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J-31 Fighter Jet: भारत के दुश्मनों चीन-PAK में हो सकती है 5th जेनरेशनल लड़ाकू जेट डील, IAF खेलेगा F-35 का जुआ?

J-31 Stealth Fighter: 8 जुलाई को चीन की सरकारी सीसीटीवी ने चीनी J-31B स्टील्थ फाइटर जेट का एक प्रमोशनल वीडियो जारी किया था, जिसे राज्य के स्वामित्व वाली शेनयांग एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन ने बनाया है।

वीडिया फुटेज से पता चलता है, कि पांचवी पीढ़ी का ये लड़ाकू विमान अपने साइड वेपन बे में दो मिसाइलों को लेकर उड़ान भर सकता है और ये एक ऐसी क्षमता है, जो इसे US एयरफोर्स के F-22 और चीन के अपने J-20 लड़ाकू विमानों से अलग करती है। इसके अलावा, ये फाइटर जेट एक बार में चार PL-12 मध्यम दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों को लेकर भी उड़ान भर सकता है, जो J-20 पर इस्तेमाल की जाने वाली मिसाइलों के समान हैं।

fifth generation fighter jet

बीजिंग के डिफेंस एक्सपर्ट्स का दावा है, कि ये फाइटर जेट अब पूरी तरह से तैयार हो चुका है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से बात करते हुए चीनी डिफेंस एक्सपर्ट फू कियानशाओ ने कहा, कि "FC-31 का J-31 में ट्रांसफॉर्मेशन यह दर्शाता है, कि इसने सैन्य सेवा के लिए औपचारिक आवश्यकताओं को पूरा किया है।"

इंटरनेशनल सेल्स के लिए चीन इस फाइटर जेट को FC-31 कह रहा है, जबकि चीनी डिफेंस एक्सपर्ट्स इस फाइटर जेट को JF-31 या JF-35 कह रहे हैं। नामों में ये कनफ्युजन सिर्फ इसलिए है, क्योंकि चीन की सरकार ने आधिकारिक तौर पर इसे कोई नाम नहीं दिया है और डिफेंस एक्सपर्ट्स इसे अमेरिकी F-35 लाइटनिंग II फाइटर जेट के समान बता रहे हैं।

चीन के तरकश में एक और विनाशक हथियार

जिस फाइटर जेट के प्रोटोटाइप का अभी टेस्ट किया गया है, वो मूल FC-31 से थोड़ा बड़ा दिखता है, जिसका एक दशक पहले अनावरण किया गया था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है, कि युद्धक विमान ने 2012 में अपनी पहली उड़ान पूरी की थी और 2014 के झुहाई एयर शो में इसका सार्वजनिक रूप से अनावरण किया गया था।

सिन्हुआ न्यूज ने 2015 में बताया था, कि J-20 फाइटर जेट के मुकाबले इसकी क्षमता को और बढ़ा दिया गया है और ये चीनी एयरक्राफ्ट कैरियर पर भी J-15 फाइटर जेट के साथ काम कर सकता है।

हाल के वर्षों में, चीन के इस फाइटर जेट ने काफी चर्चा बटोरी है, क्योंकि ये चीन का पहला फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट है, जो एयरक्राफ्ट कैरियर से भी उड़ान भर सकता है। इसके अलावा, ऐसी अटकलें हैं, कि लड़ाकू जेट का इस्तेमाल चीन के तीसरे और सबसे एडवांस एयरक्राफ्ट कैरियर, फुजियान पर किया जाएगा, जो विद्युत चुम्बकीय कैटापुल्ट सिस्टम से लैस है।

क्या पाकिस्तान खरीदेगा चीनी फाइटर जेट?

चीन ने जनवरी में सऊदी अरब में आयोजित एयर शो में FC-31 का मॉडल प्रदर्शित किया था और उसी महीने, पाकिस्तान के एयर चीफ मार्शल जहीर अब्बास बाबर सिद्धू ने विमान खरीदने की योजना की घोषणा की थी।

उन्होंने कहा था, कि "J-31 स्टील्थ लड़ाकू विमान खरीदने की नींव पहले ही रखी जा चुकी है, जो निकट भविष्य में PAF के बेड़े का हिस्सा बनने के लिए तैयार है।" चीनी विमानों पर रिसर्च करने वाले धकर्ता @Rupprecht_A ने 29 मई 2024 को शेयर की गई एक तस्वीर ने इस डेवलपमेंट की पुष्टि की थी। चीन, पाकिस्तान और मध्य पूर्व में लड़ाकू जेट विमानों की बिक्री को बढ़ावा दे रहा है, जैसा कि सऊदी एयर शो में विमान की उपस्थिति से संकेत मिला था।

जेट फाइटर में यूएई की दिलचस्पी पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति पद के दौरान हस्ताक्षरित 50 F-35 के पिछले सौदे से उपजी है, क्योंकि राष्ट्रपति बनने के बाद जो बाइडेन ने 2021 में इस समझौते को रोक दिया था। यह मुख्य रूप से चीन के साथ टेक्नोलॉजिक सीक्रेट्स को साझा किए जाने की चिंताओं के कारण था - जो दोनों देशों के बीच घनिष्ठ संबंधों का परिणाम है।

कई विशेषज्ञों ने F-22, F-35 और चीनी J-31 के बीच समानता की ओर इशारा किए जाने के बाद अमेरिका ने टेक्नोलॉजिकल लीक के जोखिम को बहुत गंभीरता से लिया है। J-31 की सपाट पूंछ और जुड़वां इंजन F-22 से लिए गए प्रतीत होते हैं, जबकि सामने का हिस्सा F-35 जैसा दिखता है।

