Khamenei Death: खामेनेई का खूनी इतिहास, वो बड़े कत्ल जिनके दाग कभी नहीं धुलेंगे, अपनी जनता के लिए बने विलेन
Khamenei Political Assassinations: ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई का शासनकाल विवादों और विरोधियों के दमन के आरोपों से भरा रहा है। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपनी सत्ता को चुनौती देने वाले हर प्रभावशाली व्यक्ति को रास्ते से हटाने के लिए खुफिया एजेंसियों का इस्तेमाल किया। चाहे वो देश के भीतर के बुद्धिजीवी हों या विदेशों में बैठे विपक्षी नेता, खामेनेई के आदेश पर 'खामोश' कर दिए गए।
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और कई देशों की अदालतों ने इन हत्याओं के तार सीधे तौर पर खामेनेई और उनके करीबियों से जोड़े हैं। जनता के बीच इन घटनाओं ने शासन के प्रति गहरा अविश्वास पैदा किया, जिससे लोग अपनी ही सरकार के खिलाफ खड़े हो गए।

Dark History of Ali Khamenei: सादिक शराफ़कंडी (माइकोनोस हत्याकांड)
1992 में बर्लिन के एक रेस्तरां में कुर्द नेता सादिक शराफ़कंडी की उनके साथियों के साथ हत्या कर दी गई थी। इस मामले में जर्मनी की अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा था कि हत्या की साजिश ईरान के शीर्ष नेतृत्व ने रची थी। जांच में पाया गया कि खामेनेई की अध्यक्षता वाली एक विशेष समिति ने ही इस हमले को हरी झंडी दी थी। इस घटना ने दुनिया को दिखा दिया कि खामेनेई का शासन विदेश में भी विरोधियों का पीछा करता है।
Khamenei Death: शापुर बख्तियार (पूर्व प्रधानमंत्री)
ईरान के आखिरी प्रधानमंत्री शापुर बख्तियार, जो पेरिस में निर्वासित जीवन बिता रहे थे, की 1991 में बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। फ्रांसीसी पुलिस की जांच में साफ हुआ कि हत्यारे ईरानी खुफिया एजेंट थे। बख्तियार को खामेनेई की कट्टरपंथी व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक खतरा माना जाता था। उनकी हत्या से यह संदेश गया कि जो कोई भी ईरान के बाहर से लोकतंत्र की आवाज उठाएगा, वह सुरक्षित नहीं रहेगा।
ये भी पढे़ं: Khamenei Death Reason: अपनों की गद्दारी, CIA-मोसाद का जाल, रक्षा विशेषज्ञों से जानिए कैसे खामेनेई का हुआ अंत
Iran Israel War: दरियुश फ़ोरुहार और उनकी पत्नी
ईरान के भीतर 'चेन मर्डर्स' (क्रमवार हत्याएं) का दौर सबसे खौफनाक था। 1998 में विपक्षी नेता दरियुश फ़ोरुहार और उनकी पत्नी परवानेह की उनके घर में ही चाकू मारकर हत्या कर दी गई। इन हत्याओं का आरोप सीधे तौर पर ईरान के खुफिया मंत्रालय पर लगा। बाद में सरकार को यह मानना पड़ा कि उनके ही अधिकारियों ने इन हत्याओं को अंजाम दिया था, जिन्हें खामेनेई के कट्टरपंथी विचारों का कट्टर समर्थक माना जाता था।
सलमान रुश्दी (मौत का फतवा)
लेखक सलमान रुश्दी पर यद्यपि सीधे हमले के आरोप बाद के हैं, लेकिन उनके खिलाफ मौत का फतवा खामेनेई ने ही जारी रखा और मजबूत किया। उन्होंने बार-बार कहा कि रुश्दी को मारना हर मुसलमान का कर्तव्य है। इस उकसावे के कारण रुश्दी और उनके प्रकाशकों पर कई जानलेवा हमले हुए। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे एक देश के प्रमुख द्वारा दूसरे देश के नागरिक की 'सुपारी' देने जैसा माना गया, जिससे खामेनेई की छवि और खराब हुई।
ये भी पढे़ं: Khamenei killing Story: खामेनेई की लोकेशन लीक कैसे हुई? किसने दिया पता? War Tech का खेल जान हैरान हो जाएंगे
