मालदीव में कल होंगे राष्ट्रपति चुनाव, बढ़त में चीन समर्थित उम्मीदवार, क्या जीती बाजी हार रहा है भारत?
मालदीव हिंद महासागर में भारत के लक्ष्यद्वीप के नीचे 1200 द्वीपों का देश है जहां लगभग 200 द्वीपों पर इंसानों की बसावट है। जमीन के मामले में ये बिहार की राजधानी पटना से थोड़ा ही बड़ा देश है मगर आकार में छोटे से इस देश का हिंद माहासागर में बहुत अधिक रणनीतिक महत्व है।
यही वजह है कि भारत और चीन दोनों ही देश इस देश की राजनीति में बेहद अधिक दिलचस्पी लेते रहे हैं। मालदावी में 30 सितंबर यानी कि शनिवार को राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होने जा रहा है।

इस चुनाव में मुकाबला राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह और विपक्षी उम्मीदवार मोहम्मद मुइज्जू के बीच है। सोहिल को भारत समर्थक और मुइज्जू को चीन का विश्वासपात्र माना जाता है।
मालदीव में राष्ट्रपति बनने के लिए कम से कम 50 फीसदी वोट हासिल करना जरूरी है। दो सप्ताह हुए चुनाव के प्रथम चरण में कोई भी उम्मीद पचास फीसदी सीटें हासिल नहीं कर पाया था।
अब शनिवार को होने वाले चुनाव में सोहिल और मुइज्जू के बीच सीधी टक्कर होने जा रही है। निवर्तमान राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार हैं। उन्होंने 2018 के चुनाव में जीत दर्ज की थी। राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने भारत के साथ संबंधों को और मजबूत किया था।
हालांकि इस बार सोलिह को वह सफलता नहीं मिल पाई। पहले चरण में सोलिह को केवल 39 फीसदी वोट मिले थे। वहीं, मुख्य विपक्षी उम्मीदवार मोहम्मद मुइज ने 46 फीसदी से अधिक वोटों के साथ आश्चर्यजनक बढ़त हासिल की थी।
मुइज्जू भारत विरोधी भावनाओं को भड़काने के लिए जाने जाते हैं। दरअसल 2021 में मालदीव सेना ने स्वीकार किया था कि 75 भारतीय सैनिक उनके देश में काम कर रहे हैं।
इस बयान से मालदीव में भारतीय सैनिकों को बाहर करने की मांग ने जोर पकड़ लिया जिसमें विपक्ष ने आरोप लगाया था कि इससे मालदीव की सुरक्षा से समझौता हो रहा है।
चीन समर्थित पार्टियों ने इस मुद्दे को खूब भुनाया है। यह अब एक बड़ा मुद्दा बन गया है। मुइज बार-बार सोलिह पर आरोप लगा रहे हैं कि उन्होंने भारत को मालदीव में अनियंत्रित उपस्थिति की अनुमति दी है।
मुइज्जू ने सोलिह पर भारत के साथ अपने घनिष्ठ संबंधों के कारण मालदीव की राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने का आरोप लगाया है, हालांकि सोलिह इससे इनकार करते हैं।
पीपुल्स नेशनल कांग्रेस पार्टी के नेता अब्दुल्ला यामीन, 2013-2018 तक राष्ट्रपति थे। इसी दौर में मालदीव चीन की बेल्ट एंड रोड पहल का हिस्सा बना। अक्टूबर 2020 में पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के नेतृत्व में भारत विरोधी अभियान 'इंडिया आउट' शुरू हुआ था।
उन्होंने जनता के बीच भारत विरोधी भावनाओं को भड़काने का काम किया। विपक्षी गठबंधन को जब यह पता चला कि सत्ताधारी मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी 'इंडिया आउट' अभियान से मुकाबले के लिए संघर्ष कर रही है तो उसने अपनी आक्रामकता बढ़ा दी है।
यामीन पर मालदीव को चीन के कर्ज के जाल में फंसाने का आरोप है। फिलहाल वे अभी भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में हैं और मुइज्जू को यामीन का ही प्रॉक्सी उम्मीदवार माना जा रहा है।
सोलिह को देश में स्थिरता लाने और कोविड महामारी को कुशलता से संभालने का श्रेय दिया जाता है ऐसे में उन्हें इस बार राष्ट्रपति चुनाव में भारी समर्थन की उम्मीद थी।
सोलिह पर अपने प्रतिद्वंदी उम्मीदवार मुइज के उलट भ्रष्टाचार का भी कोई आरोप नहीं था। मुईज, यामीन सरकार में आवास मंत्री रह चुके हैं। इस दौरान उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। लेकिन फिर भी पलड़ा मुइज्जू का ही भारी नजर आ रहा है।
दरअसल मालदीव में कट्टर मुस्लिम की तादाद बहुत है। ये भारत विरोधी रुख के लिए जाने जाते हैं। मालदीव में सुन्नी मुस्लिम धार्मिक कट्टरपंथियों का समर्थन मुईज को प्राप्त है।
इनका प्रभाव देश में इतना अधिक है कि जब इस्लामिक स्टेट समूह अपने चरम पर था तब मालदीव ने प्रति व्यक्ति सबसे अधिक संख्या में लड़ाके भेजे थे।
इस चुनाव का विजेता यह निर्धारित कर सकता है कि कौन सी एशियाई शक्ति इस क्षेत्र में प्रभुत्व की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
मालदीव भारत और चीन के साथ-साथ पश्चिम के लिए भी महत्वपूर्ण रणनीतिक महत्व रखता है। यह खाड़ी से चीन की तेल आपूर्ति सहित आवश्यक पूर्व-पश्चिम कार्गो शिपिंग लाइनों के मार्ग पर है।
इसे हिंद महासागर पर बड़े भू-राजनीतिक प्रभाव और नियंत्रण के प्रवेश द्वार के रूप में भी देखा जाता है। चीन अपनी नौसेना को तेजी से बढ़ा रहा है। वह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस जगह पर अपनी पहुंच बनाना चाहता है। चीन यहां अपनी तेल आपूर्ति की सुरक्षा चाहता है, जो इसी रास्ते से होकर गुजरता है।
मालदीव लंबे समय तक भारत के प्रभाव में रहा है। मालदीव में मौजूदगी से भारत को हिंद महासागर के एक प्रमुख हिस्से पर नजर रखने की क्षमता मिल जाती है। ऐसे में भारत कभी नहीं चाहेगा कि यह देश चीन के प्रभाव में आए।
9 सिंतबर को हुए चुनाव के पहले चरण से पहले भारत समर्थक सोलिह सबसे फेवरेट उम्मीदवार थे। ऐसा माना जा रहा था कि वे 50 फीसदी मत हासिल कर लेंगे मगर वे भारी अंतर से पीछे रह गए।
चुनाव परिणामों बताते हैं कि मुइज्ज ने सोलिह की मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी में विभाजन का खूब फायदा उठाया है। दरअसल पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद पार्टी से अलग हो गए जिसके बाद उन्होंने चुनाव में अपना उम्मीदवार खड़ा किया।
नशीद के उम्मीदवार इलियास लबीब को 7 फीसदी वोट मिले हैं। अगर सोलिह प्रतिद्वंद्वी के साथ अंतर को कम करने के लिए छोटे दलों को अपने साथ लाने में कामयाब नहीं हो पाए तो वे ये आखिरी मुकाबला हार जाएंगे।












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