'कहीं फिर मोदी ना आ जाएं, डरे हुए हैं वाराणसी के मुसलमान..', CNN का भारतीय चुनाव पर भड़काऊ लेख!
CNN on Indian Election: भारत में चल रहे लोकसभा चुनाव के दो चरण के मतदान हो रहे हैं और तीसरे चरण की वोटिंग होने वाली है, लेकिन पश्चिमी मीडिया का भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा थमने का नाम नहीं ले रहा है। सीएनएन, जो लगातार भारतीय चुनाव पर एजेंडा आधारित लेख लिख रहा है, उसने इस बार भड़काऊ लेख लिखा है।
सीएनएन के लेख में भारत के धार्मिक शहर वाराणसी में मुसलमानों को डराया हुआ बताया है। CNN के हेडलाइन में लिखा गया है, कि 'बढ़ते हिंदू राष्ट्रवाद ने भारत के पवित्र शहर में मुसलमानों को भयभीत कर दिया है'।

जाहिर तौर पर, सीएनएन का ये लेख, ना सिर्फ दुनिया में भारत की छवि को नकारात्मक बनाने के लिए है, बल्कि भारतीय समुदाय में भी जहर घोलने की एक कोशिश है, क्योंकि इतिहास गवाह रहा है, कि भारत में हर समुदाय के लोग हर हाल में हाथ मिलाकर ही साथ रहे हैं और जितने भी संकट आए हैं, चाहे वो हिंदू हो या मुसलमान, हर किसी ने हर चुनौती का डटकर सामना किया है, भले ही उनकी राजनीतिक विचारधारा कुछ भी रहा हो।
CNN का एंटी इंडिया एजेंडा!
CNN ने अपने लेख में लिखा है, कि "जब एक दशक पहले मोदी ने इस पवित्र शहर को अपने निर्वाचन क्षेत्र के रूप में चुना था, तो यह उनके लिए अपनी पार्टी की राजनीतिक और धार्मिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए एकदम सही जगह थी। विकास और भ्रष्टाचार विरोधी वादे के साथ सत्ता में आने के बाद, उनकी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर अब भारत - संवैधानिक रूप से धर्मनिरपेक्षता से बंधे राष्ट्र - को हिंदू राष्ट्र में बदलने का आरोप लगाया जा रहा है।"
सीएनएन ने वाराणसी की रहने वाली सना सबा के हवाले से लिखा है, कि "यह डरावना है कि मोदी जैसे व्यक्ति को न केवल सेलिब्रेट किया जाता है, बल्कि मान्यता भी दी जाती है। हिंदू-राष्ट्रवादी दक्षिणपंथी अब इसे छिपाने की कोशिश भी नहीं कर रहे हैं। और यह परेशानी भरा है।"

सीएनएन ने लिखा है, कि "दुनिया के सबसे ज्यादा आबादी वाले देश में अभी मतदान चल रहा है, इसकी 20 करोड़ से ज्यादा मजबूत मुस्लिम आबादी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मोदी के दोबारा चुने जाने की संभावना पर डर व्यक्त कर रहा है। सत्ता में एक दुर्लभ तीसरे कार्यकाल के लिए प्रतिस्पर्धा करते हुए, वह लगभग 17 लाख की आबादी वाली सीट पर फिर से जीतने की कोशिश कर रहे हैं।"
सीएनएन ने लिखा है, कि "10 साल के कार्यकाल के बाद वाराणसी के कई मुसलमान उपेक्षित महसूस करते हैं, यहां तक कि उनके साथ विश्वासघात भी किया गया है, खासकर अब जब एक सदियों पुरानी मस्जिद फ्लैशप्वाइंट बन गई है, जो भारत के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने का परीक्षण करता है।"
CNN ने लिखा है, कि "78 वर्षीय स्थानीय मुस्लिम नेता सैयद मोहम्मद यासीन को लगता है, कि सरकार उनके समुदाय की रक्षा करने में नाकाम हो रही है, उनका कहना है, कि आज के भारत में हेट क्राइम से लोग असुरक्षित और भयभीत महसूस कर रहे हैं।"
