मोदी सरकार के खिलाफ कनाडा-UK का 'खालिस्तान कार्ड', भारतीय दूतावासों को खालिस्तानियों ने किया वारजोन घोषित
Khalistani Portest: खालिस्तानियों ने अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा में भारतीय दूतावासों को युद्ध का मैदान घोषित कर दिया है, जिसके बाद भारतीय दूतावासों की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। कनाडा, ब्रिडेन और अमेरिका में खालिस्तानियों ने पैसे जुटाने और अपने लिए समर्थन जुटाने के लिए आज रैली का आयोजन किया है।
जिसको देखते हुए अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा में भारतीय राजनयिक परिसरों की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। खालिस्तान समर्थकों ने 'किल इंडिया' नाम से रैलियों का आयोजन किया है। खालिस्तानियों का आरोप है, कि हरदीप सिंह निज्जर की मौत के पीछे भारत का हाथ है और खालिस्तानियों ने भारत को अंजाम भुगतने की धमकी दी है।

क्या पन्नु भी रहेगा प्रदर्शन में मौजूद?
भारत की तरफ से आतंकवादी घोषित किए गये आतंकी जीएस पन्नू, जिसकी पिछले दिनों अमेरिका में मारे जाने की रिपोर्ट आई थी, उसे कनाडा के टोरंटो में देखे जाने की खबर है। हालांकि, इस खबर की अभी तक पुष्टि नहीं हो पाई है। जीएस पन्नू, एसएफजे आतंकी संगठन का संयोजक है।
कनाडा, अमेरिका और ब्रिटेन में भारतीय राजनयिकों को कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने पूर्ण सुरक्षा दी है। हालांकि, कनाडा की लीडरशिप अभी भी खालिस्तानियों के प्रदर्शन को अभिव्यक्ति की आजादी ठहराने में जुटा हुआ है।
ये विडंबना ही है, कि एक तरह जहां भारतीय राजनयिकों पर खतरा देखते हुए उन्हें पूर्ण सुरक्षा दी गई है, वहीं खालिस्तानियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। चरमपंथी खालिस्तानी नेता खुलेआम रैलियों का आयोजन कर रहे हैं, जिसमें भारत और हिन्दू विरोधी नारे लगाए जा रहे हैं। वहीं, खालिस्तानियों की तरफ से कुछ भारतीय राजनयिकों के नाम और उनके फोन नंबर भी जारी किए हैं और उन्हें लगातार धमकियां दी जा रही हैं।
ग्रेटर टोरंटो एरिया में खालिस्तान समर्थक पोस्टर में भारतीय दूतावासों को वारजोन घोषित किया गया है।
खराब हो सकते हैं भारत-कनाडा संबंध
कनाडा, ब्रिटेन और अमेरिका में भारतीय दूतावासों को उस वक्त सुरक्षा दी गई है, जब मोदी सरकार ने साफ शब्दों में चेतावनी दी थी, कि अगर इंडियन डिप्लोमेट्स को निशाना बनाया जाता है, तो भारत के साथ उनके संबंध खराब हो जाएंगे।
वहीं, खुफिया और घरेलू सुरक्षा चैनलों के जरिए, भारत पहले ही आतंकवादी पन्नू का मामला अमेरिका, कनाडाई और यूके सरकारों के साथ उठा चुका है। भारतीय खुफिया विभाग का मानना है, कि पन्नू को इन देशों की आंतरिक सुरक्षा एजेंसियों से संरक्षण मिलता है, ताकि खालिस्तान मुद्दे को भारत के खिलाफ एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहे।
इस मुद्दे को उनके भारतीय समकक्षों के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल द्वारा सीआईए, एफबीआई, सीएसआईएस और एमआई-5 खुफिया एजेंसियों के समक्ष पूरी गंभीरता से उठाया गया है।
टोरंटो में सिख कट्टरपंथियों के ताजा पोस्टर में कनाडा में भारतीय राजनयिक परिसरों को युद्ध क्षेत्र घोषित किया गया है, लेकिन इन चरमपंथियों का असली इरादा सिख युवाओं को भारतीय संस्कृति से तोड़कर उन्हें भी कट्टरपंथी बनाना और उन्हें भारत की गौरवशाली परंपराओं से दूर करना है।
हालांकि, अमेरिका ने अब सिख कट्टरपंथियों के खतरे को समझा है और बाइडेन प्रशासन की तरफ से अलग अलग लेवल पर खालिस्तानियों के खिलाफ सख्त बयान दिए गये हैं, लेकिन ब्रिटेन और कनाडा की सरकारें वोट बैंक के लिए खालिस्तान शब्द बोलने से भी डरती हैं। वहीं, खालिस्तान को पाकिस्तान से भी समर्थन मिलता है।
कनाडा-ब्रिटेन क्यों करते हैं समर्थन?
ब्रिटेन और कनाडा के साथ समस्या यह है, कि वे नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल में भारत के उदय से काफी परेशान हैं और भारत के विकास को पचा नहीं पो रहे हैं।
ब्रिटेन, जिसके मन से अभी भी गुलामवादी मानसिकता नहीं गई है, वो अभी भी पाकिस्तान कार्ड खेलता है, जबकि अब ब्रिटेन खुद चरपंथी मुस्लिमों का निशाना बनने लहा है, लेकिन अभी भी अफगानिस्तान में पाकिस्तान का समर्थन कर रहा है और बांग्लादेश में उदारवादी शेख हसीना सरकार का विरोध करता है, जो भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा योजनाकारों के लिए काफी निराशाजनक है।
बांग्लादेश की सरकार भारत के काफी करीब है, जो ब्रिटेन को नापसंद है। ब्रिटेन चाहता है, कि खालिदा जिया की सरकार बांग्लादेश में आए और ब्रिटेन के कहने पर ही, अमेरिका भी शेख हसीना सरकार का विरोध करता है।
वहीं, भारत को अशांत करने के लिए ब्रिटेन और कनाडा खालिस्तान नाम का कार्ड खेलता है, लेकिन कनाडा और ब्रिटेन ये नहीं जानते हैं, कि आतंकवाद का समर्थन करने वाले पाकिस्तान का क्या हाल हुआ है और खुद पाकिस्तान आज आतंकवाद से कितना परेशान हो रहा है। सिख कट्टरपंथी भले ही भले ही भारत के खिलाफ हों, लेकिन उनका कट्टरपंथ ब्रिटेन और कनाडा की धरती पर ही हो रहा है, इसीलिए आने वाले वक्त में नुकसान भी इन्हीं देशों का होगा।
वहीं, कनाडा और ब्रिटेन को सिख कट्टरपंथी कार्ड खेलने की इजाजत मोदी सरकार कभी नहीं देगी, इस बात को भी कनाडा और ब्रिटेन को लिखकर रख लेना चाहिए। जो मोदी सरकार, रूसी तेल खरीदने को लेकर अमेरिका के सामने टस से मस नहीं हुआ, वो खालिस्तान कार्ड से बैकफुट पर आ जाएगी, कनाडा और ब्रिटेन को ये खयाल भी अपने दिमाग से निकाल लेना चाहिए।












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