अब्दुलरहमान कासेमलो
ईरानी कुर्द नेता कासेमलो की 1989 में वियना (ऑस्ट्रिया) में उस समय हत्या कर दी गई, जब वे ईरानी सरकार के प्रतिनिधियों के साथ शांति वार्ता करने आए थे। यह एक बड़ा धोखा माना गया क्योंकि सरकार ने उन्हें बातचीत के बहाने बुलाया और फिर मार डाला। जांच में हत्यारों के संबंध खामेनेई के सुरक्षा घेरे से पाए गए। इस घटना ने साबित किया कि खामेनेई शासन कूटनीति का इस्तेमाल भी हत्याओं के लिए कर सकता है।
फ़ेरेदुन फ़रोख़ज़ाद (मशहूर गायक)
ईरान के सबसे लोकप्रिय गायकों और टीवी एंकर्स में से एक फ़ेरेदुन फ़रोख़ज़ाद की 1992 में जर्मनी में हत्या कर दी गई थी। वे अपने शो में खामेनेई और उनकी कट्टरपंथी व्यवस्था का खुलकर मजाक उड़ाते थे। उनकी बेरहमी से हत्या (शव के टुकड़े करना) ने ईरानी प्रवासियों में दहशत फैला दी। उनके समर्थकों का मानना है कि उनकी बढ़ती लोकप्रियता और बेबाक जुबान से डरकर खामेनेई के इशारे पर उन्हें खत्म किया गया।
ये भी पढे़ं: Iran Israel War 2026: ईरान अंंत के करीब? अमेरिका-इजराइल के साथ आया ये तीन यूरोपीय देश
World News Hindi: विरोध प्रदर्शन करने वाले को फांसी
खामेनेई शासन ने विरोध की हर लहर को 'विदेशी साजिश' बताकर कुचला है। 2019 और 2022 के बड़े आंदोलनों के बाद, हाल के वर्षों (2025-26) में भी जब जनता महंगाई और तानाशाही के खिलाफ सड़कों पर उतरी, तो सुरक्षा बलों (IRGC और बासिज) ने सीधे प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाईं। हजारों मौतों के अलावा, शासन ने 'न्यायिक हत्याओं' (Judicial Killings) का सहारा लिया। इतना ही नहीं, ईरान दुनिया में प्रति व्यक्ति सबसे ज्यादा फांसी देने वाला देश बन गया है। विरोध की आवाज उठाने वाले युवाओं और कार्यकर्ताओं को 'ईश्वर के खिलाफ युद्ध' जैसे आरोपों में सरेआम फांसी दी गई, ताकि जनता के बीच डर पैदा किया जा सके।
-
Iran America War: ईरान की वो मिसाइलें जिसकी मार ने ट्रंप को कराया सरेंडर! दुबई-कतर, सऊदी में मचाया हाहाकार -
Petrol Diesel Price Hike: पेट्रोल ₹5.30 और डीजल ₹3 महंगा, ईरान जंग के बीच इस कंपनी ने बढ़ाई कीमतें, ये है रेट -
'पाकिस्तान जैसा दलाल नहीं है भारत', अमेरिका-ईरान मध्यस्थता पर विपक्ष को जयशंकर का करारा जवाब -
Iran Oil Offer to India: तेल संकट के बीच ईरान का भारत को बड़ा ऑफर! लेकिन चौंकाने वाली है तेहरान की नई शर्त -
Iran Israel War: क्या 9 अप्रैल को खत्म हो जाएगा ईरान-इजरायल युद्ध? ट्रंप के दावे का क्या है मतलब? -
LPG Crisis India: रसोई गैस की किल्लत होगी खत्म! कई साल बाद भारत ने ईरान से खरीदा एलपीजी, कब पहुंचेगा भारत? -
Iran Vs America War: परमाणु ठिकाने, हॉर्मुज की नाकेबंदी और सम्मान की जंग! ईरान क्यों नहीं चाहता युद्ध खत्म हो? -
Iran Vs America: खत्म होने वाला है ईरान-इजराइल युद्ध! ट्रंप के बाद अब मोजतबा खामेनेई भी बातचीत के लिए तैयार -
Iran America War: ईरानी राजदूत से विदेश मंत्री जयशंकर ने की मुलाकात, क्या हुई सीक्रेट बात? -
US Secretary India Visit: युद्ध के बीच 'ट्रंप के वॉर मिनिस्टर' का अचानक भारत दौरा, किन मुद्दों पर चर्चा -
US Iran War को लेकर भारत ने कसी कमर, राजनाथ सिंह ने बुलाई हाई लेवल मीटिंग, CDS समेत तीनों सेनाओं के चीफ पहुंचे -
Trump PM Modi Talks: 'होर्मुज' तेल के रास्ते पर ट्रंप ने PM मोदी से क्या-क्या कहा? US-Iran तनाव के बीच मंथन












Click it and Unblock the Notifications