Israel attacks Lebanon: लेबनान पर इजराइल की नॉनस्टॉब बमबारी, राजधानी बेरूत में 33 की मौत, 195 घायल
Israel attacks Lebanon: इजराइल, हिज्बुल्लाह को खत्म करने के लिए लेबनान पर लगातार हमले कर रहा है, जिससे गाजा में चल रहे युद्ध के अलावा इस क्षेत्र में एक और युद्ध की आशंका बढ़ गई है। लेबनानी अधिकारियों के अनुसार, शनिवार को लेबनान की राजधानी बेरूत पर इजरायली हमले में 33 लोग मारे गए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, इजराइली एयरस्ट्राइक में कम से कम 195 लोग घायल भी हुए। शुक्रवार को इजराइली रक्षा बलों के हमले में हिज्बुल्लाह प्रमुख हसन नसरल्लाह मारा गया था, जिसने क्षेत्रीय तनाव को और भड़का दिया है और ईरान ने बदला लेने की कसम खाई है।

बेरूत के दहियाह में किए गए हमले में कई बड़े विस्फोटों ने दर्जनों इमारतों को नष्ट कर दिया और आसमान में काला धुआं छा गया। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है, कि इस हमले में 33 लोग मारे गए और 195 घायल हुए हैं। प्रमुख इज़राइली टीवी चैनलों के मुताबिक, ये हमले हिज़्बुल्लाह के आतंकवादी हसन नसरल्लाह को निशाना बनाकर किए गए थे, हालांकि सेना ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
हिज्बुल्लाह हेडक्वार्टर पर गिराए गये 80 टन बम
हिज्बुल्लाह ने शनिवार शाम को पुष्टि की, कि शुक्रवार रात 9:30 बजे इजराइली हवाई हमलों में नसरल्लाह की मौत हो गई है। इजरायली सेना ने बेरूत में हिज्बुल्लाह के मुख्यालय पर 80 टन के बम से हमला किया था। बताया जा रहा है, कि नसरल्लाह अपनी बेटी के साथ वहां मौजूद था। इजरायली सेना ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट किया, "हसन नसरल्लाह अब दुनिया को आतंकित नहीं कर पाएगा।" नसरल्लाह की मौत के बाद मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया है।
वहीं, नसरल्लाह की मौत के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने एक आपातकालीन बैठक की है। ईरानी अधिकारियों से मिली जानकारी से पता चला है, कि दक्षिणी बेरूत में हिज्बुल्लाह मुख्यालय पर इजरायली हमलों के बाद यह बैठक बुलाई गई थी। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, खामेनेई को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है।

आपको बता दें, कि हमास, हूती विद्रोही, और मध्य पूर्व के अन्य समूहों को ईरान का मजबूत समर्थन मिला हुआ है, और इन्हें 'प्रतिरोध की धुरी' कहा जाता है और इन संगठनों के पास स्वतंत्र मूल और सामाजिक-राजनीतिक संदर्भ भी हैं, लेकिन इसके बाद भी हिज्बुल्लाह जैसा ताकत इनके पास नहीं हैं और ईरान के साथ हिज्बुल्लाह जितनी वफादारी भी किसी ने नहीं दिखाई है।
हमास या हूतियों के विपरीत, हिज्बुल्लाह की स्थापना ईरान ने 1982 में की थी। उस समय सीरिया में ईरानी राजदूत अली अकबर मोहताशमी इसके सह-संस्थापकों में से एक थे।
फर्स्ट पोस्ट की एक रिपोर्ट में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज (SIS) में मध्य पूर्व के जानकार मुद्दस्सिर कमर कहते हैं, कि भले ही हमास और ईरान अब एक हो गए हैं, और ईरान हमास का समर्थन करता है, लेकिन हमेशा ऐसा नहीं था और ये समूह बहुत अलग हैं।
उन्होंने कहा, कि "हमास, मिस्र स्थित मुस्लिम ब्रदरहुड की एक शाखा है। यह एक फिलिस्तीनी सुन्नी समूह है। दूसरी ओर, हिज्बुल्लाह एक लेबनानी सशस्त्र शिया समूह है और ईरान न केवल इसकी स्थापना में शामिल था, बल्कि ईरान का इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) तब से समूह की वैचारिक, नैतिक, वित्तीय और सशस्त्र परवरिश में केंद्रीय भूमिका निभा रहा है।"












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