Bharat OR India: जिन्ना नहीं चाहते थे ‘इंडिया’ हो भारत का नाम, मुस्लिम लीग ने भी जताई थी आपत्ति, क्या थी वजह?
इस बात की बड़ी जोर चर्चा है कि केंद्र सरकार देश का नाम 'इंडिया' से सिर्फ 'भारत' करने पर विचार कर रही है। दरअसल जी20 मेहमानों को राष्ट्रपति भवन में होने वाले डिनर के लिए आमंत्रित करने के लिए जिस निमंत्रण पत्र को भेजा गया है, उसमें अंग्रेजी में 'इंडिया' की जगह 'भारत' लिखा गया है।
ऐसे में कांग्रेस के साथ ही कई विपक्षी पार्टियों ने इसकी आलोचना की है। इस बीच मोदी सरकार ने 18 से 22 सितंबर तक संसद का विशेष सत्र बुलाया है। चर्चा है कि इस सत्र में मोदी सरकार देश का नाम सिर्फ 'भारत' करने और 'इंडिया' शब्द हटाने को लेकर बिल लेकर आ सकती है।

ऐसे वक्त में जब 'इंडिया' नाम पर विवाद छिड़ा हुआ है, यह याद करना दिलचस्प हो सकता है कि आजादी के शुरुआती वक्त में मोहम्मद अली जिन्ना और मुस्लिम लीग ने भी कांग्रेस द्वारा हिंदुस्तान का नाम इंडिया करने पर आपत्ति जताई थी।
आजादी के बमुश्किल एक महीने बाद, सितंबर 1947 में भारत के पहले वायसराय लुईस माउंटबेटन ने मुहम्मद अली जिन्ना को 'डोमिनियन्स ऑफ इंडिया एंड पाकिस्तान' की एक कला प्रदर्शनी के मानद अध्यक्ष बनने के लिए आमंत्रित किया था।
चूंकि निमंत्रण पत्र में नए देश को संदर्भित करने के लिए 'हिंदुस्तान' के बजाय 'इंडिया' का उपयोग किया गया था। ऐसे में जिन्ना ने इस नाम को लेकर आपत्ति जताई थी। जिन्ना ने तो पत्र लिखकर माउंटबेटन को इसे लेकर उलाहना भी दिया था।
जिन्ना ने लिखा, "यह बेहद अफसोस की बात है कि कुछ रहस्यमय कारणों से हिंदुस्तान ने 'इंडिया' शब्द को अपनाया है जो निश्चित रूप से भ्रामक है और भ्रम पैदा करने का इरादा रखता है।"
दरअसल जिन्ना चाहते थे कि विवरण में 'डोमिनियन्स ऑफ हिन्दुस्तान एंड पाकिस्तान' लिखा जाए। लेकिन यह माउंटबेटन को अस्वीकार्य था। आखिरकार जिन्ना को ये निमंत्रण वैसे ही स्वीकार करना पड़ा।
उस दौर में नाम को लेकर विवाद की यह कोई इकलौती घटना नहीं थी। मुस्लिम लीग ने भी विभाजन से पहले 'यूनियन ऑफ इंडिया' नाम पर आपत्ति जताई थी। हालांकि मुस्लिम लीग के इस विरोध के पीछे के बारे में बहुत अधिक लिखा-कहा नहीं गया है।
हालांकि इंडिया नाम को लेकर भारत के भीतर भी विवाद खूब हुआ था। दरअसल ब्रिटिश जब भारत आए थे तो उन्होंने सिंधु घाटी को इंडस वैली कहा। इसी आधार पर उन्होंने इस देश का नाम इंडिया कर दिया।
ऐसा कहा जाता है कि अंग्रेजों को भारत या हिंदुस्तान का उच्चारण करने में दिक्कतें आती थीं ऐसे में उन्होंने भारत को इंडिया कहना ज्यादा मुफीद समझा। तभी से भारत को पूरी दुनिया में 'इंडिया' नाम से जाना जाने लगा।
भारत की आजादी के दौर में अंग्रेजों ने उपमहाद्वीप में अपने साम्राज्य के नाम के रूप में ग्रीक मूल वाला नाम 'इंडिया' शब्द चुना। हालांकि संविधान सभा में भी इस नाम को लेकर विरोधाभास की स्थिति बनी हुई थी।
हालांकि उस वक्त 'इंडिया' नाम रखने के अपने फायदे थे। इस नाम ने देश को ब्रिटेन के भारतीय साम्राज्य के उत्तराधिकारी के रूप में स्थापित किया था। इंडियन यूनियन को इंडियन आर्मी से लेकर संयुक्त राष्ट्र की सीट तक, ब्रिटिश इंडिया द्वारा प्राप्त अधिकांश कानूनी उपाधियां विरासत में मिली थी।
आखिरकार अंत में अंग्रेजी और हिंदी दोनों को छोड़कर, संविधान में एक अटपटा सा नाम 'इंडिया, दैट इज भारत' के साथ समझौता किया गया। हालांकि तब से अब तक 'इंडिया' नाम को किसी खास चुनौती का सामना नहीं करना पड़ा था।
यहां तक कि कई हिंदी समाचार चैनल भी अब इस नाम का उपयोग करते हैं। हालांकि भारतीय राजनीति में छोटे से हिस्से की ही लेकिन ये मांग हमेशा रही है कि 'इंडिया' को हटा दिया जाए और केवल 'भारत' को बरकरार रखा जाए।












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