फिलिस्तीन के टुकड़े कर अल्पसंख्यक यहूदियों ने कैसे बना लिया इजराइल? जानें 100 वर्षों के संघर्ष की कहानी
How Israel Was Formed: इजराइल और हमास के बीच एक बार फिर भिड़ंत हो गई है। हमास ने गाजा स्ट्रिप से इजरायल के ऊपर 5000 रॉकेट्स दागने का दावा किया है। इस हमले में अब तक 40 इजराइली नागरिकों की मौत हो गई है। अब दोनों तरफ से वार पलटवार का दौर जारी है। इतना ही नहीं बढ़ते संघर्ष को देखते हुए इजराइल में आपातकाल लागू कर दिया गया है। बता दें कि हमास एक फिलस्तिनी चरमपंथी संगठन है। यह फिलिस्तीन से इजराइल पर हमले करता रहता है।
100 साल पुराना विवाद
बता दें कि इजराइल-फिलस्तीन विवाद 100 साल से भी ज्यादा पुराना है। प्रथम विश्व युद्ध में ओटोमन सल्तनत की हार के बाद फिलस्तीन के हिस्से को ब्रिटेन ने अपने कब्जे में ले लिया। उस वक्त इजराइल नाम से कोई देश था ही नहीं । इजरायल से लेकर वेस्ट बैंक तक के क्षेत्र को फिलस्तीनी क्षेत्र के तौर पर जाना जाता था। यहां पर अल्पसंख्यक यहूदी और बहुसंख्यक अरब रहा करते थे। यह स्पष्ट कर दें कि फिलस्तीनी लोग यहीं के रहने वाले अरब थे, जबकि यहूदी लोगों को वहां बाहरी कहा जाता था।

अरबी और यहूदियों के बीच इस वजह से शुरू हुआ संघर्ष
फिलस्तीनी अरब लोगों और यहूदियों के बीच संघर्ष की शुरुआत तब हुई, जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने ब्रिटेन को कहा कि वह यहूदी लोगों के लिए फिलस्तीन को एक 'राष्ट्रीय घर' (National Home) के तौर पर स्थापित करे। यहूदियों का भी कहना था कि फिलस्तीन उनके पूर्वजों का घर है। वहीं बहुसंख्यक अरब यहां पर फिलस्तीन नाम से एक नया देश बनाना चाहते थे।
1920 और 1940 के दशक के बीच, फिलिस्तीन पहुंचने वाले यहूदियों की संख्या में अचानक वृद्धि होने लगी, कई लोग द्वितीय विश्व युद्ध के नरसंहार के बाद मातृभूमि की तलाश करने लगे। 1947 में, संयुक्त राष्ट्र ने फिलिस्तीन को अलग-अलग यहूदी और अरब राज्यों में विभाजित करने के लिए मतदान किया, साथ ही यरूशलेम को एक अंतरराष्ट्रीय शहर बना दिया। लेकिन फिलिस्तीनी अरबों ने इस कदम का पुरजोर विरोध किया।
कब बना इजराइल? कैसे अल्पसंख्यक यहूदियों को मिल गया नया देश
1948 में ब्रिटिश शासको के चले जाने के बाद यहूदी नेताओं ने इजराइल राज्य के निर्माण की घोषणा की। इसलिए, यहूदियों के लिए एक नए देश का जन्म हुआ और फिलिस्तीनी अरबों ने रातों-रात अपना देश खो दिया, जिससे उन्हें युद्ध छेड़ने के लिए प्रेरित होना पड़ा।
इजराइल पर फिर हुआ आक्रमण, लेकिन फिर भी यहूदियों की हुई जीत
यहूदियों की खुशी ज्यादा दिन नहीं टिकी क्योंकि पड़ोसी अरब देशों जॉर्डन, सीरिया और मिस्र के सैनिकों ने इजराइल पर आक्रमण किया। वहीं अमेरिका, ब्रिटिश और पश्चिमी गुप्त समर्थन से इजराइल ने युद्ध जीत लिया और पड़ोसी देशों के अधिक क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया सैकड़ों-हजारों फिलिस्तीनी भाग गए और उन्हें अपने घरों से बाहर निकलने और पड़ोसी देशों में शरणार्थियों के रूप में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा।












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