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बुशरा बीबी की सहेली पर पूछा सवाल तो भड़क गये इमरान खान के मंत्री.. पत्रकार ने कहा, फवाद चौधरी किराए...

पाकिस्तान के सूचना और प्रसारण मंत्री के साथ साथ देश का कानून मंत्रालय भी संभालने वाले इमरान खान के करीबी मंत्री फवाद चौधरी का एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है...

इस्लामाबाद, अप्रैल 06: पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता के बीच इमरान खान और उनके मंत्रियों ने अब पूरे देश को गद्दार कहना शुरू कर दिया है और इमरान खान के मंत्रियों ने खुले तौर पर पत्रकारों के साथ गाली-गलौच शुरू कर दी है। गैरकानूनी तरीके से देश की नेशनल असेंबली को भंग करने का आरोप झेल रहे इमरान खान ने एक तरफ देश के युवाओं को सड़कों पर उतरने और प्रदर्शन करने का आह्वान किया है, तो इमरान खान के मंत्री पत्रकारों को 'किराए का पत्रकार' कह रहे हैं और फिर दोनों में बहसबाजी शुरू हो जाती है।

हद से निकले फवाद चौधरी

हद से निकले फवाद चौधरी

पाकिस्तान के सूचना और प्रसारण मंत्री के साथ साथ देश का कानून मंत्रालय भी संभालने वाले इमरान खान के करीबी मंत्री फवाद चौधरी का एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है, जिसमें वो पत्रकारों से झगड़ रहे हैं और पत्रकारों को गाली दे रहे हैं। फवाद चौधरी का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार मुंशी मतिउल्लाह जान को "किराए का पत्रकार" कर रहे हैं। वहीं, फवाद चौधरी के मुहं से निकली गाली के बाद दोनों में काफी बहसबाजी होने लगती है। वहीं, पत्रकार मुंशी मतिउल्लाह जान ने चौधरी फवाद हुसैन को "किराय का टटट्" कहा है।

सरकार के गंभीर आलोचक हैं मुंशी मतिउल्लाह

सरकार के गंभीर आलोचक हैं मुंशी मतिउल्लाह

मुंशी मतिउल्लाह जान पाकिस्तान के काफी वरिष्ठ पत्रकारों में से एक हैं और वो इमरान खान सरकार की गंभीर आलोचना करने के लिए जाने जाते हैं, जिसकी वजह से वो अकसर इमरान खान और उनके मंत्रियों के निशाने पर रहते हैं। वहीं, ये घटना आज पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के बाहर की है, जब मंत्री फवाद चौधरी मीडिया को संबोधित कर रहे थे और पत्रकार मुंशी मतिउल्लाह भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल थे। इस दौरान पत्रकार मुंशी मतिउल्लाह ने बार-बार फवाद चौधरी से पूछा कि "अब आपको क्या कहना है, जब यह साबित हो गया है, कि कोई साजिश नहीं थी? आप सवाल से क्यों भाग रहे हैं।'' रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी पत्रकार बुशरा बीबी की सहेली पर सवाल पूछ रहे थे।

सवाल से बौखलाए फवाद चौधरी

मुंशी मतिउल्लाह जान के सवालों से इमरान खान के मंत्री बार बार बौखला रहे थे और वो उनकी तरफ ध्यान नहीं देकर अपनी बात कहने की कोशिश कर रहे थे। फवाद चौधरी को "मुझे बात करने दो। उसके बाद, हमारे सवाल जवाब हो सकते हैं।" कहते हुए सुना जा सकता है। यह घटना उस समय हुई जब पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के नेता और पूर्व योजना एवं विकास मंत्री असद उमर फवाद और अन्य के साथ मीडियाकर्मियों को संबोधित कर रहे थे। वहीं, बहस बढ़ने पर अन्य पत्रकारों ने हस्तक्षेप करने की कोशिश की और फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस में हंगामा शुरू हो गया।

इमरान खान का बहिष्कार

इमरान खान का बहिष्कार

रिपोर्ट के मुताबिक, इस हंगामे के बाद स्थिति इतनी बिगड़ गई है, कि इस्लामाबाद के पत्रकारों ने इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तबरीक-ए-इंसाफ का बहिष्कार करने का फैसला किया है, जबतक की इमरान खान के मंत्री फवाह चौधरी सार्वजनिक तौर पर पत्रकारों से माफी नहीं मांगते हैं। आपको बता दें कि, बहस का आधार यह था, कि पाकिस्तान की सेना की तरफ से कहा गया है कि, उनकी जांच में इस बात के सबूत नहीं मिले हैं, कि अमेरिका पाकिस्तान की सरकार को गिराने की साजिश कर रहा था। सेना ने कहा कि, जो चिट्ठी इमरान खान लोगों के बीच लेकर आए हैं, उसे पाकिस्तान के ही राजदूत ने तैयार किया था और हर देश के राजदूत आपसी बातचीत का ऐसा नोट तैयार करते हैं और ये बातचीत कोई आधिकारिक भी नहीं थी।

सुप्रीम कोर्ट में मामला

सुप्रीम कोर्ट में मामला

वहीं, पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश उमर अता बंदियाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट नेशनल असेंबली के डिप्टी स्पीकर कासिम सूरी द्वारा प्रधान मंत्री इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को बाधित करने के "असंवैधानिक" फैसले पर मामले को आज ही खत्म करना चाहता है। सुप्रीम कोर्ट में आज तीसरे दिन भी इस मामले पर सुनवाई की जा रही है। पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने संवैधानिक संकट का स्वत: संज्ञान लिया था, जो सूरी द्वारा प्रस्ताव पर मतदान को अस्वीकार करने के बाद उत्पन्न हुआ था।

जनता ने कहा- साजिश नहीं

जनता ने कहा- साजिश नहीं

वहीं, गैलप पाकिस्तान सर्वेक्षण में पाया गया है कि लगभग 64% पाकिस्तानियों को लगता है कि उच्च मुद्रास्फीति और सरकार की विफलता के कारण हैं, ना कि अमेरिका ने इमरान खान के खिलाफ कोई साजिश की है। इस बीच, 36% पाकिस्तानियों का मानना है कि पीटीआई सरकार को गिराने के लिए विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव के पीछे अमेरिकी साजिश है। गैलप सर्वे को 3-4 अप्रैल, 2022 तक 800 परिवारों की राय मांगी।

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