर कब्जा क्यों चाहता है म्यांमार?
म्यांमार लगातार टेकनाफ और सेंट मार्टिन के समुद्री मार्गों पर जहाजों पर गोलीबारी करके अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन कर रहा है। सेंट मार्टिन द्वीप, रणनीतिक तौर पर काफी ज्यादा महत्वपूर्ण है, इसलिए म्यांमार जुंटा उसपर अपना कब्जा चाहता है।
अलकायदा से गहरा संबंध रखने वाली बांग्लादेश की कुख्यात विपक्षी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और खलीफा समर्थक जमात-ए-इस्लामी के सदस्य बांग्लादेश में लगातार प्रचार कर रहे हैं, कि शेख हसीना भले ही सेंट मार्टिन द्वीप पर बांग्लादेश का कब्जा होने का दावा करती है, लेकिन सरकार ने देश की जमीनी सीमा में इसे नहीं दिखाया है और अगर म्यांमार इंटरनेशल कोर्ट जाता है, तो बांग्लादेश सेंट मार्टिन द्वीप हार सकता है।
दूसरी तरफ, म्यांमार ने छल और बल से सेंट मार्टिन द्वीप पर कब्जा करने की कोशिशें शुरू कर दी हैं।
जबकि, हकीकत ये है, कि समुद्री कानून के लिए अंतर्राष्ट्रीय न्यायाधिकरण (ITLOS) के फैसले में साफ साफ कहा गया है, कि "सेंट मार्टिन द्वीप बांग्लादेश का हिस्सा है और वो इस क्षेत्र में स्पेशल इकोनॉमिक जोन बनाने का हकदार है।"
14 मार्च 2012 को, समुद्री कानून के लिए अंतर्राष्ट्रीय न्यायाधिकरण ने बंगाल की खाड़ी (बांग्लादेश/म्यांमार) में बांग्लादेश और म्यांमार के बीच समुद्री सीमा के परिसीमन से संबंधित विवाद पर अपना फैसला सुनाया था। इस बीच, बीएनपी, जमात और कुछ अन्य इस्लामवादी दलों के नेता, साथ ही खिलाफत समर्थक और लोकतंत्र विरोधी हिफाजत-ए-इस्लाम, लगातार गुरिल्ला ट्रेनिंग और आतंकवादी समूह से जुड़े रोहिंग्या आतंकवादियों को भारत में घुसपैठ करने की कोशिश कर रहे हैं और आत्मघाती हमलावरों को बांग्लादेश के अंदर अराजकता पैदा करने के लिए उकसा रहे हैं और उन्हें धन मुहैया करा रहे हैं।
कुल मिलाकर ये स्थिति बांग्लादेश और म्यांमार को जंग के मुहाने पर ला सकता है और अगर म्यांमार, सेंट मार्टिन द्वीप पर कब्जा करने की कोशिश करता है, तो भारत के पड़ोस में भी एक जंग छिड़ सकता है।












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