गुलामों के बने घर में रहने को मजबूर हैं मिशेल ओबामा!
वाशिंगटन। व्हाइट हाउस में रहना अमेरिका में शायद हर युवा का सपना हो सकता है लेकिन फर्स्ट लेडी और राष्ट्रपति बराक ओबामा की पत्नी मिशेल ओबामा की मानें तो यह उनकी मजबूरी है। मिशेल ने कहा है कि वह वर्ष 2009 से एक ऐसे घर में रहने को मजबूर हैं जिसे गुलामों ने तैयार किया था। अब उनके इस बयान के बाद एक नई बहस छिड़ गई है।

पहले भी कही यह बात
मिशेल ने डेमोक्रेटिक पार्टी के कंवेशन के दौरान यह बात कही। मिशेल ने कहा था कि वह और उनके पति गुलामों के बनाए व्हाइट हाउस में रहने को मजबूर हैं। मिशेल की मानें तो वह हर रोज सुबह एक ऐसे घर में उठती हैं जिसे गुलामों ने बनाया था। वैसे उन्होंने यह बात पहली बार नहीं कही है।
न्यूयॉर्क में किया था जिक्र
उन्होंने इस साल की शुरुआत में न्यूयॉर्क में भी कुछ ऐसा ही कहा था। लेकिन उस समय वह सिटी कॉलेज में एक समारोह में यही बात कही थी और उसकी गंभीरता इतनी ज्यादा नहीं थी। अब उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय राष्ट्रीय सम्मेलन जैसे बड़े मंच पर यह बात कही है।
1800 में खुला था व्हाइट हाउस
मिशेल ने जो कहा है उसकी पुष्टि इतिहासकार भी करते हैं। वे भी मानते हैं कि व्हाइट हाउस को बनाने में दासों से भी काम लिया गया था। व्हाइट हाउस पर रिसर्च करने वाले इतिहासकारों और लेखकों का कहना है कि सन 1792 में व्हाइट हाउस के निर्माण के दौरान दासों का प्रयोग किया गया था। इस इमारत का निर्माण 1792 में शुरू हुआ था और सन 1800 में इसे खोला गया था।












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