Israel Iran War: इजरायल के पास बचा सिर्फ 10-12 दिन का गोला-बारूद, फिर ईरान मचाएगा तबाही, देखें रिपोर्ट
Israel Iran War: क्या इज़राइल के पास 12 दिनों की सुरक्षा बाकी है? ईरान के हाइपरसोनिक मिसाइल हमले के बीच, क्या इजरायल अब इस युद्ध में ज्यादा दिनों तक टिकने लायक भी नहीं बचा? ऐसे कई सवाल हैं जो तेल अवीव में अस्पताल पर हुए ताजा हमले के बाद उठ रहे हैं, जब बार-बार आयरन डोम ईरान की तरफ से दागी गईं मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर मार गिराने में चूक रहा है।
हर दिन हो रहे $285 मिलियन खर्चा
ईरान के हमलों के कारण इज़राइल "एरो" मिसाइल इंटरसेप्टर का भंडार खाली हो रहा है, जिससे ईरान के खिलाफ उसकी मिसाइल सुरक्षा की स्थिरता को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। द वॉल स्ट्रीट जर्नल में छपे एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, इज़राइल के पास ज्यादा ऊंचाई वाली बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए इस्तेमाल होने वाले "एरो" सिस्टम की कमी हो रही है। "द मार्कर" का अनुमान है कि मिसाइल डिफेंस पर हर 24 घंटे में 1 बिलियन शेकेल ($285 मिलियन) तक खर्च हो रहा है। अकेले एक एरो इंटरसेप्टर की कीमत लगभग $3 मिलियन है।

मिसाइल डिफेंस सिस्टम पर दबाव
यह संघर्ष, जो अब अपने छठे दिन में है, उसमें ईरान ने 400 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं, जो उसके अनुमानित 2,000 मिसाइलों की बड़ी आर्टिलरी का हिस्सा हैं। इज़राइल ने अपने मल्टी लेवल मिसाइल डिफेंस नेटवर्क का उपयोग करके इनमें से अधिकांश को रोक दिया है, जिसमें आयरन डोम, डेविड्स स्लिंग, एरो और अमेरिका द्वारा भेजे गए पैट्रियट और थाड जैसे सिस्टम शामिल हैं। लेकिन बीतते वक्त के बाद उसका सुरक्षा कवच कमजोर पड़ता दिख रहा है। जिसकी वजह से कुछ ईरानी मिसाइलें अपने टारगेट जैसे कि मोसाद हेडक्वार्टर को हिट कर पाईं।
'बैठकर इंतजार नहीं कर सकते अमेरिका-इजरायल'
सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज़ में मिसाइल डिफेंस प्रोजेक्ट के निदेशक टॉम काराको का कहना है, "न तो अमेरिका और न ही इज़राइल पूरे दिन बैठकर मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर सकते हैं।" "इज़राइल और उसके दोस्तों को जो भी करने की ज़रूरत है, उसे करने के लिए पूरी तेज़ी के साथ आगे बढ़ने की ज़रूरत है, क्योंकि हम बैठकर इंतज़ार नहीं कर सकते।"
पेंटागन ने बढ़ाया मदद का हाथ
वाशिंगटन को महीनों से आपूर्ति की कमी के बारे में पता था, क्योंकि हमास से युद्ध के दौरान इनका बड़ी तादाद में इस्तेमाल हुआ है। इसके जवाब में, पेंटागन ने चुपचाप मिसाइल डिफेंस सपोर्ट बढ़ा दिया है। जिसमें ज़मीन, समुद्र और हवा में अपने अपने हथियार तैनात कर दिए हैं। अमेरिकी नौसेना के वॉर शिप ने इस क्षेत्र में मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने में भी मदद की है, जिससे इज़राइल के एयर डिफेंस सिस्टम को मदद मिल रही है।
10-12 दिन का बचा है डिफेंस का गोला-बारूद
