Analysis: जापान की राजनीति में बवंडर, भारत समर्थक LDP को इलेक्शन में नहीं मिली बहुमत, उथल-पुथल को समझिए
Japan Election News: जापान में चुनाव आमतौर पर शांत होते हैं। हालांकि, 27 अक्टूबर को प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा की तरफ से समय से पहले इलेक्शन का ऐलान करना, लोगों के लिए हैरानी भरा था और तमाम सर्वेक्षणों से पता चल रहा था, कि उनकी पार्टी बहुमत से दूर रह सकती है।
लेकिन, इलेक्शन के नतीजों ने जापान की राजनीति को हिलाकर रख दिया है, जिसमें सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) ने 15 वर्षों में पहली बार अपना बहुमत खो दिया है। और चुनाव परिणामों ने जापानी प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा को बीच मंझधार पर खड़ा कर दिया है, जिसमें पीएम ने कहा है, कि "हमें कठोर फैसले मिल रहे हैं।"

जापानी संसद का नया गणित
जापान की संसद में 456 सांसदों वाले निचले सदन में, NHK न्यूज के मुताबिक LDP ने 191 सीटें जीतीं, जबकि उसके सहयोगी कोमीतो ने 24 सीटें जीतीं। इसका मतलब है, कि गठबंधन की कुल संख्या 215 है। यह संख्या इशिबा के 233 सीटें जीतने के चुनावी लक्ष्य से बहुत पीछे है। इसके अलावा, यह 2021 की संख्या से बहुत पीछे है, जहां LDP ने 259 सीटें जीतकर अपने दम पर बहुमत हासिल की थी और उस वक्त कोमीतो ने 32 सीटें हासिल की थीं।
लेकिन, इस बार LDP को बहुमत से काफी दूर रहना पड़ा है। ऐसे में हम इस बात पर करीब से नजर डालते हैं, कि इस चुनाव में वास्तव में क्या हुआ है और LDP बहुमत हासिल करने में क्यों नाकाम रही और आगे क्या हो सकता है?
15 सालों में पहली बार पिछड़ी LDP
शिगेरू इशिबा को पिछले महीने LDP ने नया प्रधानमंत्री बनाया था और प्रधानमंत्री बनने के बाद जनता का समर्थन हासिल करने के लिए उन्होंने चुनाव की घोषणा कर दी थी। जिसके बाद रविवार को देश में चुनाव आयोजित करवाए गये। जिसमें देश की सबसे शक्तिशाली राजनीतिक पार्टी LDP को बड़ा झटका लगा है।
एलडीपी मुख्यालय से आए फुटेज में नेताओं के चेहरे उदास दिखाई दे रहे थे और रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश के कृषि मंत्री और कानून मंत्री भी चुनाव हार चुके हैं।
पिछली बार एलडीपी 2009 में चुनाव हारी थी, जब इसे केंद्र-वाम डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ जापान (DPJ) ने हराया था, लेकिन LDP सिर्फ 3 सालों तक ही सत्ता से बाहर रही थी। हालांकि, DPJ की नीतिगत नाकामियों और 2011 के फुकुशिमा परमाणु आपदा ने इसे तत्काल काफी अलोकप्रिय बना दिया और फिर शिंजो आबे के नेतृत्व में LDP साल 2012 के अंत में फिर से सत्ता में लौट आई।
रविवार के खराब चुनावी नतीजे के बाद प्रधानमंत्री इशिबा ने एनएचके न्यूज से कहा, "मतदाताओं ने हमें कठोर फैसला सुनाया है और हमें इस परिणाम को विनम्रतापूर्वक स्वीकार करना होगा।"
एलडीपी के लिए चुनाव भले ही कठिन रहे हों, लेकिन चुनाव का सबसे बड़ा विजेता मुख्य विपक्षी दल कॉन्स्टीट्यूशनल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ जापान (CDPJ) रहा है। इसने 148 सीटें हासिल की हैं, जबकि पिछले चुनाव में इसे 98 सीटें मिली थीं, हालांकि यह अभी भी बहुमत के आंकड़े से काफी पीछे है। जापान में सरकार बनाने के लिए 233 सीटों की जरूरत होती है।

