'कनाडा से खालिस्तान समर्थक कर रहे हैं भारत विरोधी गतिविधियां', Canada की खुफिया एजेंसी ने किया स्वीकार

PM Modi Canada: पीएम मोदी के कनाडा के दौरे के बीच कनाडा की प्रमुख खुफिया एजेंसी, कैनेडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस (CSIS) ने पहली बार अपनी वार्षिक रिपोर्ट में आधिकारिक तौर पर यह स्वीकार किया है कि खालिस्तानी उग्रवादी कनाडा की धरती का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों के लिए कर रहे हैं। इसमें विचारधारा के प्रचार से लेकर, फंडिंग और भारत में हिंसक हमलों की योजना तक शामिल है।

बुधवार को जारी की गई रिपोर्ट में CSIS ने साफ तौर पर कहा, खालिस्तानी उग्रवादी कनाडा का उपयोग मुख्य रूप से भारत में हिंसा के प्रचार, धन संग्रह और योजना बनाने के लिए एक आधार के रूप में कर रहे हैं। एक छोटा समूह खालिस्तानी उग्रवादी माना जाता है क्योंकि वे कनाडा का इस्तेमाल भारत में हिंसा के प्रचार, धन जुटाने या योजना बनाने के लिए करते हैं। विशेष रूप से, कनाडा से उभरता या समझा जाने वाला खालिस्तानी उग्रवाद भारत में विदेशी दखलअंदाजी की गतिविधियों को बढ़ावा देता है।

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मोदी-कार्नी बैठक के एक दिन बाद खुलासा

यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके कनाडाई समकक्ष मार्क कार्नी की मुलाकात अल्बर्टा के कैननास्किस में आयोजित G7 नेताओं के सम्मेलन के दौरान हुई। इस मुलाकात में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों में स्थिरता बहाल करने हेतु चरणबद्ध और संतुलित प्रयासों पर सहमति जताई तथा एक-दूसरे की राजधानियों में उच्चायुक्तों की पुनर्नियुक्ति की घोषणा की। कनाडाई प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, दोनों देशों ने नागरिकों और व्यवसायों के लिए नियमित वाणिज्यिक और कांसुलर सेवाओं को बहाल करने पर भी चर्चा की, जिससे हाल के तनावपूर्ण कूटनीतिक संबंधों को सामान्य करने की दिशा में ठोस प्रगति हो सके।

जस्टिन ट्रूडो ने भारत पर लगाया था गंभीर आरोप

कनाडा की खुफिया एजेंसी CSIS की रिपोर्ट ने साफ किया है कि, न सिर्फ विदेशी ताकतें कनाडा की नीतियों को अपने हिसाब से बदलवाने की कोशिश कर रही हैं, बल्कि देश के अंदर कुछ उग्रवादी नेटवर्क भी एक्टिव हैं जो फंडिंग और दूसरी गतिविधियों के ज़रिए माहौल को प्रभावित कर रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन सबका मकसद ये है कि कनाडा की नीतियां भारत के हितों से मेल खाएं खासकर खालिस्तान समर्थकों को लेकर भारत सरकार जैसा सोचती है, उसी तरह कनाडा भी सोचे। इस रिपोर्ट के सामने आने से एक बार फिर कनाडा में विदेशी हस्तक्षेप और उग्रवादी गतिविधियों का मुद्दा चर्चा में आ गया है।

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निझार कांड पर भारत-कनाडा में फिर तल्खी

साल 2023 में, तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा था कि उनकी सरकार के पास ऐसे विश्वसनीय आरोप हैं, जिनमें भारतीय एजेंटों को खालिस्तानी आतंकवादी घोषित किए गए हरदीप सिंह निझार की हत्या से जोड़ा गया है। निझार की 18 जून 2023 को ब्रिटिश कोलंबिया के सरे शहर में एक गुरुद्वारे के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें बेबुनियाद और राजनीति से प्रेरित बताया था। साथ ही भारत ने कनाडा पर यह आरोप भी लगाया कि वह कट्टरपंथी और भारत विरोधी समूहों को बिना किसी रोक-टोक के पनपने दे रहा है। इस कूटनीतिक तनाव के चलते भारत ने कनाडा से अपने छह राजनयिकों को वापस बुला लिया, जिन्हें निझार हत्या मामले की जांच में दिलचस्पी रखने वाले व्यक्ति करार दिया गया था।

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