CNN के मुताबिक, "वाराणसी में अपने कार्यालय से उन्होंने कहा, ''(अगर मोदी दोबारा चुने गए तो) सबसे बुरा होगा। हम इन चीजों को बर्दाश्त कर रहे हैं, शायद एक दिन बदलाव आ सकता है। लेकिन हम निराश हैं।"
सीएनएन का दावा- मुसलमान छिपाते हैं अपना नाम
सीएनएन ने लिखा है, कि "मोदी की भाजपा की जड़ें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) में हैं, जो एक दक्षिणपंथी अर्धसैनिक संगठन है, जो भारत के भीतर हिंदू वर्चस्व की वकालत करता है - हालांकि पार्टी ने बार-बार कहा है कि वह अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव नहीं करती है।"
CNN ने वाराणसी के बीजेपी नेता दिलीप पटेल के हवाले से लिखा है, कि "सरकार के कल्याण कार्यक्रमों का जिक्र करते हुए दिलीप पटेल ने कहा, "ऐसी कोई कल्याणकारी योजना नहीं है, जहां धर्म या समुदाय को भेदभाव के आधार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। प्रधानमंत्री की योजनाएं हमारे मुस्लिम भाइयों, हिंदू भाइयों, सिखों, जैनियों, बौद्धों और पारसियों पर लागू होती हैं, जिन्हें बिना किसी भेदभाव के मोदी से लाभ हुआ है।"
सीएनएन ने लिखा है, कि "इसमें कोई संदेह नहीं है कि सत्ता में मोदी का एक दशक परिवर्तनकारी रहा है। भारत विश्व मंच पर आ गया है, वैश्विक-शक्ति की स्थिति के करीब पहुंच रहा है, सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था का दावा कर रहा है, और प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष में बड़ी प्रगति कर रहा है। लेकिन, लेकिन इसमें भी कोई शक नहीं कि धार्मिक ध्रुवीकरण बढ़ा है।"
सीएनएन ने लिखा है, कि "हिंदू राष्ट्रवादियों को प्रमुख सरकारी संस्थानों में शीर्ष पदों पर नियुक्त किया गया है, जिससे उन्हें कानून में व्यापक बदलाव करने की शक्ति मिलती है, जो अधिकार समूहों का कहना है, कि मुसलमानों को गलत तरीके से टारगेट किया जाता है। भारत के प्राचीन इस्लामी शासकों के इतिहास को कमजोर करने के लिए पाठ्यपुस्तकों को फिर से लिखा गया है, मुगल-युग के नाम वाले शहरों और सड़कों का नाम बदल दिया गया है और सरकारी भूमि पर अवैध अतिक्रमण और कथित दंगों की सजा के लिए अधिकारियों द्वारा मुस्लिम संपत्तियों को ध्वस्त कर दिया गया है।"
इसके अलावा, सीएनएन के आर्टिकिल में दिल्ली दंगों का जिक्र करते हुए मुस्लिम पीड़ितों को लेकर लंबा चौड़ी बातें लिखी गई हैं, लेकिन सीएनएन के लेख में हिंदुओं के साथ क्या हुआ, इसका जिक्र गायब है।
इसके अलावा, सीएनएन ने लिखा है, कि भारत में कई मुस्लिमों को हेट क्राइम की वजह से अपना नाम बदलकर पहचान बताने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
सीएनएन ने अपनी रिपोर्ट में वाशिंगटन स्थित शोध समूह इंडिया हेट लैब की हालिया रिपोर्ट का जिक्र किया है, जिसमें दावा किया गया है, कि "भारत में मुस्लिम विरोधी भाषण में भी नाटकीय रूप से वृद्धि हुई है, जिसमें 2023 में 668 ऐसे मामले दर्ज किए गए हैं।"
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