अब पाकिस्तान के परमाणु हथियारों पर मंडराया खतरा, तालिबान के कंट्रोल में जाने की आशंका
यरुशलम, 17 अगस्त: तालिबान ने जिस तरह से अपने से कई गुना शक्तिशाली अफगान सेना को हराया है, वह बिना पाकिस्तान के सक्रिय समर्थन के मुमकिन नहीं था। लेकिन, अब दुनियाभर के सिक्योरिटी एक्सपर्ट को चिंता सता रही है कि जिहादी ताकतें अब खुद को परमाणु हथियार संपन्न बनाने के लिए पाकिस्तान के परमाणु संसाधनों पर नियंत्रण करने की कोशिश कर सकती हैं। ब्रिटिश आर्मी के एक पूर्व कमांडर ने एक वर्चुअल कांफ्रेंस में यह चिंता जाहिर करके तमाम वैश्विक सुरक्षा एजेंसियों को टेंशन में ला दिया है।

ऐक्शन में तालिबान, टेंशन में पाकिस्तान
पाकिस्तानी हुक्मरानों ने तालिबान को खड़ा करने के लिए भले ही अपनी आवाम का खून चूस लिया हो, काबुल पर कब्जे के बाद तालिबान ने अपना जो रंग दिखाना शुरू किया है, उसके बाद पिछले कुछ हफ्तों से उछल रहे पाकिस्तानी शासकों के होश गुम होने शुरू हो गए हैं। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक तालिबान ने तहरीक-ए-तालिबान के कई सरगनाओं को जेल से बाहर कर दिया है, जिसमें फकीर मोहम्मद भी शामिल है, जो पाकिस्तान की ओर से घोषित आतंकी है और दहशत की कई घटनाओं में उसका रोल माना जाता है। पाकिस्तान ने कभी नहीं सोचा होगा कि तालिबान इस तरह का कोई काम करेगा, जिससे उसकी परेशानियां बढ़ जाए। यही वजह है कि वैश्विक सुरक्षा एक्सपर्ट आने वाले दिनों में पाकिस्तान में जिहादी ताकतों की दखल और ज्यादा बढ़ने का अनुमान लगाने लगे हैं।

पाकिस्तान के लिए भी खतरा पैदा होगा- ब्रिटिश सिक्योरिटी एक्सपर्ट
एक पूर्व ब्रिटिश कमांडर कर्नल रिचर्ड केंप ने यरुशलम स्थित एक नॉन-प्रॉफिट संगठन मीडिया सेंट्रल की ओर से आयोजित वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में सोमवार को कहा कि 'पाकिस्तान ने तालिबान को बनाया है, उसे पैसे दिए हैं और तालिबान को समर्थन किया है।' कर्नल केंप अफगानिस्तान और इराक जैसे दुनिया के कुछ सबसे मुश्किल जगहों पर सैनिकों की अगुवाई कर चुके हैं। उन्होंने कहा है, 'बिना पाकिस्तान के समर्थन के तालिबान 20 साल तक जिंदा नहीं रह पाता या उसने जो मुहिम चलाई या अपनी जीत सुनिश्चित की, उसके बगैर नहीं हो सकता था।' उन्होंने आगाह करते हुए कहा है कि 'पड़ोसे में जिहादी शासन आना पाकिस्तान के लिए भी बहुत बड़ा खतरा पैदा करेगा।'

पाकिस्तान के परमाणु ठिकानों पर कब्जा कर सकता है तालिबान
पाकिस्तान में जिसकी भी सरकार रही हो, उसने हमेशा आतंकवाद को भी अच्छे और बुरे आतंकवाद के नजरिए से देखा है। इसी कड़ी में वह तहरीक-ए-तालिबान या पाकिस्तान तालिबान को 'बैड तालिबान' और अफगानिस्तान में कहर बरपाने वाले को 'गुड तालिबान' बताता रहा है। लेकिन, जब उसके गुड तालिबान ने उसके बैड तालिबान को खुल्ला छोड़ना शुरू किया है तो हालात कितनी तेजी से बेकाबू हो सकते हैं, इसका सिर्फ अंदाजा लगाया जा सकता है। यही वजह है कि कर्नल रिचर्ड केंप ने कहा है, 'अफगानिस्तान मुहिम के दौरान हमने जिसे सबसे बड़ा खतरा महसूस किया है या तालिबान के जीतने को लेकर जो डर बना रहता था, वह यही था कि वह पाकिस्तान के कुछ परमाणु संस्थानों या परमाणु हथियारों के ठिकानों को नियंत्रण में ले सकता है।'

मानवता पर आने वाला है बड़ा संकट !
एक्सपर्ट की चिंता है कि पाकिस्तान में कोई भी सरकार हो, उनका तालिबान, अल-कायदा और बाकी जिहादी और आतंकवादी संगठनों के साथ किसी न किसी तरह के रिश्ते रहे हैं। ब्रिटिश आर्मी के दिग्गज कहते हैं, 'हमें इस खतरे को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए कि आतंकवादियों के हाथों में परमाणु सामग्री जा सकते हैं। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि वह उनका परमाणु मिसाइलों की तरह इस्तेमाल करेंगे ही, लेकिन वह तालिबान या जिहादियों को परमाणु हथियारों से लैस जरूर कर सकते हैं।' अफगानिस्तान में तो तालिबान की सत्ता स्थापित हो चुकी है। ऐसे में अगर पाकिस्तान के परमाणु हथियारों और संयंत्रों पर जिहादी ताकतों का कब्जा हो गया तो वह भारत के लिए भी बहुत बड़ा खतरा साबित हो सकते हैं। क्योंकि, जब पाकिस्तान में आधिकारिक तौर पर सत्ता करने वाली सरकारें भी परमाणु हमलों की धमकी देने से पीछे नहीं रहतीं, फिर जिहादी ताकतों के हाथों में उसका जाना पूरी मानवता के लिए भयानक साबित हो सकती है।












Click it and Unblock the Notifications