China-Italy: शी जिनपिंग से मिलीं इटली की PM जियोर्जिया मेलोनी, चीन के सिल्क रोड ऑफर को मानेंगी मोदी की दोस्त?
China-Italy: चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सोमवार को इटली के प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी के साथ बैठक में इटली के साथ और ज्यादा सहयोग का आह्वान करते हुए उनके सामने 'सिल्क रोड' में शामिल होने का ऑफर रखा है, जिसके बाद सवाल उठ रहे हैं, कि क्या इटली चीन के इस ऑफर को स्वीकार करेंगीा।
जियोर्जिया मेलोनी से मुलाकात के बाद चीनी राष्ट्रपति ने कहा, कि दोनों देश ऐतिहासिक सिल्क रोड व्यापार मार्ग के अंतिम छोर हैं। हालांकि, मेलोनी ने दिसंबर में इटली को चीन के 'बेल्ट एंड रोड पहल' से बाहर निकाल लिया था, लेकिन रविवार को एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गये हैं, जो दोनों देशों को व्यापार सहयोग करने के लिए एक नया रास्ता प्रदान करता है।

जियोर्जिया मेलोनी पांच दिवसीय राजकीय यात्रा पर हैं, जो प्रधानमंत्री के रूप में उनकी पहली चीन यात्रा है।
चीन का 'सिल्क रोड' ऑफर क्या है?
सिल्क रोड, चीन की सदियों पुरानी सोच है, जिसका मकसद पूरी दुनिया पर प्रभाव हासिल करने के लिए परिवहन मार्गों का विस्तार करना है और चीन ने अपनी इसी सोच को नये नाम BRI यानि, बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के नाम से उतारा है, जिसके तहत वो दुनियाभर में बिजली और परिवहन के बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रहा है, ताकि वैश्विक व्यापार को बढ़ावा दिया जा सके और साथ ही अन्य देशों के साथ चीन के संबंधों को भी गहरा किया जा सके।
चीन ने BRI के नाम पर अरबों डॉलर के ऋण बांटे हैं और अभी तक देखा गया है, कि बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव में जो भी देश शामिल हुए हैं, उन्हें घाटा ही हुआ है, सिवाय चीन को छोड़कर। BRI के चक्कर में पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे देश चीन के भीषण कर्ज जाल में फंस गये हैं।
इटली पहला यूरोपीय देश था, जो बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव प्रोजेक्ट में शामिल हुआ था, लेकिन जियोर्जिया मेलोनी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद इटली को इस प्रोजेक्ट से बाहर कर लिया। मेलोनी की सरकार ने कहा, कि इस प्रोजेक्ट का मकसद ही ऋण जाल में देशों को फंसाना है।
चीनी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैठक के दौरान शी जिनपिंग ने इटली की पीएम मेलोनी से कहा, कि "चीन और इटली प्राचीन 'सिल्क रोड' के विपरीत छोर पर स्थित हैं, और दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण आदान-प्रदान ने पूर्वी और पश्चिमी सभ्यताओं के आदान-प्रदान और आपसी सीख के साथ-साथ मानव विकास और प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।"
वहीं, शी जिनपिंग से बात करते हुए मेलोनी ने कहा, कि इटली यूरोपीय संघ के साथ चीन के संबंधों और संतुलित व्यापार संबंधों को बनाने में "महत्वपूर्ण भूमिका" निभा सकता है।
आपको बता दें, कि जुलाई की शुरुआत में यूरोपीय संघ ने चीन में बने इलेक्ट्रिक वाहनों पर 37.6% तक का टैरिफ लगा दिया है, जिसका मकसद यूरोपीय बाजार को बाकी देशों की कारों के लिए भी प्रतिस्पर्धी बनाना है, जबकि चीन अपने देश में बनने वाली इलेक्ट्रिक कारों के निर्माण में भारी भरकम प्रोत्साहन देता है, जिससे चीनी कारों की कीमत काफी कम हो जाती है और जब वो विदेशी बाजार में पहुंचती हैं, तो दूसरी कंपनियों की कारों के लिए उनका मुकाबला करना अत्यंत मुश्किल हो जाता है।
यूक्रेन पर आक्रमण करने के बाद रूस को चीन के समर्थन ने यूरोपीय संघ के साथ संबंधों को और भी तनावपूर्ण बना दिया है और अब यूरोप ने चीनी कारों पर भारी-भरकम टैरिफ लगा दिया है, जिससे अब चीनी कारों की कीमत यूरोपीय बाजारों में बढ़ गई है, लिहाजा सवाल ये उठ रहे हैं, कि क्या इटली, चीनी सामानों पर टैरिफ के मामले में यूरोपीय संघ के खिलाफ जाएगा?
हालांकि, इटली की प्रधानमंत्री ने वैश्विक मंच पर एक कूटनीतिक शक्ति के रूप में चीन की भूमिका का जिक्र किया है। मेलोनी ने कहा, "अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर असुरक्षा बढ़ रही है, और मुझे लगता है कि इन सभी गतिशीलता से निपटने के लिए चीन अनिवार्य रूप से एक बहुत ही महत्वपूर्ण मध्यस्थ है।"
एक्सपर्ट्स का कहना है, कि जियोर्जिया मेलोनी की यह यात्रा, चीन के प्रति इटली के नजरिए में बदलाव को दर्शाती है, जो बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) से इटली के हटने के बाद विचारधारा-संचालित नीतियों से हटकर ज्यादा व्यावहारिक और आर्थिक रूप से केंद्रित रणनीति की ओर बढ़ रही है।
इटली, यूरोपीय संघ की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और अगर इटली की प्रधानमंत्री फिर से देश को BRI में शामिल करती हैं, तो ये यूरोप के साथ साथ अमेरिका के लिए भी बहुत बड़ा झटका होगा। क्योंकि, ये समझौता, चीन को यूरोप में इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने का रास्ता पूरी तरह से खोल देता है।
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