पीएम मोदी की विजिट और लश्कर के तीन फाइनेंसर्स पर लग गया बैन
रियाद। प्रधानमंत्री अमेरिका के बाद अब सऊदी अरब की यात्रा पर हैं और इन दोनों देशों की यात्रा के साथ ही भारत के लिए अच्छी खबर आ रही है। अमेरिका और सऊदी अरब ने तीन ऐसे व्यक्तियों को बैन कर दिया है जो तालिबान, अल कायदा के साथ ही पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा की फंडिंग करते थे।

भारत के लिए अच्छी खबर
लश्कर भारत में मुंबई हमलों के साथ ही कई आतंकी हमलों को अंजाम दे चुका है। सऊदी अरब और अमेरिका दोनों का ही यह कदम काबिल-ए-तारीफ है खासतौर पर भारत के लिए।
क्या है लश्कर-ए-तैयबा और कैसे हुई शुरुआत
जिन फाइनेंसर्स को बैन किया गया है उनकी संख्या तीन है और इनमें से एक व्यक्ति स्कॉटलैंड का है। इस स्कॉटिश नागरिक ने इस्लाम कुबूल कर लिया था और अब यह काफी प्रभावशाली संस्था अल-रहमान वेलफेयर संगठन को चलाता है।
एक नजर डालिए कौन हैं ये तीन फाइनेंस जो लश्कर को उसकी आतंकी साजिशों में मदद करते थे।
अब्दुल अजीज नुरिस्तानी
अब्दुल अजीज नुरिस्तानी जामिया असारिया मदरसा का प्रमुख है और उसका नाम इस लिस्ट में सबसे ऊपर है। वह पेशावर का रहने वाला है और अपने मदरसा के जरिए वह फंड इकट्ठा करता है।
यह मदरसाा लश्कर-ए-तैयबा के लिए काफी खास मदरसा है। इसमें आने वाला पैसा खाड़ी मुल्कों से आता है और फिर इसे मदरसा के जरिए लश्कर के पास भेज दिया जाता है।
कई जांच में यह बात सामने आई है कि राहत कार्यों के नाम पर यह मदरसा पैसा इकट्ठा करता है। अब तक इसने राहत के नाम पर कई मिलियन डॉलर्स इकट्ठा कर लिए हैं। इस रकम का एक बड़ा हिस्सा लश्कर के लिए प्रयोग होता है।
एलेक्जेंडर मैक्लिंटॉक
52 वर्षीय एलेक्जेंडर मैक्लिंटॉक एक स्कॉटिश नागरिक है और उसने 20 वर्ष की उम्र में इस्लाम धर्म को कुबूल कर लिया था। एलेक्जेंडर अल-रहमाह नामक एक कल्याणकारी संगठन को चलाता है और वह तालिबान और अलकायदा के
लिए फंडिंग का काम करता है।
हाफिज सईद से जुड़ी कुछ खास बातें
इस संगठन को तालिबान और अलकायदा के लिए अफगानिस्तान में फंड इकट्ठा करने के लिए ही शुरू किया गया था। इस तरह के भी कई सुबूत मिले हैं कि एलेक्जेंडर लश्कर-ए-तैयबा को भी फंड का कुछ हिस्सा भेजता था। लेकिन पहला मकसद सिर्फ तालिबान और अलकायदा ही था।
मुहम्मद इजाज सफाराश
मुहम्मद इजाज सफाराश लश्कर के लिए पैसे का लेन-देन करने वाला एक अहम व्यक्ति है। वह सऊदी अरब में ही है और लश्कर को वित्तीय मदद देने में उसका एक बड़ा रोल रहा है। वह न सिर्फ लश्कर के आतंकियों के कहीं आने-जाने पर
सारे प्रबंध करता बल्कि उनके लिए जरूरी ट्रैवेल डॉक्यूमेंट्स भी अरेंज करता था। उसके रोल के बारे में उस समय पता लगा जब मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड और लश्कर में नंबर दो की हैसियत रखने वाले जकी-उर-रहमान लखवी की उसके साथ हुई बातचीत को इंटरसेप्ट किया गया।
लखवी उस पर काफी भरोसा करता है और अपने ऑपरेटिव्स के लिए सऊदी अरब में सारे इंतजामों के लिए वह सिर्फ इस पर ही भरोसा करता है।












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