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Iran Israel War 2026: ईरान अंंत के करीब? अमेरिका-इजराइल के साथ आया ये तीन यूरोपीय देश

Iran Israel War 2026: मध्य पूर्व के रणक्षेत्र में ईरान अब अस्तित्व की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रहा है। अमेरिका और इजरायल के घातक हमलों के बाद, ईरान का 'प्रतिरोध का अक्ष' (Axis of Resistance) बिखरता दिख रहा है। सबसे बड़ा झटका तब लगा जब ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने एक संयुक्त बयान जारी कर न केवल ईरान के पलटवार की निंदा की, बल्कि उसकी मिसाइल और ड्रोन क्षमता को 'स्रोत' (Source) पर ही नष्ट करने के लिए सैन्य कार्रवाई का ऐलान कर दिया।

जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज, ब्रिटिश पीएम कीर स्टारमर और फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों की यह एकजुटता ईरान को यूरोप से पूरी तरह काट चुकी है। खाड़ी देशों के साथ पश्चिमी ताकतों का यह अभूतपूर्व समन्वय संकेत दे रहा है कि दशकों पुराना 'इस्लामिक रिपब्लिक' शासन अब टूटने के कगार पर है।

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UK France Germany Joint Statement: तीन यूरोपीय देशों का कड़ा रुख

ईरान के खिलाफ अब केवल इजरायल और अमेरिका ही नहीं, बल्कि यूरोप की तीन सबसे बड़ी सैन्य शक्तियां भी मैदान में हैं।

ब्रिटेन (UK): प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने ईरान के मिसाइल ठिकानों को नष्ट करने के लिए ब्रिटिश सैन्य अड्डों के इस्तेमाल की अनुमति दे दी है।

जर्मनी: चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने स्पष्ट कहा है कि वे ईरानी शासन के अंत को लेकर अमेरिका और इजरायल के साथ हैं, क्योंकि कूटनीति अब विफल हो चुकी है।

फ्रांस: राष्ट्रपति मैक्रों ने अपनी नौसेना को हाई अलर्ट पर रखा है और संयुक्त कार्रवाई के लिए सहमति जताई है।

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Middle East Crisis: खाड़ी देशों की घेराबंदी और 'अरब ब्लॉक'

सऊदी अरब, यूएई, बहरीन और कतर जैसे खाड़ी देशों का अमेरिका के साथ खड़ा होना ईरान के 'क्षेत्रीय दबदबे' के अंत का संकेत है। इन देशों ने ईरान के मिसाइल हमलों की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे 'लापरवाह और विनाशकारी' बताया है। अरब जगत का यह एकजुट विरोध ईरान के उस नैरेटिव को ध्वस्त करता है, जिसमें वह खुद को मुस्लिम हितों का रक्षक बताता था। अब ईरान अपने ही पड़ोसियों के बीच घिरा हुआ है।

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Russia China Iran Support: केवल शब्दों की हमदर्दी?

ईरान के सबसे बड़े सहयोगियों, रूस और चीन ने हालांकि सर्वोच्च नेता खामेनेई पर हमले को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है, लेकिन उनकी मदद केवल बयानों तक सीमित दिख रही है। व्लादीमिर पुतिन और शी जिनपिंग ने सैन्य भागीदारी के बजाय 'कूटनीतिक निंदा' का रास्ता चुना है। बिना सक्रिय सैन्य सहायता के ईरान के लिए अमेरिका, इजरायल और यूरोप के संयुक्त आधुनिक हथियारों और तकनीक का मुकाबला करना लगभग नामुमकिन होता जा रहा है।

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Iran Isolation: ईरान के 'प्रॉक्सिस' की गिरती दीवार

ईरान की सबसे बड़ी ताकत उसके सहयोगी संगठन जैसे हिजबुल्लाह और हूती माने जाते थे, जो इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर हमले कर रहे हैं। लेकिन पश्चिमी देशों के आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम और सटीक हमलों ने इन संगठनों को काफी कमजोर कर दिया है। तकनीकी और सैन्य संसाधनों के मामले में ये संगठन अब बेअसर साबित हो रहे हैं। सहयोगियों के कमजोर पड़ने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अकेले होने से ईरान के टूटने का खतरा बढ़ गया है।

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