20 सालों के बाद अफगानिस्तान पहुंचा तालिबान का 'राष्ट्रपति', मुल्ला बरादर संभालेगा देश की कमान!
मुल्ला बरादर का बहनोई मुल्ला उमर था और दोनों ने मिलकर 90 के दशक में तालिबान की नींव रखी थी और फिर अमेरिका और पाकिस्तान की मदद से दोनों ने तालिबान के साम्राज्य का विस्तार किया था।
काबुल, अगस्त 18: तालिबान का हीरो और अफगानिस्तान का संभावित नया राष्ट्रपति, जिसने अफगानिस्तान की जमीन पर अमेरिका को परास्त किया है, वो अपने लवाजमे के साथ करीब 20 सालों के बाद वापस काबुल आ गया है। तालिबान ने अफगानिस्तान में विजय का एक वीडियो पोस्ट किया है, जिससे पता चलता है कि तालिबान का सह-संस्थापक काबुल पहुंच गया है। वीडियो में दिख रहा है कि कंधार में उसका एक हीरो की तरफ भव्य स्वागत किया गया है। तालिबानी लड़ाके उसके काफिले के साथ चल रहे हैं और उसकी जय-जयकार कर रहे हैं। माना जा रहा है कि मुल्ला बरादर ही अफगानिस्तान का अगला राष्ट्रपति बनाया जाएगा।
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काबुल पहुंचा मुल्ला बरादर
आपको बता दें कि मुल्ला बरादर का बहनोई मुल्ला उमर था और दोनों ने मिलकर 90 के दशक में तालिबान की नींव रखी थी और फिर अमेरिका और पाकिस्तान की मदद से दोनों ने तालिबान के साम्राज्य का विस्तार काफी तेजी के साथ करते हुए 1996 में अफगानिस्तान में तालिबान राज की स्थापना की थी। रविवार को तालिबान ने काबुल पर कब्जा कर लिया था, और तालिबान के राजनीतिक कार्यालय के प्रमुख बरादर के अब पिछले अमेरिकी समर्थित शासन के पतन के बाद देश का अगला नेता बनने के लिए इत्तला दे दी है। 53 साल का हो चुका मुल्ला बरादर पहले अपने बहनोई मुल्ला मोहम्मद उमर के अधीन काम करता था, लेकिन जब मुल्ला उमर अमेरिकी हमले में मारा गया था, उसके बाद उसने तालिबान की कमान संभाल ली थी।

पहले कंधार पहुंचा मुल्ला बरादर
मुल्ला बरादर मंगलवार को कंधार प्रांत करीब 20 सालों के बाद पहुंचा था। उसके साथ कई और तालिबान के नेता था, जहां उसका भव्य स्वागत किया गया। कंधार उतरने के बाद मुल्ला बरादर के समर्थन में एक बाइक रैली निकाली गई, जिसका वीडियो तालिबान की तरफ से जारी किया गया था। तालिबान की तरफ से कहा गया, ''आज दोपहर, मुल्ला बरादर अखुंद के नेतृत्व में अफगानिस्तान के इस्लामी अमीरात से एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल कतर से निकल गया और आज दोपहर हमारे प्यारे देश में पहुंचे और कंधार हवाई अड्डे पर उतरे हैं।' अफगानिस्तान मामलों के जानकारों के मुताबिक, जिस तरह से करीब 14 सालों तक पेरिस में रहने के बाद अयातुल्ला खुमैनी ईरान लौटा था, ठीक उसी तरह से मुल्ला बरादर करीब 20 सालों के बाद वापस अफगानिस्तान लौटा है।

अफगानिस्तान में 'बरादर राज'
मुल्ला बरादर का जन्म 1968 में अफगानिस्तान के उरुजगन प्रांत में हुआ था और उसकी परवरिष कंधार में किया गया, जहां उसने मुल्ला बरादर के साथ मिलकर अमेरिका के समर्थन से सोवियत संघ के खिलाफ 1980 के दशक में मुजाहिदीन लड़ाई की शुरूआत की और फिर 1990 के दशक में पूरे अफगानिस्तान में गृहयुद्ध की आग लग गई। बाद में बरादर ने अपने पूर्व कमांडर मोहम्मद उमर के साथ कंधार में एक इस्लामिक स्कूल की स्थापना की, और दोनों ने मिलकर तालिबान की स्थापना की।

