Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

औंधे मुंह गिरी जापान की अर्थव्यवस्था, भीषण आर्थिक मंदी में फंसा.. तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी का ताज भी छिना

Japan Economy: दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने का गौरव अब जापान से छिन गया है और जर्मनी ने जापान को पीछे छोड़ दिया है। हालांकि, ऐसा करने में जर्मनी की कोई बड़ी कामयाबी नहीं है, बल्कि ये जापान की इकोनॉमी है, जो भारी संकट में फंस गई है।

कमजोर हो चुकी घरेलू खपत की वजह से अपान की अर्थव्यवस्था अप्रत्याशित रूप से सिकुड़ गई है, जिससे देश आर्थिक मंदी में फंस गया है और जिससे अब जर्मनी, दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है।

Japan Economy

जापानी कैबिनेट कार्यालय ने गुरुवार को कहा है, कि जापान की जीडीपी इस साल के पहले तीन महीने में 0.4 प्रतिशत वार्षिक दर से सिकुड़ गया है और पिछले साल की पहली तिमाही के मुकाबले, इस साल की पहली तिमाही में जीडीजी 3.3 प्रतिशत सिकुड़ गया है। लिहाजा, पिछली दो तिमाहियों में लगातार आर्थिक संकुचन को आर्थिक मंदी के तौर पर परिभाषित किया जा सकता है।

जापान की इकोनॉमी में क्यों हो रही गिरावट?

जापानी इकोनॉमी में यह गिरावट, बाजार के पूर्वानुमानों से काफ़ी कम है। रॉयटर्स की तरफ से किए गये सर्वेक्षण में अर्थशास्त्रियों ने अक्टूबर से दिसंबर महीनों में सकल घरेलू उत्पाद में तिमाही-दर-तिमाही वार्षिक आधार पर 1.4% की वृद्धि की उम्मीद की थी।

इसका नतीजा ये हुआ है, कि कि जापान की अर्थव्यवस्था, जो पिछले साल अमेरिकी डॉलर के मामले में जर्मनी के बाद दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थी, वो अब पूरी तरह से दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गई है, जबकि जर्मनी ने एक स्थान की छलांग लगाई है।

जापान की अर्थव्यवस्था के औंधे मुंह गिरने की सबसे बड़ी वजह घरेलू मांग का काफी कमजोर पड़ जाना है। जापानी बाजारों से लगातार निगेटिव खबरें आ रही हैं, क्योंकि लोगों ने खरीददारी काफी कम कर दी है।

निजी खपत - जो जापान की अर्थव्यवस्था का आधा हिस्सा है - उसमें चौथी तिमाही में वार्षिक 0.9% की गिरावट आई है, क्योंकि जापानी उपभोक्ता भोजन, ईंधन और अन्य वस्तुओं के लिए उच्च कीमतों से जूझ रहे हैं। यह लगातार तीसरी तिमाही में गिरावट का प्रतीक है।

जापान अपनी बुनियादी ऊर्जा आवश्यकताओं का 94% और भोजन का 63% आयात करता है, इसलिए जापानी मुद्रा येन के कमजोर होने से लोगों का जीवनयापन, जो पहले सी काफी महंगा था, वो अब और भी ज्यादा महंगा हो गया है।

इस साल की शुरुआत से जापानी मुद्रा येन, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 6.6% गिर गया है, जिससे यह 10 औद्योगिक देशों के समूह द्वारा उपयोग की जाने वाली मुद्राओं में सबसे खराब प्रदर्शन करने वालों में से एक बन गया है।

जापानमैक्रो के टोक्यो स्थित रणनीतिकार नील न्यूमैन ने सीएनएन को एक रिपोर्ट में कहा है, कि "निजी खपत विशेष रूप से कमजोर है और बाजार की उम्मीदें सपाट रहने का अनुमान है।" उन्होंने कहा, कि "दुर्भाग्य से जनवरी में जापान सागर में आए भूकंप के बाद स्थिति और खराब हो रही है। प्राकृतिक आपदाओं के समय लोग खर्च करना बंद कर देते हैं।"

आपको बता दें, कि एक जनवरी को इशिकावा के केंद्रीय प्रान्त में नोटो प्रायद्वीप में भूकंप आया था, जिसमें सैकड़ों इमारतें ढह गईं, आग लग गई और पूर्वी रूस तक सुनामी की चेतावनी जारी की गई थी। इसमें 200 से ज्यादा लोग मारे गए थे और 1,000 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।

इसके अलावा, चौथी तिमाही के दौरान, पूंजीगत व्यय में भी लगातार तीसरी तिमाही में 0.3% की गिरावट आई। निजी क्षेत्र द्वारा प्रॉपर्टी सेक्टर में निवेश 4% गिर गया है।

