AUKUS: चीन के खिलाफ बनाए गये सैन्य गठबंधन ऑकस में जापान को लाने की तैयारी, भारत वाला क्वाड बेकार?
AUKUS security pact: साल 2021 में जब अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया ने अचानक AUKUS सिक्योरिटी पैक्ट की घोषणा की थी, उसी वक्त सवाल उठे थे, कि आखिर QUAD के रहते ऑकस बनाने का औचित्य क्या है, क्योंकि QUAD में पहले से ही अमेरिका, भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान शामिल थे।
लेकिन, अब AUKUS के विस्तार को लेकर अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन में सहमति बन गई है और इन तीनों देशों ने घोषणा की है, कि जापान को ऑकस में सहयोग करने की तैयारी चल रही है, यानि अब क्वाड में शामिल सिर्फ भारत ही है, जो ऑकस का सदस्य नहीं है, तो क्या माना जाए, का भारत वाला गठबंधन QUAD महत्वहीन हो गया है।

AUKUS में जापान को लाने की तैयारी
ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त राज्य अमेरिका और ब्रिटेन ने कहा है, कि वे त्रिपक्षीय AUKUS सुरक्षा समझौते को मजबूत करने के लिए जापान के साथ काम करने पर विचार कर रहे हैं, जिसका मकसद इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन का मुकाबला करना है। यानि, ये चारों देश मिलकर इंडो-पैसिफिक में चीन को काउंटर करने के लिए बगैर भारत के सहयोग के काम करेंगे।
AUKUS में जापान को शामिल करने का आह्वान ऐसे समय में आया है, जब जापानी प्रधान मंत्री फुमियो किशिदा राष्ट्रपति जो बाइडेन के साथ एक प्रमुख द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन के लिए वाशिंगटन की छह दिवसीय यात्रा पर हैं।
एक आधिकारिक बयान में मंगलवार को कहा गया है, कि AUKUS गठबंधन ने कहा है, कि वे जापान की "ताकतों" और तीनों के साथ उसकी "घनिष्ठ" द्विपक्षीय रक्षा साझेदारी की वजह से उसके साथ "सहयोग करने पर विचार" कर रहे हैं। हालांकि, जापान संस्थापक सदस्यों के साथ फिलहाल सीट साझा नहीं करेगा।
ऑस्ट्रेलियाई प्रधान मंत्री एंथनी अल्बानीज ने कैनबरा में संवाददाताओं से कहा, कि टोक्यो AUKUS के लिए एक "प्राकृतिक" भागीदार है, लेकिन इसका योगदान एडवांस टेक्नोलॉजी के डेवलपमेंट तक ही सीमित होगा।
AUKUS समझौते में जापान को सीमित क्यों है?
AUKUS का गठन साल 2021 में अमेरिका में किया गया था और ये गठबंधन खुद को सैन्य गठबंधन कहता है, जबकि क्वाड को भारत ने चीन के खिलाफ एक सैन्य गठबंधन मानने से इनकार कर दिया था। AUKUS ने अब जापान को 'पिलर' 2 यानि सेकंड स्टेज सिक्योरिटी पैक्ट में शामिल करने का ऑफर दिया है, जिसका मकसद जापान की आर्टिफिशियल टेक्नोलॉजी सेक्टर, पानी के नीचे ड्रोन और हाइपरसोनिक मिसाइलों जैसी एडवांस त युद्ध क्षमताओं को विकसित करने में उसकी क्षमता का इस्तेमाल करना है।
AUKUS ने कहा है, कि वह चाहता है कि "समान विचारधारा वाले साझेदार" उन परियोजनाओं के गैर-परमाणु स्तंभ 2 में शामिल हों, जो "क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा के समर्थन में हमारे संबंधित रक्षा बलों को एडवांस सैन्य क्षमताएं प्रदान करेंगे।"
इसके तहत, पहला चरण यानि पिलर-1 ऑस्ट्रेलिया को परमाणु-संचालित पनडुब्बियों का एक बेड़ा बनाने में मदद के लिए डिजाइन किया गया है। बयान में यह प्रस्ताव नहीं दिया गया है, कि जापान समझौते के इस हिस्से में शामिल होगा। अधिकारियों और विशेषज्ञों का कहना है, कि देश में बेहतर साइबर सुरक्षा और रहस्यों की सुरक्षा के लिए सख्त नियम लागू करने की आवश्यकता को देखते हुए जापान के औपचारिक सदस्य के रूप में शामिल होने में फिलहाल बाधाएं बनी हुई हैं।

इससे पहले, न्यूजीलैंड ने भी प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती मौजूदगी और आक्रामकता को देखते हुए व्यापक चिंताओं का हवाला देते हुए ऑकस के स्तंभ II में शामिल होने में अपनी दिलचस्पी दिखाई थी।
लेकिन, असल सवाल ये है, कि क्या QUAD अब महत्वहीन हो चुका है? ऐसा इसलिए, क्योंकि क्वाड की आखिरी बैठक पिछले साल जून में हुई थी और उसके बाद से अभी तक एक भी बैठक नहीं हुई है और ना ही अगले कई महीनों तक क्वाड की कोई बैठक प्रस्तावित है। माना जा रहा है, कि खालिस्तान मुद्दा और चीन के खिलाफ भारत का आक्रामक बयानबाजी नहीं करना क्वाड के निष्क्रीय होने की वजह हो सकता है। भारत ने साफ कर दिया था, कि क्वाड का मकसद इंडो-पैसिफिक देशों की मदद करना है, ना कि ये गठबंधन किसी देश के खिलाफ है।
ऐसे में सवाल ये है, कि क्या फिलहाल के लिए QUAD को खामोश मान लिया जाए और उस वक्त का इंतजार किया जाए, जब अमेरिका को एक बार फिर से चीन के खिलाफ भारत की जरूरत होगी और वो उसे फिर से QUAD की याद आएगी?
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