ईरान का गायब सुप्रीम लीडर! जिंदा है या सच में मर गया? मोजतबा खामेनेई क्यों नहीं आ रहा सामने, IRGC चला रहे देश?
Mojtaba Khamenei Missing: ईरान इस वक्त एक ऐसे रहस्य के बीच खड़ा है, जिसने दुनिया की बड़ी ताकतों को भी उलझा दिया है। नया सुप्रीम लीडर बने मोजतबा खामेनेई को पद संभाले दो हफ्ते से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन वो एक बार भी सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए।
न कोई वीडियो, न कोई लाइव संबोधन, न कोई ताजा तस्वीर। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वो वाकई सत्ता में हैं या सिर्फ एक चेहरा भर हैं। अमेरिका और इजरायल ने दावा किया कि हो सकता है वो जिंदा ना हो, कुछ रिपोर्ट में कहा गया कि वो कोमा में है।

कहां हैं मोजतबा खामेनेई? (Where is Mojtaba Khamenei)
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इसके ठीक 10 दिन बाद 9 मार्च को उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर बना दिया गया। लेकिन इसके बाद से वो पूरी तरह से सार्वजनिक नजरों से गायब हैं।
12 मार्च को उनका पहला बयान आया, लेकिन वो भी उन्होंने खुद नहीं दिया। एक टीवी एंकर ने पढ़कर सुनाया। 20 मार्च को नवरोज (ईरानी नया साल) के मौके पर दूसरा संदेश जारी हुआ, जो फिर लिखित था और मीडिया के जरिए पढ़ा गया। इससे उनके गायब होने का रहस्य और गहरा गया। लोगों के मन में सवाल उठने लगे कि वो आखिर हैं कहां और क्या कर रहे हैं।
हमले में घायल मोजतबा खामेनेई, सामने आने की हालत नहीं? | Mojtaba Khamenei Injured in Airstrike
इजरायल और अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 फरवरी के उसी हमले में मोजतबा खामेनेई भी घायल हुए थे, जिसमें उनके पिता की मौत हुई। सूत्रों का कहना है कि वो जिंदा हैं, लेकिन उनकी चोट इतनी गंभीर है कि वो सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आ सकते। कहा जा रहा है कि वो कोमा में हैं।
एक अमेरिकी अधिकारी ने Axios से कहा कि "हम नहीं मानते कि ईरान किसी मृत व्यक्ति को सुप्रीम लीडर बना देगा, किन यह भी साफ नहीं है कि असली कंट्रोल उनके हाथ में है।" यानी जिंदा होने की पुष्टि तो है, लेकिन कंट्रोल में होने पर सवाल बना हुआ है।
विशेषज्ञ Raz Zimmt का कहना है कि उनकी चोट इतनी गंभीर है कि वो वीडियो तक जारी नहीं कर सकते। अगर वो सामने आएंगे तो दुनिया को उनकी हालत का पता चल जाएगा, इसलिए वो अभी छुपे हुए हैं।
क्या IRGC चला रहा है ईरान? (Is IRGC Running Iran)
सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि असली ताकत किसके हाथ में है। इजरायल के अखबार जेरूसलम पोस्ट के मुताबिक, इस वक्त ईरान में वास्तविक नियंत्रण इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के पास हो सकता है। मतलब मोजतबा नाम के सुप्रीम लीडर हैं, लेकिन फैसले कोई और ले रहा है।
खुफिया सूत्रों का दावा है कि मोजतबा औपचारिक रूप से सुप्रीम लीडर हैं, लेकिन फैसले जमीन पर IRGC ले रहा है। यही वजह है कि अमेरिका में भी इस मुद्दे पर लगातार चर्चा हो रही है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की खुफिया ब्रीफिंग में यह सवाल उठ रहा है कि "तेहरान में आखिर कमान किसके हाथ में है?"
बिना सामने आए जारी सख्त संदेश
मोजतबा खामेनेई ने अपने बयानों में सख्त रुख दिखाया है। 12 मार्च के संदेश में उन्होंने अमेरिका के खिलाफ लड़ाई जारी रखने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद रखने की बात कही। 20 मार्च के नवरोज संदेश में उन्होंने ईरानी जनता की तारीफ की और संघर्ष जारी रखने का संकेत दिया। इसी दिन एक पुराना वीडियो भी जारी किया गया, जिसमें वो एक मदरसे में पढ़ाते दिखे, लेकिन यह साफ नहीं किया गया कि वीडियो कब का है।
मोजतबा की गैरमौजूदगी के बीच ईरान को बड़ा झटका लग रहा है। 16 मार्च को IRGC के वरिष्ठ कमांडर गुलामरजा सुलेमानी मारे गए। इसके अगले ही दिन 17 मार्च को अली लारीजानी, जो ईरान की सुरक्षा रणनीति के प्रमुख थे, वो भी इजरायली हमले में मारे गए। यानी ईरान अपने शीर्ष नेतृत्व को लगातार खो रहा है, फिर भी उसकी सैन्य गतिविधियां जारी हैं।
जंग, तेल और वैश्विक असर (War and Global Impact)
28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष में अब तक ईरान के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 1,270 लोग मारे जा चुके हैं। जवाब में ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया। यह वही रास्ता है, जहां से दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल और LNG गुजरता है। ईरान की इस कार्रवाई से वैश्विक ऊर्जा संकट का खतरा बढ़ गया है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का कहना है कि किसी एक व्यक्ति की मौजूदगी या गैरमौजूदगी से देश नहीं रुकता। उन्होंने कहा कि "सुप्रीम लीडर तक शहीद हो गए, लेकिन सिस्टम चलता रहा।"
यही बात अब दुनिया के लिए सबसे बड़ा सवाल बन गई है। क्या यह ईरान की ताकत है कि बिना स्पष्ट नेतृत्व के भी वह लड़ रहा है, या फिर यह उसकी सबसे बड़ी कमजोरी है?
कुल मिलाकर, मोजतबा खामेनेई का गायब रहना सिर्फ एक व्यक्ति का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया के लिए एक रणनीतिक पहेली बन चुका है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि ईरान की असली कमान किसके हाथ में है।
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