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Pakistan: आतंकियों के पास कश्मीर में 'जिहाद' के लिए पैसे खत्म, पाकिस्तान में खुलेआम वसूल रहे हैं चंदा

पाकिस्तान पहले 2008-2010 और 2012-2015 के बीच FATF ग्रे सूची में था और फरवरी 2015 में सूची से हटा दिया गया था। पिछले साल भी पाकिस्तान को ग्रे-लिस्ट से बाहर कर दिया गया है।

Jaish-e-Mohammed

Pakistan Terrorist: कश्मीर में 'जिहाद' करने के लिए आतंकी संगठनों के पास अब पैसे नहीं बचे हैं, लिहाजा संयुक्त राष्ट्र की सूचि में शामिल आतंकी संगठन, पाकिस्तान में सार्वजनिक तौर पर चंदा जुटा रहे हैं।

न्यूज इंटरवेंशन एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित पाकिस्तानी आतंकवादी समूह जैश-ए-मोहम्मद (JeM) को पेशावर में खुलेआम पैसे जुटाते देखा गया है।

कश्मीरी नेता और यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (UKPNP) के संस्थापक शौकत अली कश्मीरी ने ने ट्वीट करते हुए कहा है, कि "प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) पेशावर में खुलेआम फंड जुटा रहा है। पाकिस्तान ने देश में चरमपंथी समूहों के फिर से उभरने पर चिंता जताई है। समूह कई आतंकवादी हमलों के लिए जिम्मेदार है।"

शौकत अली कश्मीरी ने अपने ट्वीट में कहा है, कि पाकिस्तान ने चिंता जताई है, लेकिन अहम सवाल ये है, कि अगर पाकिस्तान को इतनी ही चिंता है, तो फिर उसने कार्रवाई क्यों नहीं की है?

जैश-ए-मोहम्मद को पाकिस्तान का समर्थन

जैश-ए-मोहम्मद पिछले साल एक बार फिर से उस वक्त एक्टिव हुआ है, जब पिछले साल पाकिस्तान को एफएटीएफ ने ग्रे-लिस्ट से बाहर निकाल लिया था, जिसके बाद पाकिस्तान में स्थिति आतंकी संगठनों को फिर से नया जीवन मिल गया है।

एफएटीएफ की तलवार हटने के बाद से पाकिस्तान के सुरक्षा बलों ने आतंकी संगठनों का खुलकर समर्थन करना शुरू कर दिया है। आतंकवाद के वित्तपोषण पर वैश्विक निगरानी संस्था, एफएटीएफ ने अक्टूबर 2022 में पाकिस्तान को अपनी ग्रे सूची से हटाने की घोषणा करते हुए कहा कि देश ने मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी वित्तपोषण के खिलाफ अपनी कार्य योजना को लागू किया है। पाकिस्तान जून 2018 से FATF की ग्रे लिस्ट में था।

रिपोर्ट से पता चला है, कि जैश-ए-मोहम्मद का धन उगाहना पेशावर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पाकिस्तान के पंजाब, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और अन्य क्षेत्रों में भी लागतार पैसे जुटाए जा रहे हैं।

वहीं, जैश-ए-मोहम्मद को चंदा देने की बात की चर्चा सोशल मीडिया पर हजारों पाकिस्तान यूजर्स कर रहे हैं। वहीं, ट्वीट के वायरल होने के बाद उनमें से एक ने अपना अकाउंट डिएक्टिवेट कर दिया।

ट्विटर यूजर आसिफ अफरीदी ने ईद की नमाज के दौरान अपना अनुभव बताया था और कहा था, कि उन्होंने प्रतिबंधित संगठन के सदस्यों को पेशावर में सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में खुलेआम फंड इकट्ठा करते हुए देखा। उन्होंने कहा, कि "इस संगठन के सदस्य पेशावर में सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में खुलेआम पैसे वसूल रहा है। मेरे पिता, मेरा भाई और मैं (कुल छह सदस्य) वहां ईद की नमाज अदा करने के लिए गए थे।"

'जिहाद के लिए धन उगाहना काफी आसान'

पाकिस्तान के एक और ट्वीटर यूजर एहसानुल्लाह खान जादून ने निराशा जताते हुए कहा, कि पाकिस्तान में इस तरह की धन उगाहना आम बात है। उन्होंने कहा,कि "किसी के लिए भी नमाज के बाद खड़े होना और फ़िलिस्तीन और कश्मीर में जिहाद छेड़ने के लिए खुले तौर पर धन मांगना बहुत ही असामान्य है।" उन्होंने लिखा है, कि "वह अक्सर कराची में हमारी मस्जिद में आते हुए देखा जाता है।"

यानि, जिस आसानी से ये आतंकी समूह खुले तौर पर धन जुटा सकते हैं, वह आतंकवादी गतिविधियों पर नकेल कसने की पाकिस्तान सरकार की क्षमता के बारे में बड़ा शक पैदा करता है।

मुंबई में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी हमले को 14 साल हो चुके हैं। मुंबई में तीन दिन तक चले खूनखराबे के पीछे पाकिस्तान का हाथ होने के सबूत सबके सामने है। पाकिस्तान में मौजूद मुंबई हमले के गुनहगारों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है।

वहीं, पिछले साल एफएटीएफ की ग्रे-लिस्ट से बाहर होने के बाद अब पाकिस्तान फिर से इन आतंकियों के वित्त पोषण में जुट गया है, लिहाजा अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को फिर से आतंकियों को पालने वाले इस देश के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की जरूरत है।

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