इराकी न्यूक्लियर सेंटर को तबाह कर चुका इजराइल, क्या अब ईरान की है बारी? लड़ाकू विमानों का खतरनाक अभ्यास
Israel-Iran Conflict: ईरान के साथ टेंशन के बीच रिपोर्ट आई है, कि इजराइली एयरफोर्स ने साइप्रस एयरस्पेस में सीक्रेट अभ्यास किया है, जिससे पता चलता है, कि सीरिया में ईरानी दूतावास पर हमला करने के बाद इजराइल को पता है, कि ईरान जवाबी कार्रवाई कर सकता है।
दमिश्क में तेहरान के दूतावास पर इजरायली हमले में 12 लोग मारे गए, जिनमें ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के एक वरिष्ठ नेता मोहम्मद रजा जाहेदी और छह अन्य गार्ड सदस्य शामिल थे।

हालांकि, ये कोई पहली बार नहीं है, जब इजराइल ने ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के किसी जनरल को निशाना बनाया हो, लेकिन किसी दूसरे देश में किसी दूतावास को किसी देश की तरफ से निशाना बनाने का ये पहला मामला है। और इस हमले से साबित होता है, कि इजराइल क्षेत्रीय युद्ध का खतरा उठाने के लिए तैयार है।
जबकि, कुछ एक्सपर्ट्स ये भी कह रहे हैं, कि गाजा पट्टी में भारी संख्या में इजराइली सैनिक हैं, लिहाजा इजराइल इस क्षेत्रीय युद्ध में अमेरिका को भी लपेटना चाहता है, ताकि उसके संसाधनों पर पड़ा बोझ कम हो। लेकिन, कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है, कि इजराइल ईरान के जवाबी कार्रवाई का ही इंतजार कर रहा है। क्योंकि एक बार युद्ध शुरू होगा, तो इजराइल के निशाने पर ईरानी न्यूक्लियर ठिकाना होगा।
पिछले साल आई यूनाइटेड नेशंस की रिपोर्ट में दावा किया गया है, कि ईरान ने करीब 90 प्रतिशत तक यूरेनियम संवर्धन कर लिया है, और एक से दो सालों में वो परमाणु बम बनाने लायक यूरेनियम तैयार कर लेगा। तो क्या, इस युद्ध का असल मकसद कहीं ईरानी न्यूक्लियर सेंटर को ही तबाह करना तो नहीं है?
जबकि, ईरान का परमाणु सिद्धांत कहता है, कि वो परमाणु ऊर्जा का इस्तेमाल सैन्य कार्य में नहीं करेगा। लेकिन सिद्धांत में वो अपने अस्तित्व की भी बात करता है। जाहिर तौर पर, ईरान के पास परमाणु हथियार होने का मतलब है, कि मिडिल ईस्ट में एक संभावित परमाणु युद्ध की शुरूआत।
क्या परमाणु ठिकाने पर हमला करेगा इजराइल?
इजराइल, अमेरिका और पश्चिमी सहयोगियों का कहना है, कि ईरान यूरेनियम को शुद्धता के स्तर तक समृद्ध कर रहा है, जिसका कोई नागरिक उपयोग नहीं है और इसे परमाणु हथियार बनाने की दहलीज पर ला रहा है।
इजराइल का अतीत में दुश्मन की परमाणु सुविधाओं पर हमले करने का भी इतिहास रहा है, जिनमें से एक प्रसिद्ध जून 1981 का ऑपरेशन ओपेरा शामिल है, जहां उसने सद्दाम हुसैन के शासन के दौरान ओसिरक में इराक के परमाणु रिएक्टर पर बमबारी की थी। वहीं, हाल के दिनों में इजराइल ने कई ऐसे सैन्य अभ्यास किए हैं, जिसमें उसने ईरानी परमाणु ठिकाने पर हमला करने का अभ्यास किया है।
ईरान के पास कई न्यूक्लियर फैसिलिटीज केन्द्र हैं, जिनमें बोनाब, रामसर और तेहरान में अनुसंधान रिएक्टर शामिल हैं। अरक में एक भारी जल रिएक्टर और उत्पादन संयंत्र है। बुशहर में एक परमाणु ऊर्जा स्टेशन है, जबकि, गाचिन में एक यूरेनियम खदान, इस्फ़हान में एक यूरेनियम रूपांतरण संयंत्र, नटान्ज़ और कोम में एक यूरेनियम संवर्धन संयंत्र और फोर्डो में एक अन्य भूमिगत यूरेनियम संवर्धन सुविधा मौजूद हैं।

साइप्रस सीमा पर US-इजराइल एयरफोर्स का अभ्यास
इजराइल के डिफेंस रिपोर्टर डोरोन कादोश के हवाले से एक रिपोर्ट में कहा गया है, कि इजराइली एयरफोर्स ने साइप्रस और संयुक्त राज्य अमेरिका की सेना के सहयोग से "ईरानी हमले के परिदृश्य का अनुकरण करते हुए" एक अभ्यास किया है।
इजराइली आर्मी रेडियो ने कादोश के हवाले से रिपोर्ट में कहा है, कि "कहा जाता है कि प्रतिभागियों ने ईरान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की योजना बनाते हुए लंबी दूरी के हमलों का अभ्यास किया है।"
