Israel Strikes Iran: क्या ईरान के परमाणु ठिकानों को तबाह कर पाएगा इजराइल, जानिए कमजोरी!
Israel Strikes Iran: ईरान पर इजराइली हमले के साथ ही इस बात की आशंका काफी ज्यादा बढ़ गई है, कि दुनिया में एक और लड़ाई शुरू होने वाली है और माना जा रहा है, कि इजराइली हमले के जवाब में ईरान भी खतरनाक कार्रवाई करेगा।
फिलहाल जो रिपोर्ट मिल रही है, उसके मुताबिक इजराइल ने ईरान के न्यूक्लियर फैसिलीटी वाले शहर इस्फहान में हमला किया गया और वहां एक एयरपोर्ट पर तेज धमाके की आवाजें सुनी गई हैं। वहीं, ईरान की आधिकारिक आईआरएनए समाचार एजेंसी ने दावा किया है, कि सीरिया में सैन्य स्थलों को निशाना बनाकर भी हमले किए गये हैं।

आईआरएनए ने कहा है, कि हमलों में आद्रा और अल-थाला सैन्य हवाई अड्डे और दक्षिणी सीरिया में आद्रा शहर और करफा गांव के बीच स्थित एक रडार बटालियन पर हमला किया गया है। इस बीच, इराक में बाबेल के अल-इमाम इलाके में विस्फोट की सूचना मिली है। जबकि, इजराइली सेना का कहना है, कि उत्तरी इजराइल में अलर्ट सायरन सक्रिय कर दिए गए हैं।
इस्फहान में ही क्यों किया गया हमला?
यह शहर रणनीतिक रूप से ईरान के लिए काफी ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है और यहां सैन्य अनुसंधान और विकास स्थलों के साथ-साथ परमाणु ठिकानों के साथ साथ कई महत्वपूर्ण सैन्य सुविधाएं स्थित हैं। इसके अलावा, इस्फहान के नजदीकी शहर नतांज़, ईरान के परमाणु संवर्धन स्थलों में से एक का घर है।
हमले के बाद ईरानी हवाई अड्डों और एयर नेविगेशन कंपनी के मुताबिक, ईरान ने तेहरान, इस्फ़हान और शिराज हवाई अड्डों सहित कई क्षेत्रों में उड़ानें सस्पेंड कर दी हैं। ईरानी समाचार एजेंसी के अनुसार, वायु रक्षा मिसाइलों को भी सक्रिय कर दिया गया है।
ईरानी राज्य टेलीविजन इस्फ़हान के आसपास की स्थिति को लेकर कहा है, कि "लगभग 1230 AM GMT" पर इस्फ़हान के आकाश में तीन ड्रोन देखे गए, जिसके बाद ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम ने तीनों ड्रोनों को आकाश में ही नष्ट कर दिया है। अभी तक ईरान ने इस हमले को लेकर इजराइल का नाम नहीं लिया है।
ईरान के परमाणु केन्द्र कहां कहां हैं?
ईरान के बारे में रिपोर्ट्स हैं, कि वो अगले 6 महीने से एक साल में परमाणु बम बना सकता है और उसने परमाणु बम बनाने के लिए कई ठिकाने बना रखे हैं।
ईरान के पास कई न्यूक्लियर फैसिलिटीज केन्द्र हैं, जिनमें बोनाब, रामसर और तेहरान में अनुसंधान रिएक्टर शामिल हैं। अरक में एक भारी जल रिएक्टर और उत्पादन संयंत्र है। बुशहर में एक परमाणु ऊर्जा स्टेशन है, जबकि, गाचिन में एक यूरेनियम खदान, इस्फ़हान में एक यूरेनियम रूपांतरण संयंत्र, नटान्ज़ और कोम में एक यूरेनियम संवर्धन संयंत्र और फोर्डो में एक अन्य भूमिगत यूरेनियम संवर्धन सुविधा मौजूद हैं।
इजराइल का अतीत में दुश्मन की परमाणु सुविधाओं पर हमले करने का भी इतिहास रहा है, जिनमें से एक प्रसिद्ध जून 1981 का ऑपरेशन ओपेरा शामिल है, जहां उसने सद्दाम हुसैन के शासन के दौरान ओसिरक में इराक के परमाणु रिएक्टर पर बमबारी की थी। वहीं, हाल के दिनों में इजराइल ने कई ऐसे सैन्य अभ्यास किए हैं, जिसमें उसने ईरानी परमाणु ठिकाने पर हमला करने का अभ्यास किया है।
क्या इजराइल के पास परमाणु केन्द्रों पर हमला करने की ताकत है?
