मंगल पर 'पेड़ वाली' ऑक्सीजन का हो गया इंतजाम! जानिए MOXIE ने काम को कैसे बनाया आसान ?
नई दिल्ली, 1 सितंबर: मंगल ग्रह पर ऑक्सीजन नहीं है तो इंसान वहां इसे बनाने में सक्षम हो गया है। नासा को इसमें बड़ी कामयाबी मिली है। उसने अपने मंगल मिशन के साथ वहां पर एक बहुत छोटा से उपकरण भेजा है, जो हर घंटे उतनी ही ऑक्सीजन पैदा करने में सक्षम है, जितना कि धरती पर कोई पेड़ कर सकता है। हालांकि, इंसान के जीवन के लिए आवश्यक ऑक्सीजन की यह अभी भरपाई नहीं कर सकता, लेकिन इससे भविष्य के लिए दरवाजे जरूर खुल गए हैं। आने वाले समय में वहां, वहीं के कॉर्बन डाई ऑक्साइड का इस्तेमाल करके और ज्यादा ऑक्सीजन बनाने वाली मशीन के सफल होने की उम्मीद जग गई है।

मंगल की कार्बन डाई ऑक्साइड से बनने लगी ऑक्सीजन
इंसान मंगल ग्रह पर मानव मिशन भेजने की तैयारी कर रहा है। उससे पहले उसे एक बड़ी कामयाबी मिली है। सब जानते हैं कि मंगल के मुश्किल वातावरण में ऑक्सीजन के बगैर इंसानों का रहना कभी संभव नहीं होगा। लेकिन, जबतक इंसानी कदम इस लाल ग्रह पर पड़ेंगे, उससे पहले मानव निर्मित एक यंत्र ने वहां पर अपना काम करना शुरू कर दिया है। इस समय मंगल के जाजेरो क्रेटर पर जो नासा द्वारा भेजा गया परसेवेरेंस रोवर मौजूद है, उसके साथ एक छोटे से बक्सेनुमा एक उपकरण भी है, जिसने कमाल कर दिया है। यह डिवाइस मंगल पर मौजूद कार्बन डाई ऑक्साइड से ऑक्सीजन पैदा करने लगा है।

MOXIE लगातार ऑक्सीजन बनाने में सक्षम
MOXIE या मार्स ऑक्सीजन इन-सिटू रिसोर्स यूटिलाइजेशन एक्सपेरिमेंट नाम के इस उपकरण ने पिछले साल सात बार सांस लेने लायक ऑक्सीजन पैदा करने में सफलता पाई है। मॉक्सी फिलहाल इतना ही ऑक्सीजन बनाने में सक्षम है, जितना कि धरती पर एक छोटा पेड़ ऑक्सीजन निर्मित करता है। मॉक्सी पर प्रकाशित एक शोध से संकेत मिलता है कि यह कॉर्बन डाई ऑक्साइड से भरे मंगल के वातावरण का इस्तेमाल कर लगातार ऑक्सीजन बना सकता है।(ऊपर वाली तस्वीर सौजन्य: नासा)

हर घंटे 10 ग्राम ऑक्सीजन पैदा करने में सक्षम
जाजेरो क्रेटर में रात के समय कड़ाके की सर्दी रहती है। ऐसे में यहां मॉक्सी को जितनी ज्यादा मात्रा में कार्बन डाई ऑक्साइड मिलेगी, वह उतनी ही ज्यादा ऑक्सीजन बना सकता है। इस यंत्र का वजन सिर्फ 17.1 किलो है, जो अभी हर घंटे करीब 10 ग्राम ऑक्सीजन पैदा करने में सक्षम है। मंगल पर रोवर को संचालित करने वाले जेट प्रपल्शन लैबोरेटरी ने ब्लॉग अपडेट में कहा है, 'हम मंगल पर अनमोल उड़ान मॉडल के लिए रन्स डिजाइन करने के बारे में हमेशा बेहद सतर्क रहते हैं, लेकिन हमने इस बार लगभग 10.5 ग्राम प्रति घंटे की दर से ऑक्सीजन का उत्पादन करने के लिए थोड़ा विशेष प्रयास किया।' (ऊपर वाली तस्वीर सौजन्य: नासा)

तो एक मानव उस पर जीवित रह सकता है
यहां सबसे काम की बात ये है कि अभी मॉक्सी जितना ऑक्सीजन उत्पादन करने में सक्षम है, अगर उसे दोगुना कर दिया जाए तो 'एक मानव उस पर जीवित रह सकता है।' जेट प्रपल्शन लैबोरेटरी के मुताबिक, 2-3 किलो प्रति घंटे ऑक्सीजन तैयार करने के लिए अभी काफी लंबा रास्ता तय करना है। लेकिन, भविष्य में ऑक्सीजन उत्पादन के लिए मॉक्सी की कामयाबी मुख्य लक्ष्य है।

एक औसत पेड़ जितनी ऑक्सीजन का उत्पादन
शोधकर्ताओं ने जो डिटेल दिए हैं, उसके मुताबिक अलग-अलग परिस्थितियों और हालातों में मंगल पर जब वह ऑक्सीजन उत्पादन में सक्षम थे, हर कोशिश में प्रति घंटे 6 ग्राम की दर से ऑक्सीजन उत्पादन करने में सफल हुए। यह वही दर है, जो धरती पर एक औसत पेड़ से मिलता है। जो भी हो नासा की यह कामयाबी भविष्य के लिए संभावनाओं के द्वार तो जरूर खोल दिए हैं।

भविष्य के लिए बहुत बड़ी खोज
जेपीएल ने कहा है, 'हम ये सीख रहे हैं कि अगली मॉक्सी को और अधिक शक्तिशाली कैसे बनाया जाए। इस समय, हम अपनी शक्ति का लगभग 10 प्रतिशत ही ऑक्सीजन पैदा करने के लिए इस्तेमाल करते हैं। फुल-स्केल पर हम 90 फीसदी शक्ति का इस्तेमाल करने की उम्मीद करते हैं।' यानी मौजूदा स्थिति में भी पूर्ण शक्ति का इस्तेमाल करने पर कहीं ज्यादा ऑक्सीजन मिलने की संभावना है और भविष्य के मिशन के लिए यह एक बहुत बड़ी खोज है।












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