कदोश ने कहा है, कि "ईरान की संभावित प्रतिक्रिया के लिए बढ़ती तैयारी के हिस्से के रूप में, जिसके बाद ईरानी धरती पर इजरायली प्रतिक्रिया भी हो सकती है, हाल के दिनों में, साइप्रस के हवाई क्षेत्र में साइप्रस सेना के साथ एक संयुक्त अभ्यास किया गया है, जिसमें ऑपरेशन और दूरस्थ लक्ष्यों पर हमला करने का अभ्यास किया गया है।"
कदोश ने इजराइली डिफेंस फोर्स के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से यह भी कहा है, कि "हम जानते हैं, और किसी भी क्षेत्र में कार्य करने के लिए तैयार हैं और अपने दम पर कार्य करने के लिए स्वतंत्र क्षमताएं बनाए रखते हैं - हम किसी पर भरोसा नहीं करते हैं।"
11 अप्रैल को इजरायल के प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने टेल नोफ एयरबेस का दौरा किया था, जहां उन्होंने कहा है, कि देश अन्य मोर्चों पर इजराइल के सामने आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयारी कर रहा है।
इस बेस पर इजराइल का एक F-15 स्क्वाड्रन तैनात है। और इजराइल ने ईरान की धमकियों का जिक्र करते हुए साफ शब्दों में कहा है, कि "हमारा एक सरल सिद्धांत है, जो कोई भी हमें नुकसान पहुंचाएगा, हम उसे वापस नुकसान पहुंचाएंगे।" इजराइल के F-15 स्क्वाड्रन में लंबी दूरी के हमलों के लिए देश की वायु सेना के प्राथमिक हथियार शामिल हैं।
निशाने पर हैं ईरान के परमाणु संयंत्र
इजराइली एयरफोर्स ने जिन लक्ष्यों को मारने का अभ्यास किया है, वे ईरानी परमाणु सुविधा केन्द्र हैं। टाइम्स ऑफ इजराइल के अनुसार, जून 2022 में दर्जनों इजराइली एयरफोर्स जेट विमानों ने "ईरानी परमाणु सुविधाओं पर हमला करने का अनुकरण करते हुए" भूमध्य सागर के ऊपर "हवाई युद्धाभ्यास" किया था।
इजरायली रक्षा बलों (आईडीएफ) ने कहा है, कि ड्रिल में "लंबी दूरी की उड़ान, हवाई ईंधन भरना और दूर के लक्ष्यों पर हमला करना शामिल है।" चैनल 13 समाचार ने बाद में खुलासा किया, कि अभ्यास में 100 से ज्याजा लड़ाकू विमान और नौसेना की पनडुब्बियों ने हिस्सा लिया था और ये युद्धाभ्यास 10,000 किलोमीटर तक फैली हुई थीं।
ये अभ्यास भी साइप्रस में हुए थे। रिपोर्ट में कहा गया है, "सिमुलेशन के दौरान जेटों को दो बार ईंधन भरा गया, क्योंकि उन्होंने साइप्रस का चक्कर लगाया और इजराइल में नकली हवाई हमले किए।"
इससे पहले 2021 में तत्कालीन आईडीएफ चीफ ऑफ स्टाफ अवीव कोहावी ने घोषणा की थी, कि उन्होंने सेना को "ईरान के खिलाफ नए हमले की योजना बनाना शुरू करने" का निर्देश दिया था। कोहावी ने कहा था, कि सितंबर 2021 तक सेना ने तेहरान के परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी "काफी तेज" कर दी थी।
इजराइल या अमेरिका.. किससे डरता है ईरान?
हालांकि, इजराइल का दावा है, कि वह स्वतंत्र रूप से ईरान का सैन्य रूप से मुकाबला कर सकता है, फिर भी वह व्यापक अमेरिकी सैन्य सुरक्षा पर निर्भर है। दमिश्क में ईरानी दूतावास पर हमले के बाद इजरायल के प्रति अमेरिका के समर्थन काफी बढ़ गये हैं। हालांकि, इस हमले के पीछे की वजह अभी भी ज्ञात नहीं है, लेकिन ईरानी के जवाबी हमले को देखते हुए अमेरिका ने इजराइल का पूरा साथ देने की घोषणा कर दी है।
अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने रक्षा मंत्री योव गैलेंट के साथ रात भर की बातचीत में स्पष्ट कर दिया है, कि अमेरिका, "ईरान और उसके प्रतिनिधियों की तरफ से होने वाले किसी भी खतरे के खिलाफ इजरायल के साथ खड़ा रहेगा।"
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भी 10 अप्रैल को अपने बयान में संभावित ईरानी खतरों के खिलाफ इजराइल के लिए "आयरनक्लाड" समर्थन का आश्वासन दिया है।
इसके अलावा, साइप्रस में जो युद्धाभ्यास किया गया है, उसमें अमेरिकी एयरफोर्स भी शामिल थी, और इसी को लेकर ईरान में डर है। अज्ञात अमेरिकी खुफिया सूत्रों ने सीएनएन को बताया है, कि अमेरिकी और इजरायली प्रतिशोध के डर से ईरान सीधे इजरायल पर हमला करने की संभावना नहीं है और इसके बजाय वह आने वाले दिनों में क्षेत्र में अपने प्रॉक्सी संगठनों की तरफ से इजराइल पर हमला करवा सकता है।
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