डब्ल्यूएसजे को अमेरिकी और इज़राइली खुफिया जानकारी पर जानकारी देने वाले एक सूत्र ने बताया कि अमेरिकी पुन: आपूर्ति के बिना, इज़राइल के पास केवल 10 से 12 दिनों के लिए इंटरसेप्टर बचे हैं, अगर ईरान इसी स्पीड से हमला करता रहा तो। सूत्र ने बताया, "सिस्टम पहले से ही अपनी क्षमता से ज्यादा काम कर रहा है। जल्द ही, उन्हें यह चुनना पड़ सकता है कि किन मिसाइलों को इंटरसेप्ट करना है और किन मिसाइलों को गिरने देना है।"
सुरक्षा कवच में दरार
यह तनाव अब दिखने लगा है। शुक्रवार की रात, ईरानी मिसाइलों ने रक्षा को भेद दिया और तेल अवीव में इज़राइल के सैन्य मुख्यालय के पास हमला किया। दो दिन बाद, एक और मिसालइल ने हाइफ़ा के पास एक तेल रिफाइनरी को टारगेट किया, जिससे उसे बंद करना पड़ा। मंगलवार को एक वीडियो में तेल अवीव के उत्तर में इज़राइल की खुफिया एजेंसी मोसाद के कैंपस के करीब और हमले दिखाई दिए। दोनों तरफ से हो रहे इन हमलों में इजरायल के 24 और ईरान के 629 (खबर लिखे जाने तक) लोग मारे गए हैं।
आईडीएफ ने अपने मिसाइल आपूर्ति के बारे में सवालों के जवाब में एक संक्षिप्त बयान जारी किया: "आईडीएफ किसी भी हालात से निपटने के लिए तैयार है। वहीं जब गोला-बारूद को लेकर सवाल किया गया तो आईडीएफ ने इस पर जवाब देने से किनारा कर लिया। वहीं एरो सिस्टम बनाने वाली इज़राइल की एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज़ ने मीडिया के सवालों का जवाब नहीं दिया है। जो बताता है कि दाल में कुछ तो काला है।
इजरायल पर भी भारी दबाव
डिफेंस पर दबाव के साथ-साथ, इज़राइल भी आक्रामक है। बुधवार को, 50 से अधिक इज़राइली लड़ाकू विमानों ने दिन के उजाले में तेहरान में ठिकानों पर हमला किया। आईडीएफ के अनुसार, हमलों में यूरेनियम एनरिच से जुड़ी एक सेंट्रीफ्यूज उत्पादन साइट और कई सैन्य अड्डों को नुकसान पहुंचा है। उसी सुबह, आईडीएफ ने इज़राइली हवाई क्षेत्र को निशाना बनाने वाले सात ईरानी ड्रोन को इंटरसेप्ट किया। इन हमलों में इजरायल की यात्री विमान सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। इज़राइली एयरलाइन एल अल ने सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत साइप्रस से अपना पहला "सेफ रिटर्न" यात्री विमान बेन गुरियन हवाई अड्डे पर उतारा। उधर गोलन हाइट्स में बार-बार चेतावनी जारी की जा रही है और वहां भी दहशत का माहौल बना हुआ है।
ईरान में भी बड़ा नुकसान
हालांकि इज़राइली हमलों से ईरान के मिसाइल लॉन्च साइटों, सैन्य अड्डों और ऑयल फेसिलिटीज को भी नुकसान पहुंचना है, फिर भी तेहरान के अधिकांश मिसाइल अड्डे छिपे हुए हैं, जो संभवतः भूमिगत साइलो में हो सकते हैं। उधर इज़राइली अधिकारियों का दावा है कि ईरान के एक तिहाई लॉन्चर नष्ट हो गए हैं और अब वे ईरानी आसमान पर हवाई हमले के लिए खुले में खेल रहे हैं। लेकिन खुफिया जानकारी से पता चलता है कि ईरान के मिसाइल भंडार का आधा से अधिक हिस्सा अभी भी बरकरार है। जिनमें फतेह-1 भी है। इसके अलावा तेहरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड का कहना है कि इनमें से कुछ हथियार हाइपरसोनिक गति से उड़ते हैं, जिससे उन्हें इंटरसेप्ट करना इजरायल के लिए और भी मुश्किल होगा।
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