एलडीपी की हार की वजह
रविवार को आए नतीजे बिल्कुल भी चौंकाने वाले नहीं हैं। एलडीपी पिछले कुछ समय से अपनी लोकप्रियता लगातार खोती जा रही है और घोटालों की झड़ी लगा रही है। इस साल की शुरुआत में पार्टी की अप्रूवल रेटिंग 20 प्रतिशत से कम थी।
एलडीपी के प्रति गुस्सा तब और बढ़ गया, जब 2023 में स्लश फंड घोटाले का खुलासा हुआ। तब यह बताया गया, कि एलडीपी के कई सांसदों ने पार्टी के समारोहों के टिकटों की बिक्री से होने वाले अघोषित मुनाफे को स्लश फंड में डाल दिया है। इसके कारण अक्टूबर में जापान के पूर्व प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा को पद तक छोड़ना पड़ा और इशिबा को नया प्रधानमंत्री बनाया गया।
जब इशिबा ने एलडीपी की कमान संभाली, तो उनकी शुरुआती रेटिंग पॉजिटिव थी। लेकिन, मतदान से कुछ दिन पहले, एक रिपोर्ट सामने आई, कि पार्टी ने गैर-समर्थित उम्मीदवारों की अध्यक्षता वाली शाखाओं को चुनाव लड़ने के लिए फंड दिया है। इशिबा के यह कहने के बावजूद, कि इस धन का उपयोग गैर-समर्थित उम्मीदवारों द्वारा नहीं किया जा सकता है, जापानी मीडिया में इसपर काफी बहस की गई और प्रधानमंत्री की काफी किरकिरी हुई।
मतदान से दो दिन पहले प्रभावशाली असाही अखबार में एक संपादकीय में लिखा गया, कि "एलडीपी द्वारा शाखाओं को किए गए भुगतान सार्वजनिक छवि के प्रति पूरी तरह से लापरवाही दिखाते हैं।"
जापान की अर्थव्यवस्था और जीवन-यापन की बढ़ी लागत ने भी LDP के लिए मुश्किलें पैदा कीं। जापान में कई लोग मुद्रास्फीति, उच्च कीमतों, स्थिर वेतन और सुस्त अर्थव्यवस्था के साथ अपने संघर्ष की शिकायत कर रहे हैं।
LDP और जापान के लिए आगे का रास्ता क्या है?
नतीजे आने के कुछ ही समय बाद, जापानी बाजार में येन में गिरावट आई। मुद्रा व्यापार में, अमेरिकी डॉलर 152.24 येन से बढ़कर 153.76 जापानी येन हो गया। पिछले महीने यह 140-येन के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
इशिबा के लिए, नतीजे दुविधापूर्ण हैं। सत्ता में बने रहने के लिए, एलडीपी को उन पार्टियों के साथ गठबंधन बनाने की आवश्यकता होगी, जिनके खिलाफ उसने चुनावों में लड़ाई लड़ी थी। इसका मतलब है, कि पार्टी को सत्ता-साझाकरण सौदों पर बातचीत करनी होगी, जिसकी वजह से सरकार के लिए कई तरह फैसले लेना मुश्किल हो जाएगा।
एलडीपी के लिए, डेमोक्रेटिक पार्टी फॉर द पीपल (डीपीपी) या जापान इनोवेशन पार्टी भविष्य की कुंजी होगी। डीपीपी ने 27 सीटें हासिल की हैं, जबकि जापान इनोवेशन पार्टी के पास 35 सीटें हैं। हालांकि, इन दोनों पार्टियों की नीतियां एलडीपी के साथ विरोधाभासी हैं।
जापान इनोवेशन पार्टी के प्रमुख नोबुयुकी बाबा ने एलडीपी के साथ गठबंधन को उसके मौजूदा घोटाले पर निशाना साधते हुए गठबंधन को "असंभव" बताया है।
डीपीपी ने भी एलडीपी के साथ गठबंधन से इनकार किया है। हालांकि, इसके नेता युइचिरो तामाकी ने संकेत दिया है, कि एक "आंशिक गठबंधन" संभव है, जहां यह उन व्यक्तिगत नीतियों पर कुछ लचीलापन प्रदान कर सकता है, जिनसे उसका जुड़ाव है।
क्वांटम स्ट्रैटेजी के एक रणनीतिकार डेविड रोश ने सीएनबीसी को बताया, कि इशिबा अब एक "मृत व्यक्ति" है, और उनकी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी "पूरी तरह से सत्ता खोने या सौदेबाजी की एक और भी लंबी अवधि के बाद एक गड़बड़ गठबंधन में अपनी शक्ति को और कम कर बैठेगी।"
रविवार रात को एक फ्लैश रिसर्च नोट में उन्होंने कहा, "यह पक्का है कि मोल-तोल जारी रहने के दौरान नीतिगत अनिश्चितता बनी रहेगी," उन्होंने येन के यहां से और कमजोर होने की भविष्यवाणी की है।
दूसरी ओर, जापान की संवैधानिक लोकतांत्रिक पार्टी (CDPJ) भी सरकार बनाने का प्रयास कर रही है। CDPJ नेता योशीहिको नोडा ने प्रेस को बताया है, कि "हमारा लक्ष्य सत्तारूढ़ पार्टी के बहुमत को तोड़ना था, और हमने इसे हासिल कर लिया, जो एक बड़ी उपलब्धि है।"
उन्होंने कहा कि वे "विभिन्न दलों के साथ ईमानदारी से बातचीत करेंगे"। नोडा ने फ़ूजी-टीवी से कहा, "हमारा मूल दर्शन यह है कि LDP-कोमीतो प्रशासन जारी नहीं रह सकता।"
संविधान के अनुसार, अब दलों के पास सरकार बनाने के लिए 30 दिनों का वक्त है। लेकिन, एक बात निश्चित है: देश राजनीतिक अस्थिरता का सामना कर रहा है। यह अस्थिरता न सिर्फ जापान के लिए बल्कि उसके पड़ोसियों, सहयोगियों और क्षेत्र के लिए भी खतरनाक है।












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