इजरायली सेना ने पत्रकार शिरीन अबू की हत्या के लिए साल भर बाद मांगी माफी, अल जजीरा के रिपोर्टर को मारी थी गोली
द कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ) की हालिया प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है, कि इजराली सैनिकों ने पिछले 20 सालों में 20 पत्रकारों की हत्या की है, लेकिन एक भी मामले में जवाबदेही नहीं ली।

Shireen Abu Akleh: इजरायल ने पहली बार अलजजीरा के पत्रकार शिरीन अबू अकलेह की हत्या के लिए माफी मांगी है। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल रक्षा बलों ने गुरुवार को पहली बार अल जज़ीरा की पत्रकार शिरीन अबू अकलेह की मौत के लिए माफी मांगी है।
इजरायल ने शिरीन अबू अकलेह की हत्या के एक साल के बाद पहली बार माफी मांगी है। आपको बता दें, कि इजरायल के कब्जे वाले वेस्ट बैंक के जेनिन क्षेत्र में इजरायली सैन्य अभियान को कवर करते समय उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
इजरायल ने मांगी माफी
सीएनएन के अनुसार, अल जज़ीरा के पत्रकार को 11 मई 2022 को दुखद रूप से गोली मार दी गई थी, जबकि अकलेह के साथ मौजूद एक अन्य पत्रकार अली अल समुदी को भी गोली मार दी गई थी। सीएनएन के साथ एक साक्षात्कार में इजरायल डिफेंस फोर्स के मुख्य प्रवक्ता, रीयर एडमिनिस्ट्रेटर डेनियल हागरी ने पत्रकार की हत्या के लिए पहली बार माफी मांगी है।
इंटरव्यू के दौरान इजरायल डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) के मुख्य प्रवक्ता, रीयर एडमिनिस्ट्रेटर डेनियल हागरी ने कहा, कि "मुझे लगता है कि यह मेरे लिए, यहां कहने का अवसर है कि हम शिरीन अबू अकलेह की मौत के लिए बहुत दुखी हैं।"

यह पहली बार है जब आईडीएफ ने अल जजीरा की प्रसिद्ध संवाददाता की हत्या के लिए माफी मांगी है। पिछले साल अलजजीरा के पत्रकार की हत्या के कई दिनों तक इजरायल ने ये भी कबूल नहीं किया था, कि शिरीन अबू अकलेह की मौत इजरायली सेना की गोली से हुई है। कई महीने बीतने के बाद इजरायल ने शिरीन अबू अकलेह की मौत इजरायली सैनिकों के हाथों होने की बाद कबूली थी।
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इजरायली सेना के प्रवक्ता हागरी ने कहा, कि "वह एक पत्रकार थीं, एक बहुत ही स्थापित पत्रकार। इज़राइल में, हम अपने लोकतंत्र को महत्व देते हैं और लोकतंत्र में, हम पत्रकारिता और एक स्वतंत्र प्रेस को उच्च मूल्यों के साथ देखते हैं। हम चाहते हैं, कि पत्रकार इज़राइल में सुरक्षित महसूस करें, विशेष रूप से युद्धकाल में, भले ही वे हमारी आलोचना करते हैं।"
इजरायली सेना ने 20 पत्रकारों को मारा- दावा
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायली सेना की तरफ से अल जजीरा की पत्रकार की मौत पर उस वक्त दुख जताया गया है, जब द कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ) की एक रिपोर्ट प्रकाशित की गई है। इस रिपोर्ट में कहा गया है, कि पिछले 20 सालों में कम से कम 20 पत्रकारों की हत्या इजरायली सेना ने की है, लेकिन एक भी मामले की जवाबदेही नहीं ली।
प्रेस एडवोकेसी ग्रुप ने कहा, कि उसने 2001 के बाद से इजरायली सैनिकों की कार्रवाई में कम से कम 20 पत्रकारों की मौत का दस्तावेजीकरण किया है, जिसमें मारे गए लोगों में से 18 फिलिस्तीनी थे। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है, कि "इन मौतों के लिए किसी पर भी आरोप नहीं लगाया गया है, या उसे जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है।"
आईडीएफ ने इस घटना के करीब पांच महीने बीत जाने के बाद पिछले साल सितंबर में कहा था, कि इस बात की 'उच्च संभावना' है, कि इजरायली सैनिकों की फायरिंग में अबू अकलेह को "दुर्घटनावश" गोली लग गई हो, हो सकता है, कि वो इजरायल की क्रॉस फायरिंग से मारी गई हों। हालांकि, बयान में ये भी कहा गया, कि इस घटना के लिए इनका इरादा अपने किसी भी सैनिक के खिलाफ मुकदमा चलाने का नहीं है।












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