Canada Election Result: कनाडा में बजा भारतीयों का डंका, पंजाब से जुड़े कई चेहरे पहुंचे संसद, देखें लिस्ट
Canada election results: कनाडा में हाल ही में हुए आम चुनावों में भारतीय मूल के उम्मीदवारों ने शानदार प्रदर्शन किया है। भले ही न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी (एनडीपी) के नेता जगमीत सिंह को बर्नाबी सेंट्रल सीट से करारी हार झेलनी पड़ी हो लेकिन इस बार लगभग 75 भारतीय मूल के उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतरे थे, जिनमें से करीब 23 को जीत हासिल हुई है। यह संख्या 2021 में चुने गए 19 भारतीय मूल के सांसदों की तुलना में एक बड़ी वृद्धि मानी जा रही है।

बता दें कि जस्टिन ट्रुडो के इस्तेफे के बाद कनाडा की राजनीति में काफी बदलाव देखने को मिला है। मार्च में मार्क कार्नी ने पीएम पद की शपथ ली लेकिन एक नाटकीय घटनाक्रम में कनाडा में आम चुनाव की घोषणा हुई। इसके बाद वहां पर 28 अप्रैल को चुनाव हुआ और 29 अप्रैल को इसका परिणाम घोषित हुआ।
सुख धालीवाल की छठी बार शानदार जीत
लिबरल पार्टी के सुख धालीवाल रिकॉर्ड छठी बार सांसद चुने गए हैं। पंजाब में जन्मे 65 वर्षीय इंजीनियर और लैंड सर्वेयर रह चुके धालीवाल ने 2006 में न्यूटन-नॉर्थ डेल्टा से शुरुआत की थी। वह 2011, 2015, 2019 और 2021 में भी जीत चुके हैं। जनता के लिए हमेशा सुलभ रहने वाले धालीवाल को इस बार कड़ा मुकाबला हरजीत सिंह गिल से मिला, जो एक प्रसिद्ध रेडियो ब्रॉडकास्टर हैं।
रंदीप सराय और परम बैंस ने दोहराई जीत
लिबरल रंदीप सराय सरे सेंट्रल से खड़े थे। पेशे से एक वकील और उद्यमी रंदीप ने भी अपनी सीट बरकरार रखी है। सरे क्षेत्र में दक्षिण एशियाई आबादी की बहुलता है और रंदीप 2015 से इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
परम बैंस लिबरल पार्टी से हैं जो महिलपुर के जाट सिख परिवार से आते हैं। उन्होंने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की है। मीडिया और पीआर पृष्ठभूमि से आने वाले बैंस पहले क्वांटलन पॉलिटेक्निक यूनिवर्सिटी में शिक्षक थे।
गुरबक्स सैनी की सफलता
गुरबक्स सैनी (लिबरल, फ्लीटवुड-पोर्ट केल्स) ने पहली बार जीत दर्ज की। वह 1970 में केवल $8 लेकर पंजाब से कनाडा आए थे। एक समय लकड़ी मिल में काम करने वाले सैनी ने बाद में प्लांट मैनेजर और सात बार के सिटी काउंसलर तक का सफर तय किया।
सबसे युवा सांसद: सुखमन सिंह गिल
कंजरवेटिव पार्टी के 25 वर्षीय सुखमन सिंह गिल, ऐबट्सफोर्ड-साउथ लैंगली से सबसे युवा सांसद बने हैं। पंजाब के मोगा जिले के बुकरावाला गांव से ताल्लुक रखने वाले गिल ने मजबूत स्वतंत्र उम्मीदवार माइक डि जोंग को हराया।
इतिहास रचने वाले इंडी पंची
इंडी पंची (कंजरवेटिव, न्यू वेस्टमिंस्टर-बर्नाबी-मायलार्डविले) इस क्षेत्र से चुने जाने वाले पहले भारतीय मूल के सांसद बने हैं। उन्होंने हाउसिंग अफोर्डेबिलिटी और स्थानीय मुद्दों को केंद्र में रखकर मतदाताओं को प्रभावित किया।
अल्बर्टा में भी भारतीयों का दबदबा
जसराज सिंह हलन (कंजरवेटिव, कैलगरी ईस्ट) ने अपनी सीट बनाए रखी। दुबई में जन्मे हलन 2019 में सांसद बने थे और अब एक प्रभावशाली कंजरवेटिव आवाज बन चुके हैं।
दलविंदर गिल (कंजरवेटिव, कैलगरी मैकनाइट) ने 21 साल की रियल एस्टेट की पृष्ठभूमि के साथ पहली बार चुनाव जीता, जहां सोशल मीडिया प्रचार ने अहम भूमिका निभाई।
अमनप्रीत सिंह गिल (कंजरवेटिव, कैलगरी स्काईव्यू) ने अपने गुरुद्वारे से जुड़े विवादों के बावजूद जीत हासिल की।
टिम उप्पल (कंजरवेटिव, एडमॉन्टन मिल वुड्स) 2008 से लगातार सांसद हैं और लोकतांत्रिक सुधार एवं बहुसंस्कृति जैसे मंत्रालयों में कार्य कर चुके हैं।
Canada election results: क्यूबेक और ओंटारियो में भी मिली बड़ी कामयाबी
अंजू ढिल्लों (लिबरल, क्यूबेक) 2015 में चुनी गईं पहली दक्षिण एशियाई महिला हैं। राजनीति विज्ञान और कानून की पढ़ाई करने वाली अंजू महिला सशक्तिकरण से जुड़े कई मंत्रालयों में सेवाएं दे चुकी हैं।
रूबी सहोता (लिबरल, ब्रैम्पटन नॉर्थ), जो 2024-2025 में लोकतांत्रिक संस्थानों की मंत्री रहीं, ने अपनी सीट बचाई। वह 2015 में पहली बार सांसद बनी थीं।
इकविंदर गहीर (लिबरल, मिसीसॉगा-मालटन), जो 2021 में सबसे युवा सांसद थे और हार्वर्ड में पढ़ चुके हैं, ने कठिन मुकाबले के बावजूद सीट बरकरार रखी।
मनिंदर सिद्धू (लिबरल), एक सफल उद्यमी और समाजसेवी हैं उन्होंने 2019 में पहली बार जीत दर्ज की थी और अब ब्रैम्पटन ईस्ट से दोबारा चुने गए।
सोनिया सिद्धू (लिबरल, ब्रैम्पटन साउथ), जो एक पूर्व डायबिटीज एजुकेटर हैं, 2015 से सांसद हैं और महिला अधिकारों और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर लगातार आवाज उठाती रही हैं।












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