एंटी इंडिया एजेंडा चला रहे मोहम्मज मुइज्जू भारत भेज रहे अपना सबसे बड़ा दूत, अब क्या चाहता है मालदीव?

Maldives FM Moosa Zameer India Visit: पिछले साल नवंबर में एक के बाद एक भारत विरोधी फैसला लेने वाले मोहम्मद मुइज्जू नवंबर में सत्ता संभालने वाले पहली बार अपने सबसे बड़े दूत को भारत के दौरे पर भेज रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 9 मई को मालदीव के विदेश मंत्री मूसा जमीर भारत की यात्रा कर सकते हैं।

पिछले साल नवंबर में सरकार का कार्यभार संभालने के बाद से मालदीव के विदेश मंत्री की भारत यात्रा, मुइज्जू सरकार के किसी वरिष्ठ अधिकारी की भारत की पहली उच्च स्तरीय यात्रा होगी। हालांकि, अभी तक का रिवाज यही रहा है, कि मालदीव में नई सरकार बनने के बाद देश के राष्ट्रपति पहली यात्रा भारत की करते हैं, लेकिन मोहम्मद मुइज्जू ने इस परंपरा को बदल दिया।

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मोहम्मद मुइज्जू अभी तक तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात और चीन की यात्रा कर चुके हैं, लेकिन उन्होंने अभी तक भारत यात्रा नहीं की है। पिछले दिनों आई एक रिपोर्ट में कहा गया था, कि मोहम्मद मुइज्जू ने भारत की यात्रा करने के लिए भारतीय विदेश मंत्रालय से संपर्क साधा था, लेकिन विदेश मंत्रालय की तरफ से उन्हें कोई तारीख नहीं दी गई। इसके पीछे, मोहम्मद मुइज्जू का एंटी-इंडिया एजेंडा को जिम्मेदार ठहराया गया है।

विदेश मंत्री भेजकर क्या साबित करना चाहते मुइज्जू?

वहीं, अब मालदीव के विदेश मंत्री की भारत यात्रा को लेकर संभावना जताई जा रही है, कि इस यात्रा के दौरान बातचीत से द्विपक्षीय संबंधों को फिर से स्थापित करने में महत्वपूर्ण बातचीत हो सकती है। विदेश मंत्री मूसा ज़मीर और भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर के बीच की बैठक से भविष्य की प्रतिबद्धताओं के लिए माहौल तैयार होने की उम्मीद है, और दोनों पक्ष, मालदीव में भारत की बुनियादी ढांचा विकास परियोजनाओं सहित कई मुद्दों पर एक साथ कैसे काम कर सकते हैं, इसको लेकर बातचीत हो सकती है।

हालांकि, अब इस बात की उम्मीद काफी कम है, कि मोहम्मद मुइज्जू के राष्ट्रपति रहते भारत और मावदीव के बीच के संबंध सामान्य हो सकते हैं, क्योंकि उन्होंने एक के बाद एक चीन के पक्ष में फैसले लिए हैं। जैसे मालदीव में चीन के जासूसी जहाज को आने की इजाजत देना, भारतीय सैनिकों को मालदीव से वापस भेजना, भारत के साथ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को खत्म करना और मुइज्जू के मंत्रियों की लगातार भारत के खिलाफ नफरती बयान जारी करना।

हालांकि, इसके बाद भी भारत ने लगातार मालदीव के लिए मानवीय सहायता जारी कर रहा है और मालदीव को उन आवश्यक वस्तुओं का निर्यात कर रहा है, जिन वस्तुओं के निर्यात पर भारत ने बैन लगा रखा है।

इससे पहले भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और मालदीव के विदेश मंत्री मूसा दोनों ने जनवरी में कंपाला में गुटनिरपेक्ष आंदोलन (एनएएम) शिखर सम्मेलन के मौके पर व्यक्तिगत रूप से बातचीत की थी। इस मुलाकात के दौरान भारतीय विदेश मंत्री ने भारत की 'पड़ोसी पहले' की नीति को दोहराया था और 2024-25 के लिए मालदीव को आवश्यक वस्तुओं के निर्यात का कोटा रिन्यू करने की बात कही थी।

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