'लिंक्डइन' से आतंकी कर रहे आतंकवाद के लिए लिंकअप
लंदन। लिंक्डइन, दुनिया की वह वेबसाइट जिसका प्रयोग दुनिया भर के प्रोफेशनल्स बेहतर कैरियर अपॉर्च्यूनिटीज के लिए प्रयोग करते हैं, उसी लिंक्डइन का प्रयोग अब आतंकी संगठन करने लगे हैं।

अब यह 'प्रोफेशनल सोशल नेटवर्किंग' 'टेररिज्म' की सोशल नेटवर्किंग के लिए प्रयोग होने लगी है। ब्रिटेन के लीडिंग डेली द टेलीग्राफ की एक रिपोर्ट के मुताबिक तालिबान का कमांडर, अहसानुल्लाह अहसान जिसने मलाल युसूफजई की हत्या कराने की कोशिश थी, वह इस समय लिंक्डइन पर सक्रिय है और इसके जरिए आतंकियों की भर्ती कर रहा है।
69 लोगों के संपर्क में अहसान
टेलीग्राफ ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि अहसान इस समय आतंकवादी संगठन जमात-उल-अहरार के प्रवक्ता के तौर पर काम कर रहा है और वह एक दो नहीं बल्कि पूरे 69 लोगों के साथ कांटेक्ट में है। ये सभी वे लोग हैं जिनका नेटवर्क काफी बड़ा है। टेलीग्राफ के मुताबिक अहसान बाकी आतंकियों के बजाय अपनी पहचान छिपा नहीं रहा है बल्कि खुलेआम अपने अकाउंट को आतंकी संगठन का प्रवक्ता घोषित कर रहा है।
अहसान ने अपने अकाउंट पर जेहाद और जर्नलिस्म का जिक्र किया है। लिंक्डइन पर उसने अपने स्कूल, इंप्लॉयटमेंट की डिटेल्स और भाषाओं से जुड़ी जानकारी मुहैया कराई है। अहसान को दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकी के तौर पर जाना जाता है।
अगस्त 2014 में जमात-उल-अहरार, तहरीक-ए-तानिबान (टीटीपी) से अलग हो गया था। टीटीपी 16 दिसंबर को पाकिस्तान के पेशावर में सैनिक स्कूल पर हुए भयावह हमले में भी शामिल थी, जिसमें 140 बच्चों सहित कुल 150 लोगों की हत्या कर दी गई थी।
10 लाख डॉलर का इनाम
पाकिस्तानी प्रशासन ने तालिबान द्वारा शांति के नोबेल से पुरस्कृत किशोरी मलाला यूसुफजई पर जानलेवा हमले के प्रयास की जिम्मेदारी लेने के बाद अहसान पर 10 लाख डॉलर का इनाम रखा था। मलाला पर हमले के बाद अहसान ने कहा था, वह (मलाला) पश्चिमी सभ्यता से प्रेरित थी।
वह तालिबान के खिलाफ बोल रही थी और उसने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को अपना आदर्श बताया। वह युवा थी, लेकिन वह पश्तून क्षेत्र में पश्चिमी संस्कृति को बढ़ावा दे रही थी। उस समय अहसान टीटीपी का प्रवक्ता था।
क्या है जमात-उल-अहरार
पिछले साल, अहसान ने टीटीपी के अन्य पूर्व कमांडरों के साथ मिल कर जमात-उल-अहरार की स्थापना की। जमात-उल-अहरार का ही एक अन्य नेता ओमर खालिद खोरासानी विश्व का सबसे निर्दयी आतंकवादी माना जाता है और निर्दयता की वजह से इसकी तुलना इस्लामिक स्टेट (आईएस) के नेता अबू बकर अल-बगदादी से की जाती है। लिंक्डइन पर अहसान की यह प्रोफाइल, साइट के लिए बेहद शर्म की बात है।
जेहाद और आतंक को बढ़ावा देने
के लिए फेसबुक और ट्विटर जैसी अन्य सोशल नेटवर्किग साइटों की भी आलोचना होती रही है। मीडिया रपटों के मुताबिक, पिछले साल नवंबर में भी जिहादियों ने ट्विटर पर अपने पास खतरनाक बम और परमाणु हथियारों के होने की बात कही थी।












Click it and Unblock the Notifications