भारत पर हो गया 620.7 अरब डॉलर का कर्ज, क्या श्रीलंका जैसे बिगड़ेंगे हालात? सरकार ने दिया जवाब

भारत का एक तबका बार बार कह रहा है, कि भारत का हाल भी श्रीलंका के जैसे हो सकते हैं। लिहाजा, समझना जरूरी है, कि भारत और श्रीलंका की स्थिति में क्या अंतर है। श्रीलंका पर करीब 51 अरब डॉलर का कर्ज है।

नई दिल्ली, जुलाई 12: भयावह आर्थिक संकट में फंसे श्रीलंका को देखकर भारत में भी लगातार सवाल उठ रहे हैं, कि क्या भारत पर विदेशी कर्ज काफी ज्यादा हो गया है और क्या भारत का भी हाल श्रीलंका जैसा तो नहीं हो जाएगा? कई नेताओं ने इस बाबत ट्वीट भी किए हैं और केन्द्र की मोदी सरकार की आर्थिक नीति पर सवाल उठाए हैं। लेकिन, केन्द्र सरकार ने किसी भी चिंता की बात को सिरे से खारिज कर दिया है और कहा है, कि भारत की स्थिति पूरी तरह से ठीक है और किसी भी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है।

भारत पर 620.7 अरब डॉलर का कर्ज

भारत पर 620.7 अरब डॉलर का कर्ज

केंद्र सरकार ने भारत के बाहरी कर्ज के बारे में आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि, भारत की कुल बाहरी देनदारी 620.7 अरब डॉलर में से केंद्र की हिस्सेदारी सिर्फ 130.8 अरब डॉलर है, जो कुल कर्ज देनदारी का 21 फीसदी है। केन्द्र सरकार ने कहा कि, इस कर्ज में भारत का स्पेशल ड्रॉविंग राइट (SDR) आवंटन भी शामिल है। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एक सूत्र ने बताया है कि, 'अफवाह फैलाया जा रहा है, कि केन्द्र सरकार कर्ज के बोझ तले दबी हुई है, ये निराधार है और 40 प्रतिशत से ज्यादा कर्ज गैर-वित्तीय निगमों का है।' दरअसल, कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है, भारत सरकार को इसी साल 267 अरब डॉलर के विदेशी कर्ज का पुनर्भुगतान करना है, जो भारत के पास कुल विदेशी मुद्रा भंडार का करीब 40 प्रतिशत से ज्यादा है, लिहाजा कई रिपोर्ट्स में कहा गया है, कि ये भारत के लिए चिंता की बात है और इससे भारत का विदेशी मुद्रा भंडार करीब आधा खाली हो जाएगा।

विदेशी कर्ज पर अधिकारियों ने क्या कहा?

विदेशी कर्ज पर अधिकारियों ने क्या कहा?

भारतीय अधिकारियों ने इन चिंताओं के बाद भारत पर कर्ज की स्थिति को स्पष्ट किया है। एक सूत्र ने इकोनॉमिक टाइम्स से कहा कि, "यह विश्लेषण अधूरा, गलत है और इसमें कुछ बुनियादी तथ्य छूट गए हैं।" अधिकारियों ने ईटी को बताया कि, यह सच है कि 267.7 अरब डॉलर के कर्ज का भुगतान एक साल से भी कम समय में होना है, इसमें केंद्र की हिस्सेदारी सिर्फ 7.7 अरब डॉलर या 3% से कम है, इस प्रकार सरकार का ऋण स्तर काफी मैनेज्ड है और किसी भी प्रकार से असुरक्षित स्थिति में नहीं है। आरबीआई के आंकड़ों से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2013-14 के अंत में केंद्र सरकार का कर्ज जीडीपी के 52.2% से घटकर वित्त वर्ष 2019-20 के अंत में जीडीपी का लगभग 51.8% हो गया है। हालांकि, यह वित्त वर्ष 2011 में फिर से एक ही वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद के लगभग 10% तक बढ़ गया, क्योंकि कोविड 19 की वजह से देश में लॉकडाउन लगाना पड़ा था, जिससे अर्थव्यवस्था काफी प्रभावित हुई है।

भारत के कर्ज को समझिए

भारत के कर्ज को समझिए

अधिकारियों ने कहा कि, भारत का सकल सार्वजनिक ऋण, भारत के सकल घरेलू उत्पाद का 86.9% अधिक है, लेकिन कई अन्य देशों की तुलना में बेहतर है। अमेरिका पर 125.6% का सकल सार्वजनिक ऋण है, फ्रांस का 112.6%, कनाडा का 101.8%, ब्राज़ील का 91.9% और यूके का 87.8% उनके संबंधित सकल घरेलू उत्पाद का है। कुल ऋण के प्रतिशत के रूप में बाह्य ऋण 2013-14 में लगभग 6.4% से घटकर 2021-22 में 4.7% हो गया है। हालांकि कुछ राज्यों के कर्ज पर चिंता जरूर उठ रहे हैं, जिसे पहले ही आरबीआई और अर्थशास्त्रियों द्वारा बार-बार सचेत किया जा रहा है। कई राज्यों द्वारा ऑफ-बजट उधारी का सहारा लेने के भी प्रमाण हैं।

क्या श्रीलंका जैसे हो सकते हैं हालात?