इस सवाल का जवाब है, नहीं।
इसकी कई वजहें हैं।
1- सबसे पहले, ईरानी परमाणु सुविधाएं कम से कम पांच अलग अलग स्थानों पर बनाए गये हैं, वो भी अलग अलग पहाड़ियों पर। लिहाजा, अगर ईरान के परमाणु ठिकानों को पूरी तरह से नष्ट करना है, तो पांचों ठिकानों पर हमला करना होगा। और ये पांच वो ठिकाने हैं, जो ज्ञात हैं। हो सकता है, कुछ अज्ञात ठिकाने भी हों।
2- इजराइल से ईरान के परमाणु स्थलों तक सीधी उड़ान के लिए भी इजराइली फाइटर जेट्स को हवा में ईंधन भरने या फिर ईंधन भरने के लिए किसी और जगह पर रुकने की जरूरत होगी। इजराइल के पास F-15 लड़ाकू विमान ऐसे मिशन को अंजाम देने के लिए ही हैं, लेकिन दिक्कत ये है, कि इसकी रिफ्यूलिंग कैसे होगी?
3- ईरान के परमाणु सुविधा केन्द्र पहाड़ी वाले इलाकों में बंकरों के नीचे हैं और उन बंकरों को उड़ाने के लिए भारी मात्रा में विस्फोटक चाहिए, लेकिन इजराइली एफ-15 लड़ाकू विमान उतनी मात्रा में विस्फोटक ले जाने के काबिल नहीं है।
3- F-15 लड़ाकू विमान का लेटेस्ट वेरिएंट F-15EX के पास वो क्षमता है, कि वो ईरानी बंकरों को तबाह कर सके, और इजराइल ने अमेरिका से F-15EX को लेकर सौदा भी किया है। लेकिन, जानकारी के मुताबिक, अभी तक अमेरिका ने इजराइल को इस फाइटर जेट की डिलीवरी नहीं की है।
4- अमेरिका ने हमेशा से इजराइल की मदद की है और ऐसे ऐसे हथियार दिए हैं, जो अमेरिका, किसी को नहीं देता है। अमेरिका के पास ऐसे हथियार हैं, जो गहरे पहाड़ों में स्थित ईरान की परमाणु सुविधाओं को प्रभावी ढंग से तबाह कर सकता है। लेकिन, अमेरिका ने इजराइल को संघर्ष न बढ़ाने की सलाह दी है।
5- बंकरों को उड़ाने के लिए GBU-57 बम की जरूरत होगी, जो इस वक्त बंकरों को उड़ाने वाला सबसे भयानक बम है और ये बम सिर्फ अमेरिका के पास है। लिहाजा, सवाल ये है, कि क्या अमेरिका, इजराइल को इस वक्त वो बम देगा? इसकी फिलहाल उम्मीद नहीं के बराबर है, क्योंकि अमेरिका हरगिज नहीं चाहेगा, कि ये संघर्ष उस स्तर पर पहुंचे।
6- अमेरिकी एयरफोर्स बंकरों को उड़ाने वाला एक और बम बना रहा है, जिसे ग्लोबल प्रिसिजन अटैक वेपन (GPAW) कहा जाता है, जिसे यूएसएएफ के भविष्य के बमवर्षक बी-21 के लिए विकसित किया जा रहा है, जो चालू होने से कुछ साल दूर है।
7- GPAW उसी का एक प्रोडक्ट है, जिसे यूएस एयरफोर्स, नेक्स्ट जेनरेशन पेनेट्रेटर (NGP) कहता है। एनजीपी के आकार और वजन दोनों में बहुत छोटा होने की उम्मीद है (जीबीयू-57 का एक तिहाई), और इसे एफ-35 पर लोड किया जा सकता है।
लेकिन, सवाल ये है, कि क्या अमेरिका इस संघर्ष को बढ़ाना चाहेगा। इस बात की उम्मीद न्यूनतम है। लेकिन, अगर इजराइल फिर भी, ईरान के परमाणु ठिकानों को तबाह कर देता है, तो ईरान का परमाणु कार्यक्रम कम से कम 50 साल पीछे चला जाएगा या शायद उसके उसके लिए न्यूक्लियर बम बनाना नामुमकिन हो जाए। ईरान अब करीब एक साल के अंदर परमाणु बम तैयार कर लेगा, ऐसा संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया है।












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