जापान ने चंद्रमा पर उतारा अपना स्पेसक्राफ्ट, इतिहास रचने वाला दुनिया का पांचवा देश बना
जापान के स्मार्ट लैंडर फॉर इन्वेस्टिगेटिंग मून (SLIM) मिशन स्नाइपर ने सफलतापूर्वक चांद की सतह पर लैंडिंग कर ली है। हालांकि अभी तक पता नहीं चल पाया है कि जापान ने सॉफ्ट लैंडिंग या हार्ड लैंडिंग की है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक इस कार्यक्रम की लाइवस्ट्रीम को भी बंद कर दिया गया है।
जापान की स्पेस एजेंसी जाक्सा की ओर से बताया गया है कि अब प्रेस कांफ्रेंस में अधिक जानकारी दी जाएगी। अगर जापान चांद की जमीन पर सॉफ्ट लैंडिंग करता है तो ऐसा करने वाला वह पांचवां देश बन जाएगा। इससे पहले भारत, रूस, अमेरिका और चीन यह सफलता हासिल कर चुके हैं।

जापानी अंतरिक्ष एजेंसी Jaxa के एक अधिकारी का कहना है कि अंतरिक्ष यान चंद्रमा पर उतरा है और पृथ्वी के साथ संचार किया है। लेकिन, अपने सौर पैनलों के माध्यम से बिजली पैदा नहीं कर रहा है। मीडिया को संबोधित करते हुए, Jaxa अध्यक्ष हितोशी कुनिनका ने कहा कि सटीक रूप से आदेश मिल रहे हैं और वह जवाब दे रहा है। हालांकि वह सौर सेल बिजली पैदा नहीं कर रहा है। इसलिए कम बैटरी मोड पर काम कर रहा है।
जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) ने नीचे उतरने के लिए इंजन चालू करने के बाद 20 मिनट में लैंडिंग का प्रयास पूरा कर लिया। हालांकि स्पेस एजेंसी अभी स्नाइपर से सिग्नल मिलने का भी इंतजार कर रही है। इसलिए अब तक साइंटिस्ट्स जश्न नहीं मना रहे हैं।
जापान की एजेंसी ने कहा कि वे अभी भी लैंडर की स्थिति की जांच कर रहे हैं और एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आगे की जानकारी देंगे।
जापानी स्पेस एजेंसी JAXA ने बताया कि लैंडिंग के लिए उसने 600x4000 km का इलाका खोजा है। स्लिम ने इसी इलाके में लैंडिंग की है। ये जगह चांद के ध्रुवीय इलाके में है।
जापान का स्लिम मिशन 7 सितंबर को लांच हुआ था। मौसम की खराबी के कारण लांच से पहले तीन बार इसे टालना पड़ा था। आपको बता दें कि स्नापर का टार्गेट अपने टार्गेट स्पॉट के 100 मीटर के दायरे में लैंड करना था। स्नापर 25 दिसंबर को चांद की ऑर्बिट में पहुंचा था। तब से ये चांद की सतह की तरफ बढ़ रहा था।
अगर ये मिशन सफल होता है तो जापान के अंतरिक्ष कार्यक्रम को बहुत बढ़ावा देगा, जिसने हाल के वर्षों में मार्च 2023 में अपने H3 फ्लैगशिप रॉकेट की लॉन्च विफलता सहित कई असफलताओं का अनुभव किया है।
आपको बता दें कि जापान का ये मून मिशन्स में लैंडिंग के लिहाज से सबसे एडवांस्ड टेक्नोलॉजी से लैस है। 'मून स्नाइपर' अपने साथ एक नया एक्स-रे टेलीस्कोप और एक लाइट वेट हाई-प्रिशिसन स्पेक्ट्रोस्कोपी मून लैंडर ले गया है। यह आने वाले समय में चंद्रमा पर लैंडिंग तकनीक बेस के रूप में काम करेगा।












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