क्या श्रीलंका जैसे हो सकते हैं हालात?

भारत का एक तबका बार बार कह रहा है, कि भारत का हाल भी श्रीलंका के जैसे हो सकते हैं। लिहाजा, समझना जरूरी है, कि भारत और श्रीलंका की स्थिति में क्या अंतर है। श्रीलंका पर करीब 51 अरब डॉलर का कर्ज है। भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने अपने एक ट्वीट में कई देशों पर कर्ज की स्थिति को समझाया है। उन्होंने जो आंकड़े दिए हैं, उसके मुताबिक, अमेरिका पर 30 हजार 400 अरब डॉलर का कर्ज है, जबकि चीन पर 13 हजार डॉलर का कर्ज है, वहीं, यूके पर 9020 अरब डॉलर और फ्रांस पर 7320 अरब डॉलर का कर्ज है, जबकि भारत पर सिर्फ 620 अरब डॉलर का ही कर्ज है। भारतीय रिजर्व बैंक के मुताबिक, पिछले वित्तीय वर्ष के मुकाबले भारत पर विदेशी कर्ज में 47.1 अरब डॉलर का इजाफा हुआ है और इस वित्तीय वर्ष में भारत पर कुल विदेशी कर्ज बढ़कर 620.7 अरब डॉलर हो गया है। हालांकि, पिछले वित्तीय वर्ष से तुलना करें, तो विदेशी कर्ज हमारी कुल जीडीपी का 19.9 प्रतिशत रह गया था, जो उससे पिछले वित्त वर्ष यानि 2020-21 में 21.2 प्रतिशत था, लेकिन मार्च 2022 में कर्ज का अनुपात घटकर 19.9 फीसदी रह गया है। यानि, भारत पर 47.1 अरब डॉलर का कर्ज जरूर बढ़ा है, लेकिन वो भारत की जीडीपी का सिर्फ 19.9 प्रतिशत है, लिहाजा चिंता की कोई बात नहीं है।

रुपये के गिरने का अनुमान

रुपये के गिरने का अनुमान

हालांकि, इसके बावजूद डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया का गिरना जारी रह सकता है। डीबीएस बैंक इंडिया के प्रबंध निदेशक आशीष वैद्य ने इकोनॉमिक टाइम्स से कहा कि, "मौजूदा स्थानीय मैक्रो सेटअप मुख्य रूप से तेल आयात के कारण रिकॉर्ड चालू खाता घाटे से प्रेरित है।" उन्होंने कहा कि, "इसके साथ-साथ, उच्च अमेरिकी रेट ट्रेजेक्टरी और जोखिम लेने की भावना भी घटी है, जिसकी वजह से अमेरिकी डॉलर मजबूत हो रहा है और भारतीय रुपये पर इसका नकारात्मक असर पड़ रहा है। आशीष वैद्य ने इकोनॉमिक टाइम्स से कहा कि, 'विदेशी कर्ज की मैच्योरिटी पूरा होने की वजह से भारतीय रुपये पर प्रेशर और भी ज्यादा बढ़ सकता है'। उन्होंने कहा कि, 'अगले तीन से 6 महीनों के बीच स्थिति थोड़ी खराब जरूर हो सकती है और बाजार में अस्थिरता पैदा हो सकती है, लेकिन, उसके बाद इसमें सुधार का दिखना शुरू हो जाएगा'

भारत का व्यापार घाटा भी बढ़ा

भारत का व्यापार घाटा भी बढ़ा

हालांकि, भारत का व्यापार घटना थोड़ी चिंता की बात है। ताजा आंकड़ों से पता चला है कि, भारत का व्यापार घाटा सिर्फ जून महीने में बढ़कर रिकॉर्ड 25.63 अरब डॉलर हो गया है, जो भारत सरकार के लिए बड़ा टेंशन है, क्योंकि भारत सरकार की कोशिश लगातार व्यापार घाटे को पाटने की रही है, ताकि देश का निर्यात बढ़ाने के साथ साथ विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाया जाए, लेकिन इस पहल में सरकार को बड़ा झटका लगा है। रिकॉर्ड व्यापार घाटे के पीछे की सबसे बड़ी वजह पेट्रोलियम, कोयले और सोने के आयात में भारी बढ़ोतरी को बताया जा रहा है, वहीं जून महीने में भारत के निर्यात में भारी गिरावट भी दर्ज की गई है, जिससे रुपये में और गिरावट आई है और बड़े करेंट अकाउंट डेफिसिट (सीएडी) के बारे में चिंता बढ़ गई है।

भारत के आयात में उछाल

भारत के आयात में उछाल

पिछले हफ्ते जारी भारत सरकार के आधिकारिक आंकड़ों से पता चला है कि, जून में भारत का व्यापारिक निर्यात 16.8% बढ़कर 37.9 अरब डॉलर हो गया है, जो मई के मुकाबले 20.5% से कम था, जबकि भारत के आयात में 51% का उछाल आया है और जून महीने में भारत का आयात बढ़कर 63.58 अरब डॉलर हो गया है। वहीं, पिछले साल से तुलना करें, तो साल 2021 के जून महीने में भारत का व्यापार घाटा 9.61 अरब डॉलर था।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+