हालांकि, बाहरी मांग ने समग्र विकास का समर्थन किया है। जापानी मुद्रा येन के कमजोर होने से किसी दूसरे देश के लिए जापानी सामान खरीदना सस्ता हो गया, जिससे पिछली तिमाही में पिछले साल की तुलना में सालाना 11% की बढ़ोतरी हुई है। विशेष रूप से, पर्यटकों द्वारा जापान में खर्च बढ़ गया है।

तकनीकी मंदी में गिरने के बावजूद, जापान के बाज़ारों में उत्साह बना हुआ है, बेंचमार्क निक्केई 1.2% आगे बढ़ा है और 1990 के बाद पहली बार 38,000 के स्तर से ऊपर बंद हुआ है।

शुक्रवार को उन बढ़त में तेजी आई, सुबह के कारोबार में निक्केई सूचकांक 1% से अधिक बढ़ गया और दिसंबर 1989 में अपने ऐतिहासिक उच्चतम स्तर के करीब पहुंच गया है।

Japan Economy

कब तक हो जाएगी रिकवरी?

कुछ अर्थशास्त्रियों का कहना है कि आने वाले महीनों में मंदी कम होने की संभावना है।

आईएनजी ग्रुप के वरिष्ठ अर्थशास्त्री मिन जू कांग ने कहा, "[चौथी तिमाही] के निराशाजनक नतीजे के बावजूद, हमें उम्मीद है कि [पहली तिमाही] 2024 में जीडीपी में उछाल आएगा।"

पिछले साल के अंत में गिरावट के बाद, मुद्रास्फीति में स्थिरता और वेतन में अपेक्षित वृद्धि को देखते हुए, चालू तिमाही में निजी खपत में सुधार होना चाहिए। उन्होंने कहा, कि निवेश पक्ष में, मजबूत कॉर्पोरेट आय और आईटी की ठोस मांग से भी सुविधा निवेश में वृद्धि होगी।

कैपिटल इकोनॉमिक्स के विश्लेषकों का कहना है, कि बिजनेस सर्वेक्षण और श्रम बाजार हेडलाइन आंकड़ों की तुलना में कारोबारी माहौल की बेहतर तस्वीर पेश करते हैं।

दिसंबर में बेरोजगारी दर ग्यारह महीने के निचले स्तर 2.4% पर आ गई। इसके अलावा, बैंक ऑफ जापान के टैंकन सर्वेक्षण से पता चला है, कि सभी उद्योगों और फर्म आकारों में व्यावसायिक स्थितियां 2018 की चौथी तिमाही के बाद से सबसे मजबूत है।

उन्होंने कहा कि सरकार के लिए अगले महीने नियमित समीक्षा के दौरान चौथी तिमाही के आंकड़ों को संशोधित करना संभव है।

गोल्डमैन सैक्स ने गुरुवार को कहा है, कि उसे उम्मीद है कि 2024 की पहली तिमाही में जापान की अर्थव्यवस्था 1% की वृद्धि हासिल करेगी।

गोल्डमैन सैक्स के विश्लेषकों ने कहा, "हमें उम्मीद है कि अक्टूबर-दिसंबर में तेजी से वृद्धि से आवक खपत धीमी हो जाएगी, लेकिन फिर भी मध्यम तेजी की उम्मीद है।" उन्होंने कहा कि इसी अवधि के दौरान पूंजीगत व्यय में भी 1.3% की बढ़ोतरी हो सकती है।

कैपिटल इकोनॉमिस्ट्स के विश्लेषकों ने कहा, कि उन्हें उम्मीद है कि मार्च में चौथी तिमाही की जीडीपी को ऊपर की ओर संशोधित किया जाएगा और जीडीपी के आंकड़े बैंक ऑफ जापान को अप्रैल में अपनी नकारात्मक ब्याज दरों को समाप्त करने से रोकने की संभावना नहीं है।

देश के निवेशकों में तेजी बनी हुई है। जापान के इक्विटी बाज़ार के लिए 2023 एक असाधारण वर्ष रहा है, जिसमें निक्केई सूचकांक 28% बढ़ा है, जिससे यह एशिया में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला बाज़ार बन गया है।

ईस्टस्प्रिंग इन्वेस्टमेंट्स के विश्लेषकों के अनुसार, जापान की इक्विटी में रैली मुख्य रूप से चल रहे कॉर्पोरेट सुधारों और इक्विटी पर रिटर्न में सुधार के कारण हुई है, जबकि कमजोर येन ने जापानी निर्यातकों के मुनाफे को बढ़ाने में भी मदद की है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+