mpox: क्या कोविड की तरह मंकीपॉक्स वायरस भी मचा सकता है तबाही? आप इस खतरनाक बीमारी से कैसे बच सकते हैं?
Monkey Pox News: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) न इस सप्ताह की शुरुआत में मंकी पॉक्स वायरस को "सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल" घोषित कर दिया है, जिसके बाद पूरी दुनिया में इस वायरल को लेकर डर फैल गया है। वहीं, अफ्रीका के बाहर कम से कम दो देशों ने एमपॉक्स के मामलों की सूचना दी है।
क्लेड 1 के रूप में जाना जाने वाला वायरस का एक अपेक्षाकृत नया स्ट्रेन 2022 से अफ्रीकी देशों में फैल रहा है और ऐसी आशंका है, कि कुछ ही दिनों में ये वायरस दुनिया के कई देशों में फैल सकता है। ऐसी स्थिति में इस वायरस को कंट्रोल करने के लिए एहतियातन कदम उठाए जाने लगे हैं।

इस साल की शुरुआत में, यह बताया गया था, कि डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में अब तक का सबसे बड़ा ऑउटब्रेक देखा जा रहा है, जहां जून महीने तक दसियों हजार लोग संक्रमित हो चुके हैं। DRC की सरकार ने दिसंबर 2022 में इसे महामारी घोषित कर दिया था। पिछले हफ्ते, अफ्रीका CDC ने बताया था, कि अब कम से कम 13 अफ्रीकी देशों में mpox का पता चला है। पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में, एजेंसी ने कहा है, कि मामले 160 प्रतिशत बढ़े हैं और मौतों में 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
लिहाजा, ये जानना जरूरी हो जाता है, कि अभी तक किन किन देशों में ये वायरस फैला है, इस बीमारी से शरीर कैसे प्रभावित होता है और अपने आप को इसके संक्रमण से कैसे बचाएं?
एमपॉक्स वायरस का नया स्ट्रेन किन अन्य देशों में फैला है?
पाकिस्तान के राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा मंत्रालय ने शुक्रवार को वायरस के अपने पहले मामले की पुष्टि करते हुए कहा, कि पीड़ित व्यक्ति सऊदी अरब से आया था। स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा, कि व्यक्ति जिस वायरस से संक्रमित हुआ था, उसके सटीक स्ट्रेन का पता लगाने के लिए सीक्वेंसिंग चल रहा है।
गुरुवार को, स्वीडिश स्वास्थ्य अधिकारियों ने देश में एमपॉक्स के पहले मामले की सूचना दी है, जिसमें पुष्टि की गई कि यह क्लेड 1 स्ट्रेन था। स्वीडिश मीडिया ने कहा, कि व्यक्ति अफ्रीका में संक्रमित हुआ था और अब उसका इलाज चल रहा है।
क्लेड 1 के कारण गंभीर संक्रमण की संख्या ज्यादा होती है और यह यौन संपर्क सहित नियमित निकट संपर्क के माध्यम से ज्यादा आसानी से फैलता है। शुक्रवार को, यूरोपीय रोग निवारण और नियंत्रण केंद्र (सीडीसी) ने अपने जोखिम चेतावनी स्तर को "कम" से बढ़ाकर "मध्यम" कर दिया है और प्रभावित क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों के बीच उच्च स्तर की जागरूकता बनाए रखने को कहा है।

मानव शरीर पर कैसे हमला करता है वायरस?
