भारत लाया जा सकता है मुंबई हमले का आरोपी तहव्वुर राणा, अमेरिका कोर्ट से नहीं मिली राहत, खारिज हुई रिट याचिका
मुंबई में 2008 में हुए आतंकी हमले में साजिश के आरोपी तहव्वुर हुसैन राणा को भारत लाए जाने की संभावना बढ़ रही है। अमेरिकी अदालत ने पाकिस्तानी मूल के इस कनाडाई बिजनेस मैन की उस अपील को खारिज कर दिया है जिसमें वह अमेरिकी सरकार से भारत नहीं भेजे जाने की गुहार लगा रहा है।
2008 के मुंबई आतंकी हमले के आरोपी पाकिस्तानी मूल के कनाडाई बिजनेसमैन तहव्वुर राणा को भारत प्रत्यर्पित किया जा सकता है। अमेरिकी अदालत ने तहव्वुर राणा के प्रत्यक्षीकरण रिट को खारिज कर दिया है।

अमेरिकी शहर कैलिफॉर्निया के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के यूनाइटेड स्टेट्स डिस्ट्रिक्ट जज डेल एस फिशर ने दो अगस्त को राणा की याचिका खारिज कर दी। अदालत के इस फैसले के कारण राणा के प्रत्यर्पण को हरी झंडी मिल मिल सकती है।
अदालत ने अपने आदेश में लिखा है कि राणा की बंदी प्रत्यक्षीकरण रिट याचिका को खारिज कर दिया गया है। हालांकि राणा ने इस आदेश के खिलाफ नौवें सर्किट कोर्ट में अपील दायर की है कि सुनवाई तक उसने भारत में अपने प्रत्यर्पण पर रोक लगाने की मांग की है।
इस साल जून में, राणा ने अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए 'बंदी प्रत्यक्षीकरण रिट' दायर की थी। जज फिशर ने अपने आदेश में कहा कि राणा ने रिट में केवल दो बुनियादी दलीलें दी हैं।
राणा का पहला दावा है कि संधि के अनुसार, उन्हें प्रत्यर्पित नहीं किया जा सकता क्योंकि भारत उन पर उन्हीं कार्यों के लिए मुकदमा चलाने की योजना बना रहा है जिनके लिए उन पर आरोप लगाया गया था। इन आरोपों को लेकर अमेरिका की अदालत ने पहले ही उसे बरी कर दिया है।
याचिका में राणा ने दूसरा तर्क दिया था कि भारत ने अभी तक यह स्थापति नहीं किया राणा ने भारत में अपराध किये हैं, जिस वजह से उनपर मुकदमा चलाये जाने की उम्मीद है। इसके बाद अदालत ने राणा की दोनों दलीलें खारिज कर दीं।
न्यायाधीश फिशर के आदेश के बाद राणा के वकील पैट्रिक ब्लेगेन और जॉन डी क्लाइन ने अमेरिका के नौवें सर्किट कोर्ट में चुनौती दी है। ब्लेगन ने एक अन्य अपील में कहा कि सुनवाई तक उनके प्रत्यर्पण पर रोक लगाई जाए।
भारत ने अमेरिका ने राणा के प्रत्यर्पण के लिए अनुरोध किया था। भारत की मांग के बाद उसे अमेरिका में गिरफ्तार किया गया। तहव्वुर को मुंबई हमले के मास्टर माइंड डेविड हेडली का बचपन का दोस्त माना जाता है।
तहव्वुर को पता था कि हेडली लश्कर-ए-तैयबा के साथ मिलकर काम कर रहा है। हेडली की मदद करके और उसे आर्थिक मदद पहुंचाकर तहव्वुर आतंकी संस्था और उसके साथ आतंकियों को भी सपोर्ट कर रहा था। राणा को जानकारी थी कि हेडली किससे मिल रहा है, क्या बात कर रहा है। उसे हमले की प्लानिंग और कुछ टारगेट्स के नाम भी पता थे।












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