अफगानिस्तान में तालिबान का राज
अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद मुल्ला उमर और मुल्ला बरादर ने अफगानिस्तान में कट्टरपंथी इस्लामी अमीरात की स्थापना की। तालिबान ने 1996 में काबुल पर मार्च करने से पहले प्रांतीय राजधानियों पर जीत हासिल की, ठीक उसकी तरह से, जैसा इसबार तालिबान ने किया है। अफगानिस्तान पर शासन के दौरान बरादर ने पांच साल तक कई अलग-अलग भूमिकाएँ निभाईं। लेकिन, जब 2001 में अमेरिका ने अफगानिस्तान पर आक्रमण किया, तब वह अफगानिस्तान से फरार होकर पाकिस्तान आ गया, जहां बाद में मनमुटाव होने के बाद उसे 2010 में गिरफ्तार कर लिया गया।

पाकिस्तान में क्यों किया गया गिरफ्तार?
2010 में अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने उसे पाकिस्तानी शहर कराची में ट्रैक किया और उसी साल फरवरी में पाकिस्तानी खुफिया सेवा आईएसआई ने उसे गिरफ्तार कर लिया। उस वक्त विशेषज्ञों ने कहा था कि अमेरिका मुल्ला बरादर को मारना चाहता था और आईएसआई को इसकी जानकारी मिल गई थी और मुल्ला बरादर को बचाने के लिए उसे पाकिस्तान सरकार ने जेल में सुरक्षित रख लिया। लेकिन 2018 में इमरान खान ने जब पाकिस्तान की सत्ता संभाली तो अमेरिका के कहने पर उसे रिहा कर दिया गया और फिर उसके 9 महीने के बाद एक दिन मुल्ला बरादर अचानक अमेरिका के तत्कालीन विदेश मंत्री माइक पॉंपियो के साथ दिखता है।

अमेरिका ने बरादर को माना नेता
अमेरिका ने मुल्ला बरादर को तालिबान के शांति दल का नेता मान लिया। फरवरी 2020 में मुल्ला बरादर ने तत्कालीन अमेरिकी ट्रंप प्रशासन के साथ मिलकर कतर में दोहा समझौते पर हस्ताक्षर किया और अमेरिका ने अफगानिस्तान छोड़ने का ऐलान कर दिया। तालिबान ने अमेरिका के साथ समझौते में कहा था कि वो देश में बंदूक के दम पर सत्ता हासिल नहीं करेगा, बल्कि वो गनी सरकार के साथ मिलकर अफगानिस्तान में जनतांत्रिक सरकार का निर्माण करेगा। लेकिन, अमेरिका देखता ही रह गया और तालिबान ने बंदूक के बूते अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया।

अमेरिका ने किया स्वागत
तत्कालीन अमेरिकी डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने तालिबान के साथ हुए समझौते का स्वागत किया और ऐलान किया कि अफगानिस्तान में 40 साल से चले आ रहे युद्ध का अंत हो गया है। दरअसल, विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका ने अपनी सुरक्षा के लिए तालिबान के साथ समझौता कर अफगानिस्तान का एक तरह से तालिबान के हाथों सौदा कर लिया। दोहा सौदे को एक महत्वपूर्ण शांति घोषणा के रूप में घोषित किया गया था, लेकिन यह तालिबान की एक चाल के अलावा कुछ और साबित नहीं हुआ। तालिबान के जिहादियों ने तब तक इंतजार किया जब तक कि हजारों अमेरिकी सैनिकों ने देश को छोड़ नहीं दिया। जैसे ही अफगानिस्तान में अमेरिकी फौज काफी कम हो गये, ठीक वैसे ही 2 महीने के अंदर तालिबान ने पूरे अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया।

बरादर बनेगा अगला राष्ट्रपति
तालिबान ने दावा किया कि उसने विदेशी ताकतों को अफगानिस्तान की जमीन से हटा दिया है और अशरफ गनी की 'निकम्मी' सरकार को देश में शासन करने का कोई हक नहीं था। अशरफ गनी अब देश छोड़कर जा चुके हैं और माना जा रहा है कि अफगानिस्तान में अगला राष्ट्रपति मुल्ला बरादर को बनाया जाएगा। मुल्ला बरादर के अफगानिस्तान पहुंचने के बाद तालिबान ने अपने बयान में कहा कि ''हम तय करने जा रहे हैं कि देश के सामने किस तरह के कानून पेश किए जाएंगे। सभी लोगों की भागीदारी से यह सरकार की जिम्मेदारी होगी''।












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