क्या सौर मंडल से बाहर हो सकती है पृथ्वी, terrestrial planet पर बड़ा प्रयोग ?
खगोल भौतिकविदों ने कंप्यूटर पर आधारित एक शोध किया है, जिसमें सौर मंडल में उथल-पुथल मचने की संभावनाओं पर निष्कर्ष निकाले गए हैं। इसके मुताबिक इसमें पृथ्वी सौर मंडल से बाहर भी हो सकती है।

खगोल वैज्ञानिकों ने एक नया प्रयोग किया है, जिसके मुताबिक सौर मंडल में ऐसी भी परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं, जिसमें पूरा सिस्टम बिगड़ सकता और पृथ्वी जैसे ग्रह को उससे बाहर भी होना पड़ सकता है। शोध में पाया गया है कि अगर धरती सौर मंडल से पूरी तरह से बाहर होने से बच भी जाए तो भी ऐसे हालात पैदा हो सकते हैं, जहां जीवन की संभावना बहुत कम रह सकती हैं। हालांकि, यह रिसर्च पूरी तरह से डायनामिक कंप्यूटर सिमुलेशन पर आधारित है।

एक स्थलीय ग्रह पृथ्वी को सौर मंडल से बाहर कर सकता है-शोध
डेविड्सकोर्स डॉट कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक यूसी रिवरसाइड (UCR) के एक खगोल भौतिकविद् ने एक नए प्रयोग में पाया है कि मंगल और बृहस्पति के बीच का एक स्थलीय ग्रह (terrestrial planet) पृथ्वी को सौर मंडल से बाहर कर सकता है। मतलब, अगर इसकी जरा भी आशंका हुई तो ब्रह्मांड में अबतक ज्ञात एकमात्र रहने योग्य ग्रह यानि धरती से जीवन की समाप्ति भी हो सकती है। यूसीआर में खगोल भौतिकविद् स्टीफन केन ने अपने प्रयोग के बारे में बताया है कि उनका शोध ग्रह विज्ञान के क्षेत्र में दो महत्वपूर्ण अंतरालों को लेकर है। पहला सौर मंडल में स्थलीय और विशाल गैस ग्रहों के आकार के बीच वाले ग्रहों की गैरमौजूदगी को लेकर है।

डायनामिक कंप्यूटर सिमुलेशन के आधार पर शोध
केन ने अपने अध्ययन में जिस दूसरे अंतराल को लक्षित किया है, वह सूर्य के सापेक्ष मंगल और बृहस्पति के बीच का स्थान है। इन शून्यताओं को भरने के लिए उन्होंने मंगल और बृहस्पति के बीच विभिन्न द्रव्यमानों के एक ग्रह के डायनामिक कंप्यूटर सिमुलेशन चलाए और फिर बाकी सभी ग्रहों की कक्षाओं पर उसके प्रभाव का अध्ययन किया। केन ने बताया कि 'यह काल्पनिक ग्रह बृहस्पति को हल्का भी धक्का देता है, तो बाकी सभी चीजों को अस्थिर करने के लिए काफी है। कई खगोलविद इस अतिरक्त ग्रह की कल्पना कर चुके हैं, लेकिन अच्छा है कि यह हमारे पास नहीं है।'

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सौर मंडल से बाहर हो सकती है पृथ्वी ?
पृथ्वी से 318 गुना ज्यादा द्रव्यमान और अपने विशाल आकार की वजह बृहस्पति का सौर मंडल पर गहरा गुरुत्वाकर्षण प्रभाव है। केन के मुताबिक हमारे सौर मंडल में कोई भी खगोलीय वस्तु, जैसे कि एक गुजरता हुआ तारा या एक सुपर-अर्थ ने हल्का सा भी बृहस्पति (gas giant ) को छेड़ा तो दूसरे ग्रहों पर इसका बहुत ही ज्यादा असर पड़ेगा। सौर मंडल में सुपर-अर्थ के द्रव्यमान और सटीक स्थान के आधार पर इसकी मौजूदगी महत्वपूर्ण हो साबित हो सकती है। यह न केवल बुध और शुक्र को, बल्कि पृथ्वी को भी सौर मंडल से बाहर निकाल सकता है।

पृथ्वी की कक्षा का आकार बदल सकता है- रिसर्च
शोध के मुताबिक इससे हमारे ग्रह की कक्षा का आकार बदल सकता है, जिसकी वजह से भले ही यहां से जीवन पूरी तरह से समाप्त न हो पाए, लेकिन वह इस तरह से रहने योग्य तो नहीं ही रह जाएगी, जैसी की आज है। इसी तरह सुपर-अर्थ यूरेनस और नेप्च्यून की कक्षाओं को अस्थिर कर सकता है और उन्हें बाहरी अंतरिक्ष की ओर धकेल सकता है।

पूरी तरह से संभावनाओं पर आधारित है यह रिसर्च
वहीं केन ने आगे पाया कि सुपर-अर्थ का द्रव्यमान घटाने और इसे मंगल और बृहस्पति के बीच में व्यवस्थित करने से लंबे समय के लिए स्थिरता आ सकती है। लेकिन, उनकी चेतावनी है कि किसी भी दिशा में हल्का भी बढ़ने से बहुत गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं। हालांकि, उन्होंने अपने शोध को इस निष्कर्ष के साथ खत्म किया है कि 'जितना मैंने पहले सराहा था, हमारा सौर मंडल उससे कहीं अधिक समायोजित है। यह सब जटिल क्लॉक गियर्स की तरह काम करता है।....... '













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