काबुल हमला: अफगानिस्तान ने हक्कानी नेटवर्क को ठहराया जिम्मेदार, जानिए इस खतरनाक आतंकी संगठन के बारे में

काबुल। अफगानिस्तान के काबुल में हुए आतंकी नरसंहार में करीब 100 की मौत और 155 से भी ज्यादा जख्मी हुए लोगों से पूरी दुनिया को हिला दिया है। एंबुलेंस में रखे बम विस्फोट इतना भयानक था कि इंसानों के तो चिथड़े-चिथड़े उड़ गए, लेकिन आस पास की कई दुकानें और इमारतें भी चकनाचूर हो गई। इस हमले के लिए तालिबान ने एक बार फिर जिम्मेदारी ली है, लेकिन अफगानिस्तान सरकार ने हमले के पीछे हक्कानी नेटवर्क आतंकी संगठन का हाथ बताया है। अफगानिस्तान में जब से अमेरिकी सेना ने प्रवेश किया है, तभी से इस मुल्क में हक्कानी नेटवर्क और तालिबान ने अपनी जड़ों को और ज्यादा मजबूत किया है। अफगानिस्तान में आए दिन हमलों के लिए अमेरिका और अफगान सुरक्षा बल हक्कानी नेटवर्क को जिम्मेदार ठहराते हैं। आइए जानते हैं कौन है हक्कानी नेटवर्क?

क्या है हक्कानी नेटवर्क?

क्या है हक्कानी नेटवर्क?

आज के दौर में हक्कानी नेटवर्क का एक ही उद्देश्य है कि वे ज्यादा-ज्यादा से अमेरिकी-नाटो मिलिट्री और अफगानिस्तान सुरक्षा बलों को मार गिराए। अफगानिस्तान और यूएन ने इस इंटरनेशल टेरर ग्रुप माना है। हक्कानी नेटवर्क ने कई बड़े धमाके किए हैं, जिसमें काबुल के दूतावासों, अफगान पार्लियामेंट बिल्डिंग और स्थानीय लोगों से लेकर यूएस आर्मी बेस भी शामिल है।

इसका स्थापना कब और कैसे हुई?

इसका स्थापना कब और कैसे हुई?

दूसरे विश्व युद्ध के बाद जब दुनिया सोवियत यूनियन (USSR) और यूएस जैसे दो धड़ों में बंट गई थी, तब इस प्रकार का संगठन अस्तित्व में आया। अफगान मुजाहिद्दीन कमांडर जलालुद्दीन हक्कानी ने 1980 में इसकी स्थापना की थी, जिसका मुख्य उद्देश्य सोवियत यूनियन के खिलाफ लड़ना था। हक्कानी नेटवर्क को अमेरिका और पाकिस्तान ने मिलकर खड़ा किया था। सोवियत यूनियन के खिलाफ गुरिल्ला वॉर छेड़ने के लिए अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने हक्कानी नेटवर्क की मदद की और उन्हें हथियार उपलब्ध करवाए। आज हक्कानी अमेरिका के लिए ही गले की हड्डी बन चुका है।

इस नेटवर्क को कौन लीड कर रहा है?

इस नेटवर्क को कौन लीड कर रहा है?

इसकी शुरूआत जलालुद्दीन हक्कानी ने की थी, लेकिन बीमारी की वजह से उसने अपने बेटे सिराजुद्दीन को इसकी कमान सौंप दी। सिराजुद्दीन को तालिबान का डिप्टी लीडर भी माना जाता है। खालिल अल-रहमान हक्कानी को इस संगठन को सबसे बड़ा फंडराइजर्स माना जाता है और अमेरिका ने इसे भी ग्लोबल टेररिस्ट की लिस्ट में रखा है। जलालुद्दीन हक्कानी के एक और बेटे अनास हक्कानी अफगानिस्तान सरकार की कस्टडी में है और इसे मौत की सजा भी सुनाई दी गई है। तालिबान कई बार धमकी दे चुका है कि अगर अनस की हत्या की तो परिणाम बहुत गंभीर होंगे।

कितना बड़ा है ये नेटवर्क?

कितना बड़ा है ये नेटवर्क?

हक्कानी के ज्यादातर लड़ाके उत्तरी पाकिस्तान के जनजातिय क्षेत्रो में रहते हैं और वहीं से अपने मंसूबों को अंजाम देने के लिए योजना बनाते हैं। यहीं से हक्कानी के लड़ाके हथियार चलाना, दुश्मनों से बचना, ग्रेनेड से हमला करना और आत्मघाती हमला करना सीखते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हक्कानी के 10,000 से ज्यादा लड़ाके हैं। अमेरिका और अफगानिस्तान लगातार पाकिस्तान को हक्कानी नेटवर्क को सुरक्षित पनाहगाह देने का आरोप लगाते रहे हैं, लेकिन इस्लामाबाद सरकार ने इसका हमेशा खंडन किया है।

कौन करता है इस नेटवर्क को फंड?

कौन करता है इस नेटवर्क को फंड?

अमेरिकी रिपोर्ट्स के मुताबिक, अफगानिस्तान में हक्कानी नेटवर्क को ज्यादातर फंड अपने अवैध अफीम व्यापार से प्राप्त होता है। 2001 से पहले अफगानिस्तान के 180 हेक्टेयर जमीन पर अफीम की खेती होती थी, वहीं आज करीब 9,000 हेक्टेयर जमीन पर हक्कानी और तालिबान के आतंकी इसकी खेती करते हैं। इसके अलावा अरब गल्फ देशों से भी इनको फंडिंग मिलती है।

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