मालदीव से भारत के लिए अच्छी खबर.. शपथ ग्रहण में PM मोदी को बुलाएंगे चीन समर्थक नये राष्ट्रपति, समझें मायने

India-Maldives New President Oath Ceremony: मालदीव में माले के मेयर मोहम्मद मोइज्जू, जिन्होंने विपक्ष में रहने के दौरान 'इंडिया ऑउट' अभियान चलाया था, और जिन्हें चीन का समर्थक माना जाता है, वो अपने शपथ ग्रहण समारोह में भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को आमंत्रित कर सकते हैं। वहीं, मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने कहा है, कि मोहम्मद मोइज्जू, जिन्हें अंतर्राष्ट्रीय मीडिया चीन समर्थक कहकर संबोधित कर रहा है, वो इससे खुश नहीं हैं और वो भारत विरोधी नहीं हैं।

मालदीव के स्पीकर और पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद का कहना है, कि मालदीव के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति की ट्रांजिशन टीम अगले महीने माले में मोहम्मद मुइज्जू के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित करने की उम्मीद कर रही है।

maldives india relation

द हिंदू को दिए एक इंटरव्यू में, मोहम्मग नशीद, जिन्होंने निवर्तमान राष्ट्रपति इब्राहिम सोलिह और उनकी मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (एमडीपी) से अलग होकर अपनी नई पार्टी बनाई है, वो मालदीव की नई सरकार में शामिल हो सकते हैं और उन्होंने कहा है, कि वो मालदीव में नई सरकार के शपथ ग्रहण में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को न्योता भेजेंगे।

आपको बता दें, कि मालदीव में नई सरकार का शपथ ग्रहण 17 नवंबर को आयोजित होने वाला है।

मालदीव जाएंगे भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी?

भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी साल 2018 में मालदीव गये थे, जब इब्राहिम सोलिह ने राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी और उनके कार्यकाल के दौरान, भारत और मालदीव के बीच के संबंध काफी मजबूत हो गये।

मोहम्मद नशीद, जो मालदीव के राष्ट्रपति रह चुके हैं, उन्हें भी भारत समर्थक माना जाता था, और उनका नई सरकार में शामिल होना, निश्चित तौर पर भारत के लिए अच्छी खबर है। और उन्होंने इंटरव्यू के दौरान इस बात पर जोर दिया, कि मालदीव के नए राष्ट्रपति "भारत विरोधी" या "चीन समर्थक" नहीं होंगे, जैसा कि उन्हें अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में बताया गया है।

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2018 में मोहम्मद सोलिह के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लिया था, जो एक दुर्लभ इशारा था, जो उन्होंने अब तक पड़ोस में किसी अन्य नेता के लिए नहीं किया था।

चुने गये नये राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू, जो राजधानी माले के मेयर थे, उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव में "संप्रभुता" के मुद्दे पर प्रचार किया था। उन्होंने चीन समर्थक पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन सरकार (2013-18) में आवास मंत्री के तौर पर काम किया था, जब मालदीव में कई चीनी कंपनियों को आमंत्रित किया गया था और चीन ने मालदीव में कई इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के लिए कॉन्ट्रैक्ट हासिल की थी।

लिहाजा, इस बार जब मोहम्मद मोइज्जू राष्ट्रपति चुनाव जीते हैं, तो यह धारणा बनी है, कि उनकी सरकार भी चीन के पक्ष में और भारत के विरोध में फैसले ले सकती है। 2013 से 2018 के बीच अब्दुल्ला यामीन सरकार के फैसलों की वजह से भारत-मालदीव सरकार के बीच काफी तनाव बढ़ गया था। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है, कि वैश्विक राजनीति में अब भारत का कद जिस तरह से बढ़ता जा रहा है, उसे देखते हुए उम्मीद कम है, कि मालदीव भारत को अनदेखा कर सकता है।

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