2014 में, "यूएस-चीन आर्थिक और सुरक्षा समीक्षा आयोग" कांग्रेस की रिपोर्ट ने डिफेंस साइंस बोर्ड के एक निष्कर्ष का हवाला दिया, कि चीनी साइबर हमलों ने F-35 सहित कई अमेरिकी हथियार प्रणालियों के महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजी को चुरा लिया था। चीन ने J-20 विमान के निर्यात पर रोक लगा दी है, ठीक उसी तरह जैसे अमेरिका ने F-22 की बिक्री पर रोक लगाई है। इस प्रकार, J-31 का ग्राउंड वर्जन बनाने की कोशिश को चीन के आकर्षक पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट बाजार में प्रवेश करने के प्रयास के रूप में देखा जा सकता है, जिस पर वर्तमान में अमेरिका का दबदबा है।

विमान के डिजाइन और विशेषताओं को लेकर सवाल उठाए गए हैं, क्योंकि यह अभी भी अपने शुरुआती चरण में है। स्टेल्थ तत्व डायवर्टरलेस सुपरसोनिक इनलेट (DSI) बंप, टू-पीस बबल कैनोपी, घुमावदार हथियार बे और दो तिरछे वर्टिकल स्टेबलाइजर के साथ आगे की ओर बहने वाले इनटेक रैंप हैं। एविएशन इंडस्ट्री कॉरपोरेशन ऑफ चाइना (AVIC) के अधिकारियों ने कहा है, कि विमान का पता L-बैंड और Ku-बैंड रडार नहीं लगा सकते हैं और ये कई तरह के और सेंसर को भी चकमा देने की क्षमता रखता है।

भारत-पाकिस्तान में पांचवी पीढ़ी के विमानों को लेकर रेस

पाकिस्तान चीन के स्टील्थ लड़ाकू विमानों का पहला ग्राहक बन सकता है। पाकिस्तान, पहले से ही JF-17 थंडर और J-10C लड़ाकू विमानों का संचालन कर रहा है। J-10 को भारत के राफेल लड़ाकू विमानों के मुकाबले के तौर पर पेश किया गया है, लेकिन कई विशेषज्ञों का कहना है, कि डसॉल्ट के लड़ाकू विमान पाकिस्तान और यहां तक ​​कि चीन द्वारा संचालित किसी भी विमान से कहीं बेहतर हैं।

इस बात के स्पष्ट संकेत हैं, कि पाकिस्तान चीन के "J-31 स्टील्थ फाइटर" को खरीदने की इच्छा रखता है, इसलिए भारत में अपने आधुनिकीकरण अभियान को तेज करने के लिए दबाव बढ़ रहा है।

पाकिस्तान अगर पांचवीं पीढ़ी का फाइटर हासिल कर लेता है, तो निश्चित तौर पर भारत के मुकाबले उसे सामरिक लाभ मिलेगा, क्योंकि भारत के पास कोई भी पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान नहीं हैं। चीन के साथ पाकिस्तान के घनिष्ठ सैन्य संबंध यह सुनिश्चित करेंगे, कि पाकिस्तानी एयरफोर्स, भारत की तुलना में कहीं ज्यादा तेजी से एडवांस फाइटर हासिल कर सके। एक विशेषज्ञ ने कहा, कि भारतीय वायुसेना को स्क्वाड्रन की घटती ताकत और नए स्क्वाड्रन हासिल करने में बार-बार होने वाली देरी, एयरफोर्स के लिए काफी ज्यादा परेशान करने वाली बात है।

यूरेशियन टाइम्स के फाइटर जेट एक्सपर्ट नितिन जे टिक्कू का मानना ​​है, कि अगर भारत पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान खरीदने के बारे में गंभीर है, तो भारत के पास एकमात्र विकल्प F-35 है। भारत के पास AMCA प्रोग्राम है, लेकिन इस प्रोग्राम के तहत फाइटर जेट के निर्माण में कम से कम 10 साल और लगेंगे। वहीं, इंडियन एयरफोर्स साल 2018 में रूसी Su-57 कार्यक्रम से हट चुका है, लिहाजा अब वो फिर से इस कार्यक्रम में शामिल नहीं होगा।

हालांकि, इंडियन एयरफोर्स के अधिकारियों ने बार-बार राफेल लड़ाकू विमानों की प्रशंसा की है। लेकन अगर भारत चीन के साथ बराबरी करना चाहता है, तो उसे एक बेहतर विमान की जरूरत है। यहां तक ​​कि फ्रांस भी अगली पीढ़ी का लड़ाकू विमान विकसित कर रहा है, और अब समय आ गया है कि भारत भी इसे हासिल करे।

अमेरिका, भारत के लड़ाकू जेट इकोसिस्टम में शामिल होने के लिए उत्सुक है और उसने भारत को F-15EX और F-21 लड़ाकू विमानों की पेशकश भी की है। F-35 आधिकारिक तौर पर टेबल पर नहीं है, लेकिन जैसा कि हम समझते हैं, इसे पेश किया जा सकता है। F-35 स्टील्थ लड़ाकू विमान एक बेहतरीन विकल्प हैं। अमेरिका के पांचवीं पीढ़ी के युद्धक विमानों के साथ एकमात्र मुद्दा यह है, कि वे भारत की स्ट्रैटजिक ऑटोनॉमी और तटस्थ रुख को गंभीर रूप से चुनौती देंगे, जिसे नई दिल्ली अपनाता रहा है। जिससे सवाल उठते हैं, कि क्या भारत एफ-35 के लिए जुआ खेलने को तैयार है?

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