Mpox मुख्य रूप से मनुष्यों और जानवरों को प्रभावित करता है। यह चेचक के समान वायरस के परिवार से संबंधित है, लेकिन बुखार, ठंड लगना और शरीर में दर्द जैसे हल्के लक्षण पैदा करता है। कई मामलों में ये गंभीर बीमारी और कुछ मामलों में मौत का कारण भी बन सकता है।
वायरस टूटी हुई त्वचा या सांस के जरिए मानव शरीर में प्रवेश करता है। फिर यह खून के साथ पूरे शरीर में फैल जाता है, जिससे व्यक्ति को फ्लू जैसे लक्षण अनुभव होते हैं और त्वचा पर घाव हो जाते हैं।
लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के माइकल मार्क्स के मुताबिक, वैज्ञानिकों को "ऐसा नहीं लगता कि एमपॉक्स का इम्युनिटी सिस्टम पर सीधा प्रभाव पड़ता है"।
उन्होंने कहा, "सभी संक्रमण स्पष्ट रूप से अस्थायी रूप से इम्युनिटी सिस्टम में प्रतिक्रियाएं पैदा करते हैं, लेकिन हम नहीं मानते कि एमपॉक्स से प्रतिरक्षा प्रणाली पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है।"
अफ्रीका सीडीसी के चीफ ऑफ स्टाफ डॉ. नगाशी नगोंगो ने अल जजीरा की एक रिपोर्ट में कहा है, कि वायरस सिर्फ ऐसे लक्षण पैदा करता है, जो "दो से चार सप्ताह" तक रहते हैं। उन्होंने कहा, कि "यह एक बीमारी है। चाहे आपको गंभीर रूप हो - फिर यह मौत की ओर ले जाता है - या आप दो से चार सप्ताह में ठीक हो जाते हैं। लेकिन फिर सब कुछ सामान्य हो जाता है।"
मंकी पॉक्स वायरस कैसे फैलता है?
वायरस संक्रमित व्यक्ति या जानवर के साथ नजदीकी संपर्क से फैलता है। मानव-से-मानव के जरिए, त्वचा पर बनने वाले घावों के जरिए, त्वचा से त्वचा के संपर्क और संक्रमित व्यक्ति के बहुत करीब से बात करने या सांस लेने के माध्यम से ये वायरस फैलता है।
यह दूसरों के बिस्तर, कपड़े और तौलिये के इस्तेमाल से भी फैल सकता है, क्योंकि वायरस कटी-फटी त्वचा, श्वसन पथ या आंखों, नाक और मुंह के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है।
एक्सपर्ट्स का कहना है, कि संक्रमण का सबसे महत्वपूर्ण रूप त्वचा से त्वचा के संपर्क के माध्यम से होता है, क्योंकि वायरस त्वचा के घावों पर "तीन हफ्ते या उससे ज्यादा समय तक" मौजूद रहता है। वहीं, श्वसन प्रणाली से वायरस फैलने का खतरा 8 से 10 दिनों तक रहता है, क्योंकि "अधिकांश लोगों में वायरस गले से सात से 10 दिनों में साफ हो जाता है"।
पशु से इंसानों में संक्रमण के लिए, वायरस आमतौर पर संक्रमित जानवर के काटने, खरोंचने या घावों के संपर्क के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है।
मंकी पॉक्स के लक्षण क्या हैं?
इस बीमारी के कारण फ्लू जैसे लक्षण और मवाद भरे घाव होते हैं। यह आमतौर पर हल्का होता है लेकिन इतना गंभीर हो सकता है कि इससे जान भी जा सकती है। एक्सपर्ट्स का कहना है, कि ज्यादातर लोगों को "अपेक्षाकृत हल्की बीमारी" होती है, जिसमें उन्हें बुखार, मांसपेशियों में दर्द और "पांच से 25 घावों" के साथ दाने हो सकते हैं। उन्होंने कहा, "कुछ लोग बहुत ज्यादा बीमार हो जाते हैं और उन्हें पूरे शरीर में सैकड़ों घावों के साथ एक गंभीर बीमारी हो सकती है।"
वायरस के कौन से फैक्टर ज्यादा गंभीर लक्षण पैदा कर सकते हैं?
एक्सपर्ट्स का कहना है, कि बीमारी के लक्षण ज्यादातर लोगों में हल्के होते हैं, कुछ लोगों में गंभीर लक्षण होने का जोखिम ज्यादा होता है।
एक्सपर्ट्स का कहना है, कि "उदाहरण के लिए, HIV (यौन संचारित बीमारी) या कमजोर इम्युनिटी सिस्टम वाले लोगों को गंभीर बीमारी का जोखिम ज्यादा होता है। बच्चों को भी गंभीर बीमारी का जोखिम ज्यादा होता है।"
एक्सपर्ट्स का कहना है, कि बच्चों को वयस्कों की तुलना में एमपॉक्स से ज्यादा प्रभावित होने की संभावना है, और ये घनी आबादी में ज्यादा तेजी से फैलता है, जहां बच्चे ज्यादा होते हैं और बच्चे संभवतः इधर-उधर भागने और दूसरों के साथ सीधे त्वचा से त्वचा के संपर्क में आते हैं, जिससे वो वायरस के लिए ट्रांसपोर्टर भी बन जाते हैं और संक्रमण का कारण बन जाते हैं। दूसरी तरफस वयस्कों का दूसरों के साथ सीधा संपर्क कम होता है और वयस्क संक्रमित लोगों के संक्रमण में आने से बचेंगे।"
इसके अलावा, बच्चों का इम्युनिटी सिस्टम भी कमजोर होता है और विकास होने के चरण में रहता है, इसलिए भी उनके गंभीर संक्रमित होने का खतरा ज्यादा होता है।
मंकी पॉक्स संक्रमित लोगों के लिए क्या इलाज मौजूद हैं?
मेडिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, एमपॉक्स के लिए फिलहाल कोई उपचार नहीं है, लेकिन कुछ एंटीवायरल दवाओं का टेस्ट किया जा रहा है। "हालांकि, टीकाकरण है, जो जोखिम को कम करने में प्रभावी है।
प्राथमिकता डीआरसी और आसपास के देशों में सबसे ज्यादा जोखिम वाली आबादी को वैक्सीन की पर्याप्त आपूर्ति प्राप्त करने की होनी चाहिए। अगर जोखिम क्षेत्र में रहने वाले व्यक्तियों को टीका वक्त पर लगाया जाए, तो वो सुरक्षित रहेंगे, इससे महामारी को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी-इसलिए टीका लगाए गए व्यक्ति और व्यापक आबादी दोनों को लाभ होगा।
एमपॉक्स के लिए एक टीका मौजूद है, जिसका उपयोग कई पश्चिमी देशों ने 2022 में के प्रकोप में किया था, लेकिन गरीब अफ्रीकी देशों के लिए टीका हासिल करना और सभी लोगों को टीका लगाना आसार नहीं है।
अफ्रीका में कोई टीका नहीं है। अभी उस टीके का जो कुछ भी हिस्सा बचा है, वह पश्चिम देशों में उनकी अपनी आपातकालीन तैयारियों के हिस्से के रूप में जमा है। दान के माध्यम से, अफ्रीका सीडीसी 280,000 खुराक प्राप्त करने में कामयाब रहा है। लेकि वैक्सीन के प्रभावी होने के लिए, लोगों को दो खुराक लेनी चाहिए, जिससे उनके पास केवल 140,000 लोगों को देने के लिए ही टीके बचेंगे।
मंकी पॉक्स से आप कैसे खुद को बचा सकते हैं?
अफ्रीका के CDC एनगोंगो ने लोगों को "व्यक्तिगत स्वच्छता की बुनियादी बातों पर वापस जाने" की सलाह दी और लगातार हाथ धोते रहने को कहा है। इसके अलावा, बीमार लोगों के संपर्क से बचने लक्षण दिखने पर तत्काल हॉस्पीटल जाने को कहा है, ताकि वायरस को फैलने से रोका जा सके।
अगर आप ऐसे देश में हैं, जहां वैक्सीव उपलब्ध है, तो एमपॉक्स के टीके ले सकते हैं।
वायरस को फैलने से रोकने के लिए अमीर देशों में संसाधनों को देखते हुए, वैज्ञानिकों का मानना है, कि अगर कांगो से जुड़े नए प्रकोपों की जल्दी पहचान की जाती है, तो संक्रमण को अपेक्षाकृत जल्दी रोका जा सकता है।
एक्सपर्ट्स का कहना है, कि बड़ा जोखिम मध्य अफ्रीका में है, जहां महामारी फैल रही है और तेजी से फैलती जा रही है। लिहाजा, जोखिम को रोकने के लिए तत्काल अफ्रीका पर फोकस करने की जरूरत है।
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