इजरायली फ्लैग मार्च से पहले येरूशलम की अल-अक्सा मस्जिद में भारी संघर्ष, दर्जनों फिलिस्तीनी घायल
इजरायल हर साल येरूशलम विजय जुलूस मनाता आ रहा है और ये विजय जुलूस साल 1967 से इजरायल के लोग मनाते आ रहे हैं, क्योंकि इसी साल इजरायल ने येरूशलम पर कब्जा किया था।
येरूशलम, मई 29: रविवार को येरुशलम की अल-अक्सा मस्जिद के अंदर छिपे हुए फिलिस्तीनियों और इजरायली पुलिस के बीच भीषण संघर्ष हुआ है। ये संघर्ष यहूदियों के विवादास्पद राष्ट्रवादी रैली से पहले हुआ है, जिसमें दर्जनों लोगों के घायल होने की खबर है।

क्या है संघर्ष की वजह?
आपको बता दें कि, A इस दौरान हजारों की संख्या में इजरायली येरूशलम की सड़क पर निकलते हैं और संकरी गलियों से होकर इजरायली नारे लगाते हुए गुजरते हैं। वहीं, फिलिस्तीन को हमेशा से इस रैली को लेकर गंभीर आपत्ति रही है और इस रैली को लेकर अकसर संघर्ष होते रहे हैं। इस बार भी रैली से पहले पिछले कई दिनों से भारी तनाव बना हुआ है और फिलिस्तीनी गुटों ने चेतावनी दी थी, कि अगर मुस्लिम इलाकों से होकर जुलूस निकलता है, तो फिर संघर्ष छिड़ सकता है।

दशकों पुराना है ये संघर्ष
येरूशलम में इजरायल और फिलिस्तीन के बीच का ये संघर्ष दशकों पुराना है और जुलूस शुरू होने से कुछ घंटे पहले इजरायली पुलिस ने अल-अक्सा परिसर में एक मस्जिद के अंदर कुछ फिलिस्तीनियों को बंद कर दिया था, क्योंकि यहूदी आगंतुक परिसर के दैनिक पूजा के लिए पहुंचे, जो मुसलमानों और यहूदियों दोनों द्वारा पूजनीय है। जिससे हमेशा से मुस्लिमों को आपत्ति रही है और इस बार भी जब इजरायली पक्ष के लोग पूजा करने के लिए पहुंचे, तो फिर उनके ऊपर फिलिस्तीनियों की करफ से पत्थर और हथगोले फेंके जाने लगे, जिसके बाद संघर्ष की स्थिति पैदा हो गई और इजरायली पुलिस ने लाठीबाजी शुरू कर दिया। रिपोर्ट के मुताबित, इजरायल की तरफ से करीब 12 लोग पूजा करने के लिए पहुंचे थे और वो धार्मिक लिबास में थे, जिनके ऊपर हथगोले फेंके गये।

हमास ने लगाए आरोप
इस्लामिक कट्टरवादी संगठन हमास, जो गाजा पट्टी को नियंत्रित करता है, उसने ऑनलाइन पोस्ट किए गए वीडियो की निंदा करते हुए सुझाव दिया कि यहूदियों ने पूजा करके प्रतिबंधों का उल्लंघन किया है। हमास के वरिष्ठ अधिकारी बासेम नईम ने रॉयटर्स को बताया कि, 'इन सभी गैर-जिम्मेदार नीतियों और परिणामों के लिए इज़राइल सरकार पूरी तरह से जिम्मेदार है।" आपको बता दें कि, हाल के वर्षों में हमास ने खुद को मुस्लिम यरुशलम के रक्षक के रूप में पेश किया है। वहीं, पिछले साल हमास और इजरायल के बीच 11 दिनों तक युद्ध भी चल चुका है, जिसमें कम से कम 250 फिलिस्तीनी और 13 इजरायली लोग मारे गये थे।

इजरायल ने कहा, नहीं हुआ कोई बदलाव
वहीं, इजरायली प्रधानमंत्री नेफ्ताली बेनेट ने कहा है कि, इजरायली पक्ष के द्वारा किसी भी प्रतिबंध का उल्लंघन नहीं किया गया है। वहीं, इस रैली को लेकर कुछ गठबंधन दलों ने प्रधानमंत्री बेनेट से पुनर्विचार करने का आह्वान किया था, लेकिन नेफ्ताली बेनेट ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ शुक्रवार को जारी एक बयान में कहा गया था कि, "फ्लैग परेड हमेशा की तरह नियोजित मार्ग के अनुसार आयोजित की जाएगी, जैसा कि दशकों से होता आ रहा है।" उन्होंने कहा कि, इजरायल लगातार स्थिति की समीक्षा कर रहा है। आपको बता दें कि, इजराइल पूरे यरुशलम को अपनी शाश्वत और अविभाज्य राजधानी के रूप में देखता है, जबकि फिलिस्तीनी पूर्वी हिस्से को अपने भविष्य के राज्य की राजधानी के रूप में देखना चाहते हैं। पश्चिमी सरकारों द्वारा आतंकवादी संगठन समझा जाने वाला हमास, आधुनिक समय के सभी इज़राइल क्षेत्र पर अपना कब्जा चाहता है।

फिलिस्तीनियों के अलमान है मार्च
ऐसा नहीं है, कि इजरायल की तरफ से पहली बार रैली निकाली गई है। इजरायल पिछले कई दशक से रैली निकालता आ रहा है और फिलिस्तीनियों का कहना है कि, ये रैली और यहूदियों का पूजा फिलिस्तीनियों का अपमान है। फिलिस्तीन इस क्षेत्र में यहूदियों का विकास नहीं चाहते हैं, लिहाजा इस क्षेत्र में हमेशा तनाव रहता है और तनाव के बीच ही रैली का आयोजन किया गया था। इससे पहले रमज़ान के पवित्र महीने के दौरान अप्रैल में भी अल-अक्सा परिसर में फ़िलिस्तीनी और इज़राइली पुलिस के बीच बार-बार झड़पें हुईं थीं, जिसमें मुस्लिम मस्जिद में यहूदी आगंतुकों की बढ़ती संख्या से नाराज थे।












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