बेंजामिन नेतन्याहू ने रक्षा मंत्री को किया बर्खास्त, इजरायल में भड़का विरोध प्रदर्शन, जानें क्यों है हंगामा?

इजरायल में इस साल चुनाव के बाद बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी के अगुवाई में जिस सरकार का गठन हुआ है, उसमें धूर-दक्षिणपंथी पार्टियां शामिल हैं।

Israel Protest News

Israel Protest News: इस साल सरकार बनाने के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए सत्ता संभालना डेढ़ी खीर साबित हो रहा है और इजरायल लगातार विरोध प्रदर्शनों से जूझ रहा है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के रक्षा मंत्री को अचानक बर्खास्त करने के फैसले के बाद इजरायल में भारी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गये हैं और हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। ज्यूडिशियल ओवरहाल को चुनौती देने के रक्षा मंत्री के फैसले के बाद उन्हें सरकार से अचानक बर्खास्त कर दिया गया और प्रधानमंत्री बेंजामिन की काफी आलोचना की जा रही है।

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तेल अवीव में भारी विरोध प्रदर्शन

इजरायल की राजधानी तेल अवीव में 10 हजार से ज्यादा प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए हैं और उनके हाथों में इजरायली झंडा लहरा रहा है। रविवार देर रात प्रदर्शनकारियों ने एक मुख्य राजमार्ग को ब्लॉक कर दिया और कई जगहों पर रास्तों पर आगजनी की है। वहीं, इजरायली पुलिस का जेरूसलम में बेंजामिन नेतन्याहू के निजी घर के बाहर प्रदर्शनकारियों के साथ हाथापाई भी हुआ है। प्रधानमंत्री के आवास के बाहर भी हजारों प्रदर्शनकारी पहुंच गये थे। इजरायल में ये अशांति पिछले एक महीने से फैली हुई है, जब बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार ने कोर्ट को ओवरहॉल करने की योजना तैयार की है। उनके इस फैसले के बाद से ही इजरायल में उनका भारी विरोध किया जा रहा है और उनके इस फैसले के विरोध में देश के व्यापारिक लीडर्स, पूर्व सुरक्षा प्रमुख के साथ साथ अमेरिका और अमेरिका के सहयोगी देश भी शामिल हैं। वहीं, जब रक्षा मंत्री योव गैलेंट ने उनके इस फैसले की आलोचना की, तो उन्हें अचानक बर्खास्त कर दिया गया। रिपोर्ट है, कि इस हफ्ते बेंजामिन नेतन्याहू अपनी सहयोगी पार्टियों के साथ अपने न्यायिक ओलरहॉल के फैसले पर आगे बढ़ेंगे। आपको बता दें, कि बर्खास्त किए गये रक्षा मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिकुड पार्टी के ही वरिष्ठ सदस्य हैं और उन्होंने उनके न्यायिक बिल की आलोचना करते हुए कहा, कि इससे देश की सेना में गहरा विभाजन होगा।

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लिकुड पार्टी में भी बढ़ा विरोध

रक्षा मंत्री की बर्खास्तगी के बाद नेतन्याहू की लिकुड पार्टी के अंदर कुछ और नेता अब इस बिल के खिलाफ खड़े होते दिख रहे हैं। नेतन्याहू के विश्वासपात्र संस्कृति मंत्री मिकी ज़ोहर ने कहा है, कि यदि वह न्यायिक सुधार को रोकने का फैसला करते हैं, तो पार्टी उनका समर्थन करेगी। वहीं, इजरायली मीडिया ने कहा है, कि नेतन्याहू के गठबंधन के नेताओं की सोमवार सुबह मुलाकात होनी है। वहीं, प्रदर्शनकारियों ने इजरायली संसद के बाहर आज बड़े प्रदर्शन का ऐलान किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू ने रक्षा मंत्री को अचानक बर्खास्त करने का फैसला उस वक्त लिया, जब इजरायली नौसेना के पूर्व एडमिरल ने चेतावनी दी थी, कि न्यायिक ओवरहॉल प्लान ने "देश की सुरक्षा के लिए एक स्पष्ट, तत्काल और ठोस खतरा" बढ़ा दिया है और उन्होंने रक्षा मंत्री से इस बिल को रोकने का आह्वान किया था। जिसके बाद रक्षा मंत्री गैलेंट ने कहा था, कि "इस समय, हमारे देश की खातिर, मैं कोई भी जोखिम लेने और किसी भी कीमत का भुगतान करने को तैयार हूं।" और फिर उन्हें उनके पद से बर्खास्त कर दिया गया।

इजरायल में संवैधानिक खतरा

रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायली संसद नेसेट में इस हफ्ते ज्यूडिशियल ओवरहॉल बिल लाया जाएगा और माना जा रहा है, कि वहां से इस बिल को पास करा लिया जाएगा, क्योंकि इजरायली संसद की 120 सीटों में से नेतन्याहू और उनके सहयोगियों के पास 64 सीटें हैं। इस बिल के पास होने के बाद देश की अदालतों पर सरकार का प्रभाव काफी बढ़ जाएगा और कोर्ट के अंदर जजों की नियुक्ति का नियंत्रण प्रधानमंत्री के पास आ जाएगा। इसीलिए इस कानून का विरोध किया जा रहा है। विरोधियों का कहना है, कि नेतन्याहू के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप में कोर्ट में मुकदमा चल रहा है और अब नेतन्याहू जजों को डराकर अपने हक में फैसला करवाना चाहते हैं। जबकि, प्रधानमंत्री नेतन्याहू और उनके सहयोगियों का कहना है, कि इस न्यायिक योजना से देश की संसद के पास सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को पलटने का अधिकार आता है, जिससे कोर्ट और संसद के बीच एक बैलेंस बनेगा। नेतन्याहू के धूर दक्षिणपंथी सहियोगियों का कहना है, कि ज्यादातर मामलों में लिबरल्स के साथ कोर्ट में सहानुभूति दिखाई जाती है, जिसपर लगाम लगाया जाएगा। लेकिन, आलोचकों का कहना है, कि इस कानून के बाद देश में संवैधानिक संकट पैदा हो जाएगा।

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    न्यायिक प्रणाली पर नियंत्रण की कोशिश?

    आलोचकों का कहना है, कि ये कानून इजरायल की जांच और संतुलन की व्यवस्था को हटा देगा और शासन गठबंधन सरकार के हाथों में पूरी शक्ति को केंद्रित कर देगा। आलोचक ये भी कहते हैं, कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू भ्रष्टाचार के आरोपों में फंसे हैं, लिहाजा ये कानून उनके हितों के टकराव से भी संबंधित है। इजरायली वामपंथी पार्टी हदस के नेता ओफर कासिफ, जो सांसद भी हैं, उनका कहना है, कि "सरकार जो करना चाहती है, वह न्यायिक प्रणाली को सही या ठीक या संशोधित करना नहीं है, ताकि यह अधिक न्यायपूर्ण हो, बल्कि सरकार इसके ठीक उल्टा करना चाहती है, ताकि देश की अदालतों पर सरकार का शक्तिशाली नियंत्रण स्थापित हो जाए"। अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा कि, "मुझे लगता है, कि हमें स्थिति को न्यायिक ओवरहाल के रूप में नहीं, बल्कि एक शासन तख्तापलट के रूप में संदर्भित करना चाहिए।" उन्होंने कहा, कि "नेतन्याहू इजरायल को एक जातीय तंत्र से बदलना चाहते हैं, क्योंकि मेरे विचार में इजरायल कभी भी लोकतंत्र नहीं रहा है और ये हमेशा से एक यहूदी वर्चस्व पर आधारित रहा है, इसलिए इसे पहली बार से ही लोकतंत्र नहीं माना जा सकता है। लेकिन, अब यह और नीचे जा रहा है, क्योंकि सरकार अब तख्तापलट को अंजाम देना चाहती है और इजरायल एक पूर्ण फासीवादी तानाशाही में बदलने जा रहा है"।

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