Kargil Vijay Diwas 2024: मिराज-2000 से MIG-27 तक, इंडियन एयरफोर्स ने कारगिल में कैसे बरसाई थी मौत?
Kargil Vijay Diwas: कारगिल विजय दिवस में आज देश उन शहीदों को याद कर रहा है, जिन्होंने पाकिस्तान को एक मुश्किल युद्ध में ना सिर्फ कारगिल की ऊंची पहाड़ियों से खदेड़ दिया था, बल्कि पाकिस्तान के उस मनोबल की भी कमर तोड़ दी थी, जहां वो भारत से कश्मीर को छीनने का इरादा रखता था।
कारगिल युद्ध में इंडियन आर्मी के जवान दुर्गम पहाड़ियों पर चढ़ाई करते हुए ऊंचाई पर मौजूद पाकिस्तानी सैनिकों को छक्के छुड़ा रहे थे, तो दूसरी तरफ इंडियन एयरफोर्स ने अपनी विनाशक हथियारों से कारगिल को पाकिस्तानी सैनिकों का कब्र बना दिया था।

आइये जानते हैं, इंडियन एयरफोर्स की कारगिल युद्ध में स्ट्रैटजी क्या था और किन हथियारों से पाकिस्तानी सैनिकों को पीठ दिखाकर भागने के लिए मजबूर किया।
भारतीय एयरक्राफ्ट और मिशन
कारिगल युद्ध में इंडियन एयरफोर्स ने अपने ऑपरेशन का नाम 'सफेदसागर' रखा था और भारतीय वायु सेना (IAF) ने रणनीतिक हवाई हमलों के जरिए कारगिल की चोटियों पर मौजूद पाकिस्तानी सेना को तितर-बितर कर दिया था।
कारगिल युद्ध में मिराज-2000 एक गेमचेंजर एयरक्राफ्ट के तौर पर उभरा था। खासकर इसकी सटीक स्ट्राइक क्षमता ने पाकिस्तानी सेना की नाक में दम कर दिया। Paveway II लेजर-गाइडेड बम (LGB) से लैस, मिराज 2000 ने सटीकता के साथ दुश्मन के बंकरों को निशाना बनाया, जिससे इंडियन आर्मी के पैदल जवानों को काफी चोटियों पर चढ़ने में काफी मदद मिल रही थी।
भारतीय वायुसेना ने MIG-21, MIG-27 और MIG-29 लड़ाकू विमानों को भी अलग अलग भूमिकाओं के लिए तैनात किया था, जिसमें हवाई श्रेष्ठता मिशन, जमीनी हमले और नजदीकी हवाई सहायता शामिल थे।
MIG-29 ने कारगिल के आसमान पर प्रभुत्व हासिल करने के लिए हवाई कवर देने में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जगुआर या SEPECAT जगुआर को गहरी पैठ वाले हमलों के लिए तैनात किया गया था, जिनका काम दुश्मन की सप्लाई लाइन को काटना था। इन्होंने बिना गाइडेड बमों का बेहतरीन इस्तेमाल किया था।

भारतीय वायुसेना की बेहतरीन रणनीति
दुश्मन के ठिकानों पर सटीक बमबारी के अलावा, भारतीय वायुसेना ने कारगिल के आसमान को किला बनाने के लिए मिसाइलों की एक सीरिज का उपयोग किया था।
इंडियन एयरफोर्स ने इस दौरान हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों, जैसे R-60 (AA-8 Aphid) and R-73 (AA-11 Archer), का इस्तेमाल किया था। इनका मकसद ये था, कि कारगिल की चोटियों पर मौजूद पाकिस्तान की सेना को पाकिस्तानी एयरफोर्स से कोई मदद ना मिल पाए।
इसके अलावा, ग्राउंड स्ट्राइक के लिए इंडियन एयरफोर्स ने Kh-29 और Kh-59 एयर टू ग्राउंड मिसाइलों का इस्तेमाल किया था। इससे एयरफोर्स ने आसमान से चोटियों पर मौजूद पाकिस्तानी सेना के बंकर, उनकते खाने पीने के सामान और उनके हथियारों को निशाना बनाया। इसके अलावा, इंडियन एयरफोर्स ने पाकिस्तानी सेना की सप्लाई चेन को भी काट दिया, जिससे उन्हें मदद मिलनी बंद हो गई और उनके पास भागने के अलावा कोई और चारा नहीं बचा था।

हेलीकॉप्टर्स ने निभाई निर्णायक भूमिका
कारगिल युद्ध में हेलीकॉप्टरों ने बहुआयामी भूमिका निभाई थी और अलग अलग अभियानों में भारतीय सशस्त्र बलों को जरूरी सहायता प्रदान की। वे रसद सामग्री की सप्लाई के साथ साथ, युद्ध में भी अपनी भूमिका निभा रहे थे, जो कारगिल क्षेत्र के कठिन इलाकों में प्रभावी ढंग से काम करने के लिए आवश्यक चपलता और लचीलापन प्रदान करते थे।
चीता हेलीकॉप्टर: यह हल्का यूटिलिटी हेलीकॉप्टर टोही और घायलों को युद्ध के मैदान से बाहर निकालने के लिए इस्तेमाल किया जाता है और इसकी खासियत युद्ध के ऊंचे और दुर्गम इलाकों में ऑपरेशन को अंजाम देना है। कारगिल युद्ध में इसका बेहतरीन इस्तेमाल किया गया था।
चेतक हेलीकॉप्टर: एक और हल्का यूटिलिटी हेलीकॉप्टर, चेतक, युद्ध की लाइव स्थिति जानने और घायलों को निकालने के मिशनों के लिए इस्तेमाल किया गया था। ये हेलीकॉप्टर सीमित स्थानों में अपनी गतिशीलता के लिए जाना जाता है।
Mi-17: इस मध्यम-लिफ्ट हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल चोटियों पर सेना की तैनाती के लिए किया गया था और इसका काम रसद सामग्री की सप्लाई करने के साछ साथ हवाई हमलों के लिए रास्ता तैयार करना था।
Mi-8: एक मध्यम-लिफ्ट हेलीकॉप्टर है और Mi-8 हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल सैनिकों को एक जगह से दूसरे जगह पहुंचाने और दूरदराज के क्षेत्रों में फ्रंटलाइन इकाइयों को रसद सहायता पहुंचाने के लिए किया जाता था।












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