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वीर्य में शुक्राणु कम होना 'मर्दानगी' से बड़ी समस्या

By Bbc Hindi
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    शुक्राणु
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    शुक्राणु

    पुरुषों के वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या में कमी का मतलब केवल उनकी प्रजनन क्षमता पर सवालिया निशान नहीं है बल्कि इससे पता चलता है कि कई अन्य तरह की भी स्वास्थ्य समस्याएं हैं.

    एक नई स्टडी से यह बात सामने आई है कि शुक्राणुओं की संख्या में गिरावट ये बताती है कि आपके शरीर में सबकुछ ठीक नहीं है.

    शुक्राणुओं की कम संख्या वाले 5,177 पुरुषों पर एक स्टडी की गई. स्टडी से पता चला कि इनमें से 20 फ़ीसदी लोग मोटापे, उच्च रक्त चाप और बीमार करने वाले कोलेस्ट्रॉल से ग्रसित थे.

    इसके साथ ही इनमें टेस्टोस्टेरोन हार्मोन की भी कमी थी. इस स्टडी का कहना है कि जिनके वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या कम है उन्हें स्वास्थ्य से जुड़ी अन्य समस्याओं की भी जांच करानी चाहिए.

    क्या है समस्या

    वीर्य में शुक्राणुओं की कमी या वीर्य की गुणवत्ता में गिरावट के कारण हर तीन में से एक जोड़ा मां-बाप बनने की समस्या से जूझ रहा है. इस नई स्टडी में डॉक्टरों ने इटली में तहक़ीक़ात की है जो पुरुष प्रजनन क्षमता से जूझ रहे हैं उनकी सामान्य स्वास्थ्य में भी समस्या है.

    स्टडी का कहना है कि जिन पुरुषों के वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या कम है वो मेटाबोलिक सिंड्रोम से जूझ रहे हैं. इनका वजन लंबाई के हिसाब से ज़्यादा होता है और इनमें हाई ब्लड प्रेशर की आशंका बनी रहती है.

    इनमें डायबीटीज, दिल की बीमारी और स्ट्रोक की भी आशंका प्रबल होती है.

    इसके साथ ही इनमें सामान्य से 12 गुना कम टेस्टोस्टेरोन हार्मोन होता है जो कि यौनेच्छा को जगाता है. इससे मांसपेशियों के कमज़ोर होने की भी आशंका रहती है और हड्डियां भी पतली होने लगती हैं.

    हड्ड़ियां कमज़ोर होने लगती हैं और चोट लगने पर टूटने की आशंका प्रबल हो जाती है.

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    यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रेसा में एन्डोक्रनॉलजी के प्रोफ़ेसर डॉ अल्बर्टो फर्लिन के नेतृत्व में ये स्टडी की गई है. उन्होंने कहा, ''प्रजनन क्षमता में गिरावट से जूझ रहे पुरुषों के लिए महत्वपूर्ण बात यह है कि वो इसके साथ कई और समस्याओं से जूझ रहे हैं. मसला केवल उनकी प्रजनन क्षमता का नहीं है बल्कि उनके जीवन का है. प्रजनन क्षमता का मूल्यांकन पुरुषों के लिए एक अच्छा मौक़ा होता है कि वो अपने शरीर की अन्य बीमारियों को भी पकड़ सकें.''

    हालांकि इस स्टडी के लेखक का कहना है कि वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या कम होना मेटाबोलिक समस्या का प्रमाण नहीं है लेकिन दोनों समस्याएं एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं.

    इस रिसर्च टीम का कहना है कि टेस्टोस्टेरोन में कमी का संबंध इन समस्याओं से सीधा है. डॉ फर्लिन का कहना है कि अगर कोई पुरुष अपनी प्रजनन क्षमता की जांच कराने जाता है तो उसे प्रॉपर हेल्थ जांच करानी चाहिए.

    उन्होंने कहा, ''जो पुरुष पिता नहीं बन पा रहे हैं उन्हें स्पर्म के साथ कई चीज़ों की जांच कराने की ज़रूरत है.'' कई विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा कम ही होता है कि जो स्पर्म की गुणवत्ता की समस्या से जूझ रहे हैं वो शायद ही शरीर की अन्य समस्याओं की जांच कराते हैं.

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    BBC Hindi
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    English summary
    Less sperm of semen is a problem of manhood

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