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नेपाल में 10 साल में एक फीसदी बढ़ गई मुस्लिम आबादी, राजनीतिक पार्टियों ने हिन्दू राष्ट्र बनाने की मांग की तेज

नेपाल में लोकतंत्र की स्थापना के एक दशक के भीतर ही एक बार फिर से राजशाही और हिंदू राष्ट्र की मांग जोर पकड़ रही है। इसे लेकर देश भर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहा है।

नेपाली की जनता का रुख भांपकर कई ऐसे दल हैं जिन्होंने देश को हिन्दू राष्ट्र बनाने का संकल्प ले लिया है। राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी, नेपाल जनता पार्टी के अलावा सत्ताधारी पार्टी नेपाल कांग्रेस के भी अधिकांश नेता नेपाल को एक बार फिर से हिन्दू राष्ट्र बनाने के पक्षधर हैं।

Hindu Rashtra Status in Nepal

राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी

नेपाल में हिन्दू राष्ट्र बनने की सबसे अधिक मांग राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (आरपीपी) कर रही है। आरपीपी को राजा समर्थक पार्टी माना जाता है। आरपीपी ने नेपाल में राजतंत्र और हिंदू राष्‍ट्र को फ़िर से बहाल करने को लेकर प्रदर्शनों के सिलसिले की शुरुआत की है। इसके लिए ये पार्टी राजधानी काठमांडू और कुछ अन्य शहरों में प्रदर्शन करने के साथ ही जनजागरण अभियान चला रही है।

नेपाली संसद में आरपीपी के पास 14 सीटें हैं। पिछले सप्ताह ही राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी ने प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल को 40 सूत्रीय मांगों का चार्टर सौंपते हुए नेपाल को एक हिंदू राज्य के रूप में फिर से स्थापित करने के लिए अपने अभियान की घोषणा की। इसके अलावा पार्टी की मांग देश में धर्म परिवर्तन पर तत्काल रोक लगाने की भी है।

नेपाली कांग्रेस

हाल में ही नेपाली कांग्रेस नेताओं के एक वर्ग ने भी नेपाल को हिंदू राज्य के रूप में बहाल करने के लिए आवाज उठाई है। काठमांडू में पिछले सप्ताह हुई 14वीं 'महासमिति' बैठक के दौरान पार्टी की सामान्य समिति के लगभग 950 सदस्यों ने नेपाल में हिंदू राज्य की बहाली के लिए एक याचिका पर हस्ताक्षर किए।

नेपाली कांग्रेस मे विधायक और पार्टी की केंद्रीय कार्य समिति के सदस्य शंकर भंडारी, हिंदू राज्य की बहाली के लिए नेपाली कांग्रेस में अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं। हिंदू समर्थक प्रचारकों ने कहा है कि सामान्य समिति के अधिकांश सदस्य हिंदू राज्य के पक्ष में हैं, इसलिए नेपाली कांग्रेस को इस क्षण का नेतृत्व करना चाहिए।

नेपाली जनता पार्टी

भारत की भारतीय जनता पार्टी की तरह नेपाल में नेपाली जनता पार्टी का चुनाव चिन्ह कमल है और हिन्दू राष्ट्र अंतिम लक्ष्य है। नेपाल की राजनीति में, जहां मुख्य रूप से वामपंथी और केंद्र-वाम दलों का वर्चस्व है, एनजेपी अपनी हिंदुत्व साख के साथ अपना वोटबैंक मजूबत करने में जुटी हुई है।
नेपाली जनता पार्टी का मानना है कि देश में धर्म परिवर्तन आज एक बड़ा खतरा है। और अब नेपाल को हिंदू राष्ट्र बनाने का समय आ गया है। नेपाली जनता पार्टी हिन्दू राष्ट्र की मांग के साथ साल 2027 में चुनाव लड़ने वाली है।

क्यों तेज हुई हिन्दू राष्ट्र की मांग?

नेपाली पार्टियों की नजर में यह मांग तेज होने का सबसे बड़ा कारण ये है कि नेताओं को लगता है कि धर्म का इस्तेमाल राजनीति के लिए किया जा सकता है। कुछ लोग नेपाली कांग्रेस में 'हिंदू राष्ट्र' की मांग बढ़ने को देश में भारत की सत्तारूढ़ पार्टी बीजेपी के बढ़ते प्रभाव के संकेत के रूप में भी देखते हैं।

साल 2021 की जनगणना के मुताबिक नेपाल में हिंदू आबादी 81 फीसदी है। इसके बाद 8 फीसदी के साथ बौद्ध धर्म के लोग हैं। इसके बाद 5 फीसदी लोग मुस्लिम धर्म को मानने वाले हैं। नेपाल में हिन्दू और बौद्ध भले ही सबसे अधिक हैं मगर हाल में इनकी जनसंख्या का प्रतिशत कम हुआ है। वहीं, मुस्लिम धर्म को मानने वाले लोगों की संख्या में काफी तेजी से इजाफा हुआ है।

एक दशक पहले जहां नेपाल में 4 फीसदी लोग मुस्लिम थे, वे अब बढ़कर 5 फीसदी हो चुके हैं। जनगणना रिपोर्ट के अनुसार, हिंदू और बौद्ध धर्म के अनुयायियों में क्रमशः 0.11 प्रतिशत और 0.79 प्रतिशत की गिरावट आई है। मुस्लिमों की अचानक बढ़ी आबादी से हिन्दुओं का एक वर्ग सतर्क हो गया है जिसका फायदा अब नेता उठाना चाह रहे हैं।

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