Kartik Murder Case: कौन था गाजियाबाद का कार्तिक? जिसके हत्यारे को कनाड की कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा

Kartik Vasudev Murder Case: कार्तिक वासुदेव हत्याकांड में कनाडा की एक अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है। गाजियाबाद के रहने वाले 21 वर्षीय कार्तिक की 2022 में टोरंटो के एक मेट्रो स्टेशन के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। चार साल के लंबे इंतजार के बाद, अदालत ने आरोपी रिचर्ड एडविन की मानसिक बीमारी की दलीलों को खारिज करते हुए उसे उम्रकैद की सजा सुनाई है।

यह मामला न केवल एक होनहार छात्र की मौत की दुखद दास्तां है, बल्कि एक विदेशी जमीन पर इंसाफ के लिए एक भारतीय परिवार के संघर्ष की जीत भी है।

Kartik Vasudev Murder Case

कौन थे कार्तिक वासुदेव?

कार्तिक वासुदेव उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद (राजेंद्र नगर) के रहने वाले एक मेधावी छात्र थे। उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई स्थानीय डीएवी स्कूल से पूरी की थी। अपने सपनों को उड़ान देने के लिए वह जनवरी 2022 में कनाडा गए थे। वह टोरंटो के सेनेका कॉलेज में मार्केटिंग मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रहे थे। एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले कार्तिक अपने भविष्य को लेकर काफी उत्साहित थे, लेकिन वहां पहुंचने के मात्र तीन महीने बाद ही उनकी जान ले ली गई।

उस दिन क्या हुआ था?

7 अप्रैल 2022 की शाम को कार्तिक वासुदेव टोरंटो के शेरबोर्न मेट्रो स्टेशन से बाहर निकल रहे थे। तभी रिचर्ड एडविन नाम का व्यक्ति उनके पास से गुजरा। बिना किसी उकसावे या बहस के, एडविन ने पीछे मुड़कर कार्तिक पर अंधाधुंध गोलियां चला दीं। कार्तिक एक 'स्ट्रेंजर अटैक' (अजनबी द्वारा हमला) का शिकार हुए थे। पुलिस जांच में सामने आया कि कार्तिक और हमलावर के बीच पहले से कोई जान-पहचान या रंजिश नहीं थी, जो इस घटना को और भी खौफनाक बनाता है।

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अदालत का फैसला

टोरंटो की सुपीरियर कोर्ट में जस्टिस जेन केली ने आरोपी रिचर्ड एडविन को 'फर्स्ट-डिग्री मर्डर' का दोषी पाया। हालांकि बचाव पक्ष ने यह दलील दी थी कि एडविन 'सिजोफ्रेनिया' (एक मानसिक बीमारी) से पीड़ित है और उसे अपनी हरकतों का अंदाजा नहीं था, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया। कोर्ट ने माना कि आरोपी को अपने किए का पता था। उसे दो हत्याओं (कार्तिक और एक अन्य व्यक्ति) के जुर्म में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।

परिवार का लंबा संघर्ष

कार्तिक के पिता जितेश वासुदेव और उनका परिवार पिछले चार साल से न्याय की गुहार लगा रहा था। बेटे का शव भारत लाने से लेकर कनाडा की अदालत में सुनवाई तक, परिवार ने कई मानसिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना किया। जितेश वासुदेव ने बताया कि वे फैसले के समय कनाडा में ही मौजूद थे। हालांकि उन्हें इस बात का दुख हमेशा रहेगा कि अंतिम संस्कार के समय उन्हें स्थानीय प्रशासन से वैसी मदद नहीं मिली जैसी उम्मीद थी, पर अब कानूनी न्याय मिलने से उन्हें थोड़ी